Old Testament
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यशायाह 42:10 पर टिप्पणी — नया गीत की पुकार
सीधे शब्दों में अर्थ: यह வசंक्त यहोवा के लिए प्रकृतियों के हर क्षेत्र—समुद्र, द्वीप और पृथ्वी के किनारे—से आत्म-समर्पण के साथ नया गीत गाने की प्रेरणा है। नीति-संकेत में कहा गया है कि सारे रहने वालों को अपनी-अपनी भाषा और ध्वनि में ईश्वर की महानता का उद्घोष करना चाहिए।
पृष्ठभूमि और प्रसंग
यशायाह के संदर्भ में यह उद्घोषायण गीत है जो संदेशवाहक नबी के रूप में इस्राइल-समाज को परमेश्वर के उद्धारकारी कार्य, न्याय और नई व्यवस्था के लिए बुलाहट देता है। यहूदी समुदाय जब exile के बाद लौटना और परमेश्वर की वाणी के अनुरूप नये योगदान की उम्मीद कर रहा था, तब यह गीत समस्त राष्ट्रों तक ईश्वर की महिमा पहुँचाने की आह्वान देता है। परमेश्वर के विश्वास और शक्ति का यह उद्घोष सभी जातियों के लिए एक खुला निमंत्रण है: सब कुछ छोड़ कर उसकी स्तुति करें।
interpretive observations
संक्षिप्त थीमालिास्त्र
समानांतर संदर्भ और उनके तात्पर्य
भजन 96:1-3 — उपलब्धि के गीत का बहार, सभी जातियों के लिए नए गीत का महत्व।
भजन 97:1 — राजा प्रभु की महिमा का सार्वभौम उद्घोष।
यशायाह 11:10 — दूसरे देशों में से भी दावत के गीत का विस्तार, उद्धार की वैश्विकिमा की प्रतीक्षा।
पवित्र ग्रंथ-स्थिति से समेकित टिप्पणी
Matthew Henry के अनुसार यह उद्घोष ईश्वर के अद्भुत उद्धार के भविष्यसूचक संकेत के रूप में है—सब मिलकर उसकी महिमा गायेंगे क्योंकि उसकी न्याय-कारी योजना विश्व-भर में पूर्ण होगी।
Albert Barnes ने स्पष्ट किया कि “नया गीत” पुराने से अधिक उन्नत, पृथ्वी के हर भाग तक पहुँचा हुआ है, और यह स्तुति का पूर्ण, उन्नत स्वर है जो आंतरिक परिवर्तन को प्रकट करता है।
Adam Clarke के अनुसार यह संदेश यह दर्शाता है कि परमेश्वर का उद्धार केवल इस्राइल तक सीमित नहीं है, बल्कि संसार के सभी भागों में स्वीकृत और प्रशंसित होना चाहिए।
निष्कर्षात्मक व्यावहारिकTakeaway