Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 41:29 पर टिप्पणी — नश्वरता की अंतिम असारगता
मुख्य interpretive बिंदु: अंततः मानव-निर्मित वस्तुएँ और मूर्तियाँ मनुष्यों के प्रयत्नों के सामर्थ्य को नहीं दर्शातीं; वे निर्थक और वायु-सी असत्य हैं, जबकि परमेश्वर सब शक्तिमान है। शास्त्र-संदर्भ में यह चेतावनी उन लोगों के लिए है जो ईश्वर से विमुख होकर अपने उपक्रमों को सर्वोच्च मानते हैं और जिन्हें न तो उनका ज्ञान और न उनका विज्ञान उद्धार दे पाता है।
सीधे पाठ का साहित्यिक संदर्भ
यशायाह 41 के अध्याय में परमेश्वर के उद्धार के भरोसे के विरुद्ध, उद्धारकर्ता-युग में लोगों के लिए मिथ्या ढंग से सुरक्षा दिखाने वाले रचयिताओं की असलियत उजागर होती है। यहाँ कहा गया है कि उनके सभी कर्म व्यर्थ हैं, उनके काम तुच्छ, और उनकी मूर्तियाँ वायु और मिथ्या हैं। यह संदेश स्पष्ट रूप से यह स्थापित करता है कि धरातलीय इर्ष्या, धन-संपत्ति और मनगढ़ अस्त्र-शस्त्र भी परमेश्वर के विरुद्ध टिक नहीं पाते।
कथानक-संदर्भ और कविता-आधार
यह उद्घोष अहंकार पर चोट है: प्रतिदेव-पूजा और पत्थर-निर्मित मूर्तियाँ लोग स्वयं बनाते हैं, पर वे न तो सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न सांत्वना दे सकती हैं। मसीह-पूर्व के इस उद्घोष में यह भी संकेत है कि उद्धार का एकमात्र स्रोत परमेश्वर है, जो शब्द-केन्द्रित साबित होता है और हमारे जीवन को वास्तविक दिशा देता है।
THEOLOGICAL SIGNIFICANCE
ინसर्ग में यह विचार पक्का करता है कि मानव-निर्मित सुरक्षा और पूजा पथ-भ्रष्ट हो सकती है। मूर्तिपूजा का निवारण देखकर परमेश्वर की सर्वसत्ता और विश्वसनीयता की आवश्यकता स्पष्ट होती है। यह संदेश यह भी पढ़ाता है कि परमेश्वर की पहचान और कार्य-साक्ष्य बाह्य दिखावे से नहीं मापा जाता, बल्कि उसकी सच्ची सत्ता और प्रेरणाओं से परखा जाता है।
वाचन-आधारियों के across-scripture connections
विचार-प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 41:29 हमें स्मरण कराता है कि वास्तविक मूल्य और टिकाऊ सुरक्षा परमेश्वर के हाथों में है—उनकी आवाज़, उनकी कृपा और उनकी योजनाओं पर। जो लोग मिथ्या सुरक्षा-आकर्षणों को पकड़ते हैं, वे अंततः निरर्थक पाते हैं; पर जो परमेश्वर के साथ रहते हैं, वे सत्य और जीवन पाते हैं।
पूर्व-प्रकाशन उद्धरण संकेत
अगर आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणी-खण्ड से किसी वाक्य का संक्षिप्त उद्धरण चाहते हैं, तो उपलब्ध हो तो नीचे दे दूँगा। इस पाठ के लिए विशिष्ट उद्धरणों को केवल आवश्यक और सही संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया गया है।