यशायाह 48:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

निश्चय मेरे ही हाथ ने पृथ्वी की नींव डाली, और मेरे ही दाहिने हाथ ने आकाश फैलाया; जब मैं उनको बुलाता हूँ*, वे एक साथ उपस्थित हो जाते हैं।” (इब्रा. 1:10)

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यशायाह 48:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 48:13 - पवित्र उद्धार का स्पष्ट संकेत

यशायाह 48 का यह भाग यहूदियों के लिए चेतावनी और आश्वासन दोनों को समेटे है: परमेश्वर की सत्ता और सुरक्षा का स्पष्ट प्रमाण। जिस समय भाइयों-बहनों ने निराशा में यह सोच लिया कि सामर्थ्य टूट गया है, तब यह उद्घोष सुनाते हैं कि पृथ्वी की नींव और आकाश की फैला-ढलान परमेश्वर के हाथों में है। यहाँ न केवल सृष्टि की रचना-कार्य की याद दिलाई जाती है, बल्कि परमेश्वर की अभिमान-रहित निगाह और सदा-प्रवृत्ति की पुष्टि भी मिलती है।

केंद्रीय अर्थ

यह शास्त्र दो बातें स्पष्ट करता है: परमेश्वर ने सृष्टि की नींव स्वयं रखी है और वह सत्ता से शासन करता है। जब वह बोलता है, तो भविष्य भी उसी के निर्देशानुसार आ घटनाओं में प्रवाहित होता है। वेदना या विरोध के समय में भी उसका निर्देश स्पष्ट रहता है—आकाश, पृथ्वी और मानव इतिहास उसके हाथों में सुरक्षित है।

मुख्य विषय

  • सत्ता की पुष्टि: पृथ्वी-नींव और आकाश—दोनों उदाहरण यह दर्शाते हैं कि रचना की हर दरार तक परमेश्वर का मार्गनिर्देशन स्थापित है।
  • आगमन और बुलावा: जब परमेश्वर बुलाता है, लोग एक साथ उपस्थित होते हैं—यानी उसकी योजना में सब भागीदार होते हैं, और उसके आदेश के अनुसार समय-सारिणी चलती है।
  • विश्वास और सुरक्षा की स्मरण: इब्रा. 1:10 के संदर्भ से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर स्वयं क्रियान्वयनकर्ता है, न कि निर्गमक रूप से बाहर का कोई सत्ता-स्तंभ।

कई प्रमुख चर्चित विचार

यहाँ दो-तीन चरम विचार निम्न प्रकार से समर्थित होते हैं:

  • निर्देशन की स्थिरता: परमेश्वर की योजना अपरिवर्तनीय है; मानव इतिहास की घटनाओं के पीछे वही हाथ काम करता है।
  • उद्धार की सुनिश्चितता: संकट के बीच भी ईश्वर की नियुक्ति और बुलावा आगे बढ़ते हैं;Praise और निर्णय उसी के अनुसार होते हैं।
  • विश्वास के अभिनय का निमंत्रण: वचन की आवाज़ पर विश्वास करके लोग अपनी भूमिका में प्रगट होते हैं; यह सहयोग का आह्वान है।

क्रॉस-संदर्भ

1) इब्रानियों 1:10—“तब भी वही एक ही प्रेरक है;” इस संदर्भ से दिखता है कि पुराने और नए काल का परे भी परमेश्वर की रचना-योजना एक है।

2) जागह-रचना के संदर्भ: पेष्तुसर 4:11 के संकेत कि परमेश्वर के बुलावे में प्रजा का उद्धार न केवल सत्ता का प्रदर्शन है, बल्कि सुरक्षा का भी प्रमाण है।

3) यूहन्ना 1:3—“उसके द्वारा सब कुछ बना है”—यह Verse ध्यान दिलाता है कि सृष्टि की जैविक-कायान्तरी भी उसकी योजना के अनुरूप चलती है।

व्यावहारिक चिंतन

कभी-कभी हमारे सामने परिस्थितियाँ गहरी चुनौती बन जाती हैं; तब भी यह संदेश स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना और नियंत्रण स्थिर हैं। दैनिक निर्णयों में—चाहे वह घर-परिवार का प्रबंध हो या मेहनत-कार्य का चयन—आस्था के साथ यह मानना चाहिए कि वह हर चीज़ बनाए रखता है।

संक्षिप्त समापन

यशायाह 48:13 हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी की नींव और आकाश का विस्तार परमेश्वर के हाथों में है। वह बुलाता है, और जन-समुदाय एक साथ खड़े होते हैं; उसकी योजना अजर-अमर है। यह संदेश हमारी सुरक्षा and हमारा आस्था-आह्वान है—कि हर चुनौती में भी वही विराजमान है, जो शुरू से अंत तक सब कुछ संचालित करता है।

टिप्पणी स्रोत संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरी-चर्चा से संग्रहीत विचारों के छोटे उद्धरण यहाँ आवश्यकतानुसार समाहित किये गए हैं; व्यापक उद्धरण मात्र संकीर्ण संदर्भ में सम्मिलित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 48:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि यहोवा जो आकाश का सृजनहार है, वही परमेश्‍वर है; उसी ने पृथ्वी को रचा और बनाया, उसी ने उसको स्थिर भी किया; उसने उसे सुनसान रहने के लिये नहीं परन्तु बसने के लिये उसे रचा है। वही यह कहता है, “मैं यहोवा हूँ, मेरे सिवाय दूसरा और कोई नहीं है।

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क्योंकि छः दिन में यहोवा ने आकाश और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उनमें है, सबको बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।

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