Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 48:15 पर टिप्पणी – स्पष्ट अर्थ
इस पद का संक्षिप्त अर्थ है: परमेश्वर जाँच-पड़ताल करके कहते हैं कि मैंने कहा और बुलाया, मैंने ले आकर काम की दिशा निर्धारित की है; परिणामस्वरूप वह भी सफल होगा। यहां प्रभु अपने उद्देश्य के प्रति अपनी सझ-बुझ और स्वतंत्रता की पुष्टि कर रहे हैं: उनके निर्णय से पूर्व एक योजना बन चुकी है और वह इसे पूरा कर के दिखाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह दिव्यूद के समय की यह किताब है, जब यहोवा के लोग बाबुल के बंधन से दूर रहकर भी परमेश्वर की योजनाओं को मानने और उन पर विश्वास करने की प्रेरणा लेते हैं। 48 अध्याय में इस्राइल के पापों के कारण डर और आक्रोश का संदेश है, परन्तु अंत में ईश्वर के उद्धारक हाथ की ओर उन्मुख होने की पुकार है। verse 15 विशिष्ट रूप से प्रभु की संप्रभुता को दर्शाता है—मैंने कहा, मैंने बुलाया, मैं ने लाया—यानी हर घटना के पीछे परमेश्वर का निर्णय है, मानव प्रयास के बावजूद भी उसकी योजना अग्रसर होती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त विचार (थीमैटिक बिंदु)
अन्य प्रासंगिक पद (क्रॉस-रेफरेंसेज)
1) यशाय 46:10 — परमेश्वर के उद्देश्य पूर्व निर्धारित हैं; उसने इतिहास के हर मोड़ को नियंत्रित किया है ताकि योजनाएँ पूरी हों।
2) रोम 8:28 — परमेश्वर की योजना के अनुसार जो प्रेम रखते हैं, उनके लिए सभी चीजें एक साथ मिलकर भलाई के लिए काम करती हैं; यह पुष्टि करता है कि प्रभु की बुलाहट सफलता की दिशा देती है।
3) युट्ज 9:11 (उद्धार हेतु बुलाहट के संदर्भ में) — परमेश्वर की पुकार और ग्रेसी से प्रेरित उद्धार की प्रक्रिया संकेतित है कि वह कैसे बुलाता है और कैसे वह जीवन को नई दिशा देता है।
पाठ से साधारण, ठोस अनुप्रयोग
परमेश्वर की संप्रभुता पर भरोसा रखें—कभी-कभी दृष्टिगोचर घटनाएँ विपरीत दिख सकती हैं, पर उसकी योजना सुरक्षित है। भय नहीं, क्योंकि उसकी बुलाहट और लाने से ही उद्धार और सफलता आती है। विश्वासी जीवन में यह स्पष्ट करता है कि हमारी सफलता उसकी कृपा और मार्गदर्शन पर निर्भर है, न कि अपने तर्क या प्रयासों पर अकेले।
टेकअवे
नोट: नीचे दिये गए उल्लेखित उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन भाष्य से सीधे स्वीकृत वाक्यों के संकलन के लिए आवश्यक हिस्से तब ही उद्धृत होते हैं, जब वे पद के साथ मेल खाते हों।