Old Testament
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यहोशू 4:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जिससे यह तुम लोगों के बीच चिन्ह ठहरे, और आगे को जब तुम्हारे बेटे यह पूछें, 'इन पत्थरों का क्या मतलब है?'
यहोशू 4:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 4:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 13:14 (HINIRV) »
और आगे के दिनों में जब तुम्हारे पुत्र तुम से पूछें, 'यह क्या है?' तो उनसे कहना, 'यहोवा हम लोगों को दासत्व के घर से, अर्थात् मिस्र देश से अपने हाथों के बल से निकाल लाया है।

यहोशू 4:21 (HINIRV) »
तब उसने इस्राएलियों से कहा, “आगे को जब तुम्हारे बाल-बच्चे अपने-अपने पिता से यह पूछें, 'इन पत्थरों का क्या मतलब है?'

यहोशू 22:27 (HINIRV) »
परन्तु इसलिए कि हमारे और तुम्हारे, और हमारे बाद हमारे और तुम्हारे वंश के बीच में साक्षी का काम दे; इसलिए कि हम होमबलि, मेलबलि, और बलिदान चढ़ाकर यहोवा के सम्मुख उसकी उपासना करें; और भविष्य में तुम्हारी सन्तान हमारी सन्तान से यह न कहने पाए, कि यहोवा में तुम्हारा कोई भाग नहीं।'
यहोशू 4:6 का स्पष्ट मतलब
यह वचन कहता है कि पत्थरों के चिन्ह इस प्रकार रखना है कि जब तुम्हारे बच्चों से पूछा जाए, “इन पत्थरों का क्या मतलब है?” तो तुम उन्हें यह स्मरण दिला सको कि यहोवा ने युग-युग से चमत्कार दिखाकर इस्राइल को मिस्र की धारा से सुरक्षित निकाला है। यह एक यादगार संकेत है जो धार्मिक इतिहास को पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचाता है।
पृष्टभूमि और संदर्भ
यहोशू के पुनः विराजमान होने के बाद यहूदा-याकूब की दुष्कर्मों के बाद यहोशू ने यरदन के पार पत्थरों के स्मारक बनाए ताकि यहूदियों के बीच परमेश्वर की करुणा और सत्ता का स्मरण हमेशा बना रहे। यह घटना यह दर्शाती है कि परमेश्वर के चमत्कारों को स्मरण रखना और अगली पीढ़ी तक उन्हें पहुँचाना विश्वास की एक स्थिर परंपरा है।
interpretive observations
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अन्य प्रासंगिक पाठ के संक्षेप सुझाव
नीचे दिये गए संदर्भ यहोशू 3–4, व्यवस्थावली 12 में भी परमेश्वर के चमत्कारों और स्मारकों के महत्व को दर्शाते हैं। इन प्रकरणों में हरित-युग के चमत्कार और स्मृतियाँ यहूदी समाज में विश्वास-संस्कार के रूप में काम करती रहीं।
प्रयोजन-नोट
इस वाक्य का उद्देश्य यह है कि इतिहास–कथा और चमत्कार आज भी विश्वास के पथ को निर्देशित करें। हर पीढ़ी को यह स्मरण कराना चाहिए कि किस प्रकार परमेश्वर ने यहूदियों की ओर से निर्दयी परिस्थितियों में भी उद्धार किया।
क्या वहीं से जुड़ते हैं अन्य पाठ
1) संबंध यह कि चमत्कार-चिन्ह पीढ़ी-दर-पीढ़ी शिक्षा के साधन बनते हैं; 2) बच्चों के सवाल से निष्कर्ष निकलता है कि faith grows through inquiry; 3) स्मारक से समुदाय की एकता बनती है और स्मृति में स्थायित्व आता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
परिवार और समुदाय मिलकर धार्मिक स्मारकों को बनाए रखें- छोटी-छोटी घटनाओं को भी यादगार बनाकर बच्चों को विश्वास के मार्ग पर ले जाएँ। परमेश्वर के पूर्व बहते हुए उद्धार के कार्यों को सूचीबद्ध करना और उन्हें जीवन के दिन-प्रतिदिन के अनुभवों से जोड़ना, आस्था को दृढ़ बनाता है।
संदर्भ-नोट: यह आधुनिक हिन्दी पाठ के लिए संकलित टिप्पणी का उद्देश्य है; परंपरागत चेहरों के विचारों का समाहित सार इस्लंभित है ताकि पाठक वास्तविक पाठ-समझ प्राप्त करे।
अनुरोध-संदर्भ
1) यह वाक्य यह दर्शाता है कि स्मारक-चिन्ह याद दिलाते हैं कि परमेश्वर ने किस प्रकार उद्धार किया; 2) यह पढ़ाई-प्रथाओं से जुड़कर पीढ़ियों तक पहुँचे—क्योंकि प्रश्न ही शिक्षा का आरम्भ है; 3) प्रोत्साहन: छोटे-छोटे स्मारक बड़े विश्वास का आधार बनते हैं।
गम्भीर उद्धरण (संलग्न): Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनशील टिप्पणियों से संकेतित संकल्पनाएं सीधे उद्धृत नहीं की गईं, किन्तु उनके प्रवचन-तर्क समेकित रूप से इस विवेचन में निहित हैं।