Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 41:4 का संदर्भ और उसका तात्पर्य
यशायाह 41:4 में परमेश्वर अपनी आत्मीय प्रभुत्व और अनंत स्थायित्व की घोषणा करते हैं। संदर्भ में यह कर्मप्रवाह उद्धारक योजना का भाग है: परमेश्वर जिसने आदि से पीढ़ियों तक राज किया है, वही वर्तमान समय में भी नियंत्रण और सुरक्षा प्रदान करता है। विषय-वस्तु यह है कि प्रभु वही है जो शुरुआत से अंत तक सब कुछ संचालित करता है, और वह वही है जो पीछे से आगे तक हर कहानी और इतिहास को निभाता है।
मुख्य अभिप्राय
यह पद यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर का दिव्यमिशन एक अनंत, अपरिवर्तनीय क्रम है। वह "जो पहले है" और "अंत के समय रहेगा"—यानी वह सभी समयों के ऊपर है, और वह वही है जो इतिहास को निर्धारित करता है। उसके द्वारा बुलाये गए कामों में विश्वसनीयता और स्थायित्व है।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफेरेन्स (संवाद-संदर्भ) और संक्षिप्त व्याख्या
1) प्रकाशितवाक्य 1:8 – परमेश्वर अपने स्थापना के शीर्षक के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करते हैं; यह मिलाप दिखाता है कि कुरबानी के बाद भी प्रभु वही रहता है।
2) प्रकाशितवाक्य 22:13 – वह है जो शुरू से है और अंत भी वही; यह सर्वव्यापक अधिकार इस पाठ के समेकन के साथ संगत है।
3) यूहन्ना 1:1-2 के संकेत— verbo: “यहोवा के साथ शब्द था”— यह विचार कि परमेश्वर की व्यवस्था शब्द के माध्य से भी दीक्षित है, जो समय के ऊपर है।
आध्यात्मिक और व्यवहारिक अनुप्रयोग
- भरोसे के केंद्र में परमेश्वर की अखंडता: कठिन समय में भी वह वही है जो पहले रहा और अंत तक रहेगा।
- प्रेरणा for जीवन-पथ: हमारी यात्राओं में डर के बजाय उसकी स्थिरता पर टिके रहें।
संक्षिप्त विश्लेषण
यशायाह 41:4 एक प्रण है— परमेश्वर की सत्ता और योजनाएँ अडली नहीं जा सकतीं; वह पहले और अंत में है। यह संदेश प्रेषित करता है कि ईश्वर की बुलाहट और उसकी योजना विश्वसनीय है, इसलिए अपने जीवन को उसके मार्ग के अनुरूप समर्पित करें।