Old Testament
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मत्ती 10:1 मत्ती 10:2 मत्ती 10:3 मत्ती 10:4 मत्ती 10:5 मत्ती 10:6 मत्ती 10:7 मत्ती 10:8 मत्ती 10:9 मत्ती 10:10 मत्ती 10:11 मत्ती 10:12 मत्ती 10:13 मत्ती 10:14 मत्ती 10:15 मत्ती 10:16 मत्ती 10:17 मत्ती 10:18 मत्ती 10:19 मत्ती 10:20 मत्ती 10:21 मत्ती 10:22 मत्ती 10:23 मत्ती 10:24 मत्ती 10:25 मत्ती 10:26 मत्ती 10:27 मत्ती 10:28 मत्ती 10:29 मत्ती 10:30 मत्ती 10:31 मत्ती 10:32 मत्ती 10:33 मत्ती 10:34 मत्ती 10:35 मत्ती 10:36 मत्ती 10:37 मत्ती 10:38 मत्ती 10:39 मत्ती 10:40 मत्ती 10:41 मत्ती 10:42



मत्थी 10:21 का संदेश
इस पद का सीधे-सीधे अर्थ है: परिवार के अंदर ही पंक्ति-पर-पंक्ति विषम तनाव आ सकता है—भाई अपने भाई के विरुद्ध, पिता अपने पुत्र के विरुद्ध खड़े होकर एक-दूसरे के लिए बदला या नुकसान की दिशा में प्रेरित हो सकते हैं। यीशु यह चेतावनी दे रहे हैं कि नेक ईमानदार जीवन के रास्ते में घुटन पैदा करने वाले पारिवारिक रिश्ते भी अस्थिर हो सकते हैं, क्योंकि अद्भुत सच यह है कि सच्चे अनुयायी बनने पर अक्सर सामाजिक रिश्तों में फूट पड़ती है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह शिक्षा मसीह के प्रचार के पहले निर्देशों का हिस्सा है, जब उन्होंने चेलों से कहा कि वे राज्य की सेवा के लिए निकलें, और उनके अपनत्व-नाते भी परीक्षा में आ सकते हैं। मैत्थ्यू के Gospel में इसे "परेशानियाँ" कहा गया है—भय, प्रतिरोध और उलझी हुई पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच, विश्वास के रास्ते पर स्थिर रहना। यह भी संकेत है कि ईश्वर का राज्य एक अलग निजाम है, जिसमें मानवीय सम्बन्धों की प्राथमिकताओं को सही क्रम में रखना पड़ता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीमेन सूची
संबद्ध कथा-उद्धरण
याद रखने योग्य दुष्परिणाम: परिवार के विरोध में खड़े होने से पहले विश्वास की सच्चाई और प्रेम को खतरे में न डालें। हानिकारक विवाद से बचना चाहिए, पर मसीह के नाम के लिए कभी-कभी भारी दबाव भी आ सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षिप्त व्याख्या)
1) मत्ती 5:10-12 में संतुष्ट न रहने पर भी शांति बनाये रखने का आह्वान—यानी राज्य के लिए कठिन निर्णय लेते समय आचरण शुद्ध बने रहे।
2) मत्ती 24:9-10: अवगुणजनित कठिनाइयों के समय भी ईमानदार बने रहने का निर्देश; विपत्ति के बीच आशा की पुष्टि।
3) माला 6:24: दो मालिकों के प्रेम में चयन—परमेश्वर के राज्य के लिए अन्य चीजों को प्रतिस्थापन नहीं बनने देना।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हममें से हर कोई यह जान ले कि ईश्वर के राज्य की वरिष्ठता हमारी मानसिक-आचरण की दिशा तय करती है। पारिवारिक रिश्ते कितने भी मजबूत हों, यदि ईश्वर के साथ मेरा संबद्धता संघर्ष में पड़ जाए तो मैं उनके आदेश के अनुसार चलूँ। प्रेम, दृढ़ता और शांति के साथ आत्म-उपासना और समाजिक साक्ष्य दोनों बनाए रखें।
हिंदी टिप्पणी की एक नज़दीकी रिपोर्ट (संभावित उद्धरण)
यह कविता पवित्र लेखन के भीतर ऐसी चेतावनी देती है कि विश्वास के लिए जब परिवार के साथ टकराव आता है, तब भी धर्मयात्रा को निभाना चाहिए। इस प्रकार के पाठ के पाठ में कई पुरानी टीका-लेखनात्मक व्याख्याओं का संकेत है, जो पिता-पुत्र और भाई-भाई के रिश्तों के भीतर ईश्वर की योजना को केन्द्र में रखती हैं।