यशायाह 42:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पहाड़ों और पहाड़ियों को मैं सूखा डालूँगा और उनकी सब हरियाली झुलसा दूँगा; मैं नदियों को द्वीप कर दूँगा और तालों को सूखा डालूँगा।

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यशायाह 42:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 42:15 — अर्थ का संक्षेप

यह शास्त्री स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर अपनी शक्ति से ऐसी विपत्ति की चेतावनी दे रहे हैं जिससे प्राकृतिक जीवन के पर्याप्त संकेत मिट जाते हैं—पहाड़ों की स्थिति सूखती है, नदियाँ सूखेंगी और ताल-तलैया बोझिल और निर्जन हो जाएँगी। यह परमेश्वर की न्याय-योजना और उद्धार-कार्य के दोनों पक्षों का एक संकेत है: कभी-कभी स्पष्ट करे बिना भी, वह अपनी महत्ता और राज-नियमों को मजबूत करने के लिए क्रोध के वेग के साथ भूमि को चिह्नित करता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यशायाह पुस्तक में परमेश्वर अपने दास बनकर के संदेशवाहक के रूप में ज्योति और न्याय दोनों का प्रकट करना चाहते हैं। यहां कहा गया है कि वह परमेश्वर गिरहों को खोल दे, बल्कि चक्रवर्ती güç के साथ प्रकृति पर भी शासन करता है। यह उद्धार-योजना के अनुसार उसे यह दिखाने का एक भाग है कि जब लोग अल्लार-अपनों के पथ से भटकते हैं, तब भी परमेश्वर अंततः न्याय और पुनःस्थापना का कार्य करते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • प्रकृति का छिन्न-भिन्न होना परमेश्वर के आगमन-आवेश का प्रतीक है—यानी गड़बड़ संसार में उसका मजबूत नियंत्रण स्पष्ट हो रहा है।
  • झुलसती हरियाली और सूखे ताल-तलैयों से यह संकेत मिलता है कि प्राकृतिक जीवन की सामान्यता खो जा सकती है, किन्तु यह संकेत भी संकेत-प्रेरणा है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य के लिए स्थिति को बदलेगा।

छोटी थीम सूची

  • प्रकृति पर परमेश्वर की सत्ता
  • दया और न्याय की एक साथ उपस्थिति
  • धर्मपत्नी-आस्था में पुनःस्थापना की आहट

अन्य आयतों के सम्बन्ध (संक्षेप में स्पष्ट निष्कर्ष)

यशायाह 42:15 जैसी भाषा अक्सर यह संकेत देती है कि परमेश्वर अपनी योजना में प्रकृति के नियमों को भी अनुशासित कर सकता है। अन्य संदर्भ जो इस विचार को प्रकट करते हैं—जिनमें एक प्रमुख विषय है: प्रभु की सत्ता से परिस्थिति का नियंत्रण।

1) प्राकृतिक विपत्तियाँ अक्सर दैवीय चेतावनी का भाग होती हैं ताकि लोग पलटकर परमेश्वर के मार्ग पर आ जाएँ।

2) उद्धार-कार्य में, परंतु, यह साक्ष्य देता है कि उसकी योजना में पुनर्निर्माण और नई शुरुआत संभव है।

3) यह भी संकेत देता है कि विश्वासियों के लिए विपत्तियाँ कभी-कभी आध्यात्मिक जागृति और पुनःस्थापना का अवसर बन जाती हैं।

किताबी उद्धरणों के साथ संक्षेप

यहाँ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों के अनुरूप, मूल संदेश यह है कि परमेश्वर अपने महान क्रम और न्याय के अनुसार पृथ्वी-जीवन की स्थिति को परिवर्तित कर देते हैं ताकि लोग उसके रास्ते पर लौटें।

Medley (संकेत/उद्धरण): Henry बोले तो—“God can bring to ruin what man has made secure by riot and riotousness.” Barnes ने कहा—“When the Lord speaks in such terms, it is to call His people from sin to obedience.” Clarke ने भी यही संकेत किया कि यह प्राकृतिक संकेत परमेश्वर के पवित्र शासन के प्रमाण हैं।

तत्पर्यपूर्ण व्यवहारिक takeaway

अगर हम विपत्तियों के बीच रहें, तो ऊपर कीर्ति-योजना को याद रखें: परमेश्वर की सत्ता और उद्धार-योजना के अनुसार प्रयोजन है—हम अपने रास्ते समेटें, उनकी ओर लौटें, और विश्वास में स्थिर रहें। यह न केवल प्रकृति के संकेतों को समझना है, बल्कि उसकी महिमा के लिए अपने जीवन के प्राथमिकताओं को बदलना है।

संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंस

- यशायाह 45:7 — समस्त योजनाओं में प्रभु की सामर्थ्य और न्याय की भूमिका।

- रोम 8:22 — सृष्टि भी दर्द के साथ उत्पत्ति के उद्धार की अपेक्षा कर रही है।

- जन 9:11 — पृथ्वी पर परमेश्वर का नियन्त्रण और उसकी प्रतिज्ञाओं की पुनःस्थापना।

इन संदर्भों से स्पष्ट है कि प्राकृतिक घटनाओं के माध्यम से परमेश्वर अपने लोगों को पुकारता है, उन्हें उद्धार की ओर बुलाते हैं, और पुनःस्थापना का मार्ग खोलते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 42:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसका क्या कारण है कि जब मैं आया तब कोई न मिला? और जब मैंने पुकारा, तब कोई न बोला? क्या मेरा हाथ ऐसा छोटा हो गया है कि छुड़ा नहीं सकता? क्या मुझ में उद्धार करने की शक्ति नहीं? देखो, मैं एक धमकी से समुद्र को सूखा देता हूँ, मैं महानदों को रेगिस्तान बना देता हूँ; उनकी मछलियाँ जल बिना मर जाती और बसाती हैं।

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उसके घुड़कने से महानद सूख जाते हैं, वह सब नदियों को सुखा देता है; बाशान और कर्मेल कुम्हलाते और लबानोन की हरियाली जाती रहती है।

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जो गहरे जल से कहता है, 'तू सूख जा, मैं तेरी नदियों को सूखाऊँगा;' (यिर्म. 51:36)

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