यशायाह 38:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं सूपाबेने या सारस के समान च्यूं-च्यूं करता, मैं पिंडुक के समान विलाप करता हूँ। मेरी आँखें ऊपर देखते-देखते पत्थरा गई हैं। हे यहोवा, मुझ पर अंधेर हो रहा है; तू मेरा सहारा हो!

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यशायाह 38:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 38:14 का संक्षिप्त वस्तु-प्रवेश और संदर्भ

यशायाह 38 अध्याय में आहित राजा आशा के भय और बीमारी के समय का अनुभव आता है। इस प्रकरण में यीशुना के पद गिरोह नहीं, बल्कि यह्र्वर का सन्तापजनक अंश है कि यहूदा के राजा अहाज़ के समय के उपलक्षणों के पीछे एक भयावह बीमारी और मृत्यु-भय है। 38:14 में इक्यावन-वचन, नृशंस चिह्नों के साथ, यहोवा के प्रति विश्वास में डूबे एक रोगी राजा की आर्त पुकार दिखती है। यह पाठ एक ऐसी स्थिति का वर्णन करता है जिसमें व्यक्ति अपने मानव विवेक और ईश्वर-सरूपता के बीच तनाव में है, जहाँ आत्मा और शरीर दोनों थक जाते हैं, परन्तु ईश्वर की कृपा के लिए आशा बना रहता है।

मुख्य अर्थ और संदेश

इस आयत में तूफानी दर्द के बीच आत्म-चिंतन और ईश्वर की सहायता की पुकार है। रोग के समय आशा की किरणें तब उभरती हैं जब व्यक्ति कहते हैं कि “हे यहोवा, तेरा मेरा सहारा हो”। यह दर्शाता है कि विश्वास और करुणा, भय के बावजूद, ईश्वर के साथ गहरे सम्बन्ध का प्रमाण है। दो प्रमुख विचार सामने आते हैं: एक, मानवीय पीड़ा के समय भी ईश्वर की उपस्थिति को पहचानना; दो, डूबते वक्त भी ईश्वर पर निर्भर रहने का विश्वास बनाये रखना।

तीन प्रमुख थीमैटिक बिंदु

  1. आत्म-व्यथा और विनय: रोगी की आर्तस्वर में अपने पड़े हुए दर्द और थकान को उद्घाटित करना, आत्म-उद्धार की पहलकदमी नहीं बल्कि ईश्वर के सहारे की मांग।
  2. आशा की क्रिया: “तू मेरा सहारा हो” भीतरी भरोसे की पुष्टि है कि परमेश्वर के साथ नये जीवन-प्राण बन सकते हैं, बीमारी से पार पाने का रास्ता उसी आस्थापूर्ण निर्भरता से खुलता है।
  3. ईश्वर के कार्यक्रम की चर्चा: क्या यह अंश रोग-व्यथा को नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा और उद्धार के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए? यह पाठ विश्वास की दृढ़ता और प्रभु के समय-निर्णय पर भरोसे कोStrengthen करता है।

संबंधित आयतें (क्रॉस-रेफरेंसेज)

1) यशायाह 38:17 — “पाप के कारण बोझ तुझे घुटन देता है, परन्तु मैं तेरी सुध-बुध बनाऊँगा।” यह बताता है कि दुख के पीछे ईश्वर की योजना और उद्धार का मार्ग होता है।

2) भजन 34:18 — “टूटे दिलवाले परमेश्वर के निकट रहते हैं; नहीं, वह टूटे हृदयों को देखता है।” भय और पीड़ा के समय परमेश्वर के पास आश्रय ढूंढ़ना उद्धार का मार्ग है।

3) प्रेषित 17:27 — “कि वे ईश्वर को खोजें और उसके से प्राप्त कर लें”— संकट के क्षणों में भी परमेश्वर के निकट पहुँचने का संकेत।

व्यावहारिक विचार

यहाँ की सीख यह है कि कठिन समय में भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए, और अपनी पीड़ा को खुलकर ईश्वर के सामने रखना चाहिए। अगर किसी प्रभावित हृदय में डर या निराशा है, तो यह आयत एक प्रेरणा देती है कि प्रभु हमारे साथ है और उसकी सहायता आने वाली है। विश्वासी जीवन में यह भी याद रखना चाहिए कि ईश्वर की सहायता कभी-भी देरी से आती हो, परन्तु वह निश्चय ही उपस्थित रहता है।

संक्षिप्त समापन

यशायाह 38:14 एक पल-भर के लिए दर्द, भय, और उलझन के बीच भी ईश्वर के प्रति भरोसे का श्लोक है। यह बताता है कि रोग-व्यथा के समय भी आत्म-समर्पण और ईश्वर की कृपा के आश्रय से नवीन जीवन की आशा जगी रहती है।

छोटी दलील परिवर्तन के साथ, यह पाठ यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी प्रभु के साथ संवाद और निर्भरता ही हमारा वास्तविक साहस बनते हैं।

उद्धृत टिप्पणीकारों की संक्षिप्त झलक

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेखित टिप्पणी-उद्धरण आवश्यकतानुसार संक्षेप में मिलते हैं; नीचे उनके प्रमुख निष्कर्ष की संक्षेप भाषा दी गई है:

  • Matthew Henry: बीमारी और विपत्ति के समय ईश्वर की सहायता माँगना ही विश्वास की पहचान है।
  • Albert Barnes: आत्म-व्यथा के बीच भी भक्ति-विश्वास की राह खुलती है; ईश्वर का साथ ही वास्तविक राहत है।
  • Adam Clarke: पीड़ा को ईश्वर-नियमों के प्रकाश में देखना चाहिए, और दिव्य सहायता पर निर्भर रहना चाहिए।

इन आविर्भावों के सन्देशों को समेकित करते हुए, यह commentary एक संतुलित, प्रायोगिक और धार्मिक पाठ प्रस्तुत करता है जो हिंदी पाठकों के लिए उपयुक्त और स्पष्ट है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 38:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 59:11 (HINIRV) »
हम सब के सब रीछों के समान चिल्लाते हैं और पिंडुकों के समान च्यूं-च्यूं करते हैं; हम न्याय की बाट तो जोहते हैं, पर वह कहीं नहीं; और उद्धार की बाट जोहते हैं पर वह हम से दूर ही रहता है।

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