Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 10:1 मत्ती 10:2 मत्ती 10:3 मत्ती 10:4 मत्ती 10:5 मत्ती 10:6 मत्ती 10:7 मत्ती 10:8 मत्ती 10:9 मत्ती 10:10 मत्ती 10:11 मत्ती 10:12 मत्ती 10:13 मत्ती 10:14 मत्ती 10:15 मत्ती 10:16 मत्ती 10:17 मत्ती 10:18 मत्ती 10:19 मत्ती 10:20 मत्ती 10:21 मत्ती 10:22 मत्ती 10:23 मत्ती 10:24 मत्ती 10:25 मत्ती 10:26 मत्ती 10:27 मत्ती 10:28 मत्ती 10:29 मत्ती 10:30 मत्ती 10:31 मत्ती 10:32 मत्ती 10:33 मत्ती 10:34 मत्ती 10:35 मत्ती 10:36 मत्ती 10:37 मत्ती 10:38 मत्ती 10:39 मत्ती 10:40 मत्ती 10:41 मत्ती 10:42



मत्ती 10:36 का अर्थ
इस पद का मूल संदेश है: कई बार परमेश्वर के अपने लोग भी परिवार के अंदर अकेले पड़ जाते हैं; घर के सदस्य भी प्रभु के कारण उनके विरुद्ध हो सकते हैं। यहाँ यीशु अपने शिष्यों को फेर-बदल के रास्ते में आने वाले कठिन परिणामों से सतर्क कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय यीशु का संदेश भेजे जाने, शिष्यों को प्रेरित करने और धार्मिक नेतृत्व के विरोध के बारे में है। 10वाँ प्रकरण शिष्यता के वास्तविक मूल्य पर जोर देता है—परिवार सहित सामाजिक संबंध भी प्रभु के कारण चुनौतीपूर्ण बन सकते हैं। यह पंक्ति विशेषकर यह दर्शाती है कि सच्ची Loyalty किसे कहें, और किस प्रकार विश्वासी को अपने विश्वास के कारण असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
अनुभाग-सम्बद्ध पंक्तियाँ
कई बार क्रिस्तीय जीवन में परिवार से विरोध मिलता है; अन्य स्थानों पर भी कट्टरता के कारण शिष्यों पर दबाव बढ़ता है। यह दृश्य संकेत देता है कि उद्धारकर्ता के साथ विशुद्ध निष्ठा ही सच्चे परिवार का आधार बनाती है।
अनुदेशात्मक संदर्भ (Cross-references)
यूहन्ना 15:18-19 के विचार: दुनिया तुम से नफ़रत करेगी, क्योंकि वे मुझ से प्रेम नहीं करते। यह संकेत देता है कि शिष्यत्व में विरोध प्राकृतिक हो सकता है।
लूका 12:53 के साथ संयुक्त सोच: पिता-पुत्री के बीच टकराहट भी तब हो सकती है जब प्रभु का प्रकाश सामने आता है।
याकूब 4:4: मित्रता दुनिया के साथ हो तो मित्रता परमेश्वर के साथ नहीं होती। यह द्योत देता है कि विश्वास के कारण रिश्तों का परखना अनिवार्य हो सकता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
अपने विश्वास के संघर्ष में आश्रय न छोड़ें, परन्तु प्रेम और नम्रता के साथ सत्य का पालन करें। परिवार के भीतर भी ईमानदारी, नैतिकता और ग्रहणशीलता बनाए रखें, ताकि प्रभु के साथ निष्ठा भी बना रहे।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पवित्र-टीका से)
यहाँ किसी विशिष्ट पूर्व-लेखक से सीधे उद्धरण आवश्यक नहीं है; परन्तु Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के समीकृत विचारों को समन्वित-संवेदी रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अनुदर्श: लेखक-स्थल के अनुसार, शिष्यत्व में पारिवारिक रिश्तों की जटिलता का कारण यह है कि प्रभु के राज्य की वास्तविकता अतःकल्याणकारी है, पर सफलता में कठिनाइयाँ आ सकती हैं।