यशायाह 38:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं क्या कहूँ? उसी ने मुझसे प्रतिज्ञा की और पूरा भी किया है। मैं जीवन भर कड़वाहट के साथ धीरे-धीरे चलता रहूँगा।

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यशायाह 38:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 38:15 — प्राकृत संदर्भ और केंद्रीय भावार्थ

यशायाह की पुस्तक में यह भाग यहूदा राजा अश्तर-शद्ध के आसन्न रोग-समय और ईश्वर की कृपा-यात्रा का वर्णन है। पठित वाक्य उस समय के अनुभव को चित्रित करता है जब यूहन्ना (हिज़किय्याह) ने अपने रोग के बारे में ईश्वर के वचन और भविष्यवाणी को आत्मसात किया। वह अपने अनुभव को ईश्वर की क़ुदरत और वचन की प्रतिज्ञा से जोड़ा रहा है: उन्होंने कहा, मैंने जो कहा और किया गया, वह ईश्वर की प्रतिज्ञा से हुआ है; अब मैं जीवनभर धीरे-धीरे चलूँगा, कड़वाहट के साथ भी।

केंद्रीय अर्थ

यह वाक्य दर्शाता है कि विश्वासी व्यक्ति अपने दैहिक पीड़ा और जीवन की परीक्षाओं को भी ईश्वर के नियंत्रण के तहत मानता है। हिज़क्याह ने देखा कि उसकी स्थिति कितनी भी कठिन हो, पर परमेश्वर के निर्धारित मार्ग में उसकी सुरक्षा और कृपा बनी रहेगी—यह उसकी प्रतिज्ञा के कारण है। वह धीमे-धीमे, क्रमशः चलने की मानसिकता लेता है, न कि निराशा या प्रतिरोध में फँसकर नियंत्रण खोने को। यह आत्म-स्वीकृति, विश्वास की निर्भरता और धैर्य की मिसाल है।

मुख्य विषय

  • आज्ञाकारिता बनाम पीड़ा: पीड़ा के बीच भी ईश्वर के उद्देश्य को मानना।
  • विश्वास की प्रतिज्ञा: ईश्वर ने जो कहा, वही क्रम से पूरा होगा, यह भरोसा।
  • धैर्य और धीमी गति: कठिन समय में भी आस्था के साथ आगे बढ़ना।

Related passages (संक्षिप्त संपर्क)

- יהושע (यशायाह 26:8) जैसी अनुभूति, जहाँ आत्मा भरोसे के साथ मार्ग खोजती है।
- रोमियों 8:28 के समान विचार, जिसमें वे कहते हैं कि सभी चीजें मिलकर अच्छी राह बनाती हैं—पराक्रमी काम के लिएविश्वास।
- 2 कुरिन्थियों 4:17-18, चोटों के समय स्थिर आशा का प्रतिफल: क्रूर क्षण भी महत्त्वपूर्ण उन्नति में बदल सकते हैं।

व्यावहारिक विचार

जब हमें रोग-पीड़ा या कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, तो हमारी पहली प्रतिक्रिया भय या निराशा हो सकती है। पर यहाँ कहा गया है कि धैर्यपूर्वक, और अपनी स्थिति को ईश्वर की प्रतिज्ञा के प्रकाश में देखना चाहिए। अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे कदम उठाएं—प्रार्थना, परमेश्वर के वचन का स्मरण, और विश्वासी साथियों के साथ सहयोग—ताकि धीरे-धीरे भी सही दिशा में आगे बढ़ना संभव हो सके।

सारांश

यशायाह 38:15 ऐसे समय का बयान है जब एक विश्वासयोग्य व्यक्ति अपने रोग और कठिनाईयों के बीच भी ईश्वर की प्रतिज्ञा के अनुसार चलने का साहस पाता है। यह धैर्य, आत्म-स्वीकृति और ईश्वर पर अटूट भरोसा का संदेश देता है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी हों, परमेश्वर की मार्गदर्शिका से वे सभ्य और उद्धारकारी अंत तक पहुँचती हैं।

Cross-references

- परमेश्वर की प्रतिज्ञा और विश्‍वास: रोम 8:28; यकूब 1:12 के साथ समांतर विचार।
- धैर्य और कठिनाई में आगे बढ़ना: रोम 5:3-5, जम्हर्ता के समय धैर्य विकसित होने की कितनी आवश्यकता है।
(नोट: वास्तव में उद्धृत शास्त्री-मार्गदर्शक वाक्यों के संक्षेप नेक रूपरेखा के रूप में दिए गए हैं; पूर्ण पाठ नहीं दिए गया है।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 38:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“मेरा प्राण जीवित रहने से उकताता है; मैं स्वतंत्रता पूर्वक कुड़कुड़ाऊँगा; और मैं अपने मन की कड़वाहट के मारे बातें करूँगा।

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