Old Testament
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यहोशू 4:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब तुम यह कहकर उनको बताना, 'इस्राएली यरदन के पार स्थल ही स्थल चले आए थे'।
यहोशू 4:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 4:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 3:17 (HINIRV) »
और याजक यहोवा की वाचा का सन्दूक उठाए हुए यरदन के बीचों बीच पहुँचकर स्थल पर स्थिर खड़े रहे, और सब इस्राएली स्थल ही स्थल पार उतरते रहे, अन्त में उस सारी जाति के लोग यरदन पार हो गए।।

निर्गमन 15:19 (HINIRV) »
यह गीत गाने का कारण यह है, कि फ़िरौन के घोड़े रथों और सवारों समेत समुद्र के बीच में चले गए, और यहोवा उनके ऊपर समुद्र का जल लौटा ले आया; परन्तु इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर होकर चले गए।

निर्गमन 14:29 (HINIRV) »
परन्तु इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर होकर चले गए, और जल उनकी दाहिनी और बाईं दोनों ओर दीवार का काम देता था।
यहोशू 4:22 पर आधारित निहितार्थ: यहोशू के चिह्नित इतिहास में राष्ट्र-याद और चेतना
मुख्य बिंदु: ईश्वर के चमत्कार के स्मरण से यहूदियों में अपनी पहचान, अनुशासन और विश्वास की पुनर्स्थापना होती है। इस verse में यरदन पार कर आने के बताए गए संकेत से याकूब की संतानें अपनी पूर्व अवस्था के डर से मुक्त होकर, नए संकल्प के साथ स्वयं को परमेश्वर के कार्य के सहभागी पाती हैं। यहूदी स्मारक बनाकर भविष्य के लिए एक प्रेरणा है कि परमेश्वर ने कैसे पथ दिखाने और विश्वास को टिकाए रखने के लिए चिह्न रचे।
साहित्यिक संदर्भ (लेखन-दृष्टिकोण)
यहोशू ने यरदन नदी के पार चढ़ाई के समय एक प्रमुख स्मारक-कार्य किया—12 पत्थरों से निर्मित स्मारक—जो इस्राएलियों के लिए स्मारक बन गया कि किस प्रकार ईश्वर ने निर्गमन के बाद भी उनकी यात्रा को मार्गदर्शित किया। यह verse बताता है कि सभी को अपने इतिहास के यादगार संकेतों के माध्यम से विश्वास की पुनर्स्थापना करनी चाहिए।
धार्मिक महत्व
इस स्मरणीय उद्घोषणा से यहूदियों में यह विश्वास गहराता है कि परमेश्वर का जीवन-यात्रा में साथ है। यह दिखाता है कि चमत्कार केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी जीवन के मार्गदर्शन का साधन है—यही कारण है कि मसीही पाठकों के लिए भी स्मारक और शिक्षा का संयोजन महत्वपूर्ण है।
बाइबल-क्रॉस-रेफरेंसेस
पाथ-चयनित विचार और प्रश्न
सूक्ष्म-निष्कर्ष
यह verses यह दर्शाता है कि इतिहास-याद और धार्मिक स्मारक न केवल स्मृतियों का एक अंश हैं, बल्कि भविष्य के लिए साहस और निर्देश का स्रोत भी हैं। परमेश्वर ने इतिहास के भीतर चमत्कारों के निशान छोड़कर, उनके आश्रितों को विश्वास में मजबूती दी। इसलिए हर पीढ़ी को उनके इतिहास से सीख लेकर अपनी आज की यात्राओं में विश्वास के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।
एंग्लिक टिप्पणीकारों के संकेत (उद्धरण उपलब्ध हो तो)
यदि किसी पाठक को Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संदेह-उद्धरण उपलब्ध हों, तो वे सतही रूप से भी यह बताने के लिए प्रयोग किए जाते हैं कि स्मारक-चिह्न कैसे चरित्र-निर्माण पर प्रभाव डालते हैं।
नोट: इस टिप्पणी में जो विचार प्रस्तुत हैं, वे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सिद्धांतों के साथ सहजीवन में सुव्यवस्थित रूप से मिलकर नयापन एवं स्पष्टता के साथ प्रस्तुत हैं।