Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 10:1 मत्ती 10:2 मत्ती 10:3 मत्ती 10:4 मत्ती 10:5 मत्ती 10:6 मत्ती 10:7 मत्ती 10:8 मत्ती 10:9 मत्ती 10:10 मत्ती 10:11 मत्ती 10:12 मत्ती 10:13 मत्ती 10:14 मत्ती 10:15 मत्ती 10:16 मत्ती 10:17 मत्ती 10:18 मत्ती 10:19 मत्ती 10:20 मत्ती 10:21 मत्ती 10:22 मत्ती 10:23 मत्ती 10:24 मत्ती 10:25 मत्ती 10:26 मत्ती 10:27 मत्ती 10:28 मत्ती 10:29 मत्ती 10:30 मत्ती 10:31 मत्ती 10:32 मत्ती 10:33 मत्ती 10:34 मत्ती 10:35 मत्ती 10:36 मत्ती 10:37 मत्ती 10:38 मत्ती 10:39 मत्ती 10:40 मत्ती 10:41 मत्ती 10:42



प्रमुख interpretive बिंदु
मत्ती 10:6 में यीशु के शिष्य भेजे जाने का निर्देश है: "परन्तु इस्राएल के घराने ही की खोई हुई भेड़ों के पास जाना।" यह संकेत करता है कि मसीही मिशन शुरुआती तौर पर यहूदियों तक सीमित था—जो परमेश्वर के कष्टित और अपेक्षित लोगों के बीच है। यहाँ महत्वपूर्ण विचार यह है कि गवाही का प्राथमिक दायरा वह है जिसे ईश्वर ने प्रिय माना है, ताकि लोक-लाभ और उद्धार की योजना इनमें शुरू हो सके और तब व्यापक लक्ष्यों की ओर बढ़े।
साहित्यिक सन्दर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
पद 6 के संदर्भ में आर्थिक-धार्मिक पृष्ठभूमि यहूदियों की दुर्दशा और परमेश्वर की चिरस्थायी कसम के अनुरूप है। मसीह के प्रेरितों को पहले अपने ही लोग, इस्राएल के घराने, संदेशन-उद्धार के लिए कहा गया। यह संदेश उनकी पहले की संस्कारिक पहचान और धर्मादेश से जुड़ा है। फिर व्यापक पुकार की दिशा-स्थिति में परिवर्तन आगे के अध्यायों में आता है जब प्रचार अनुसंधान समग्र विश्व के लिए बन जाता है।
थियोलॉजिकल महत्व
यहूदी-केन्द्रित आरम्भ में परमेश्वर का अपने लोगों के साथ विशेष वादा-विश्वास (दायित्व) स्पष्ट होता है। परंतु पवित्र आत्मा के काम से चर्च की फैलाव, और जीवन के उद्धार के अवसर सभी जातियों के लिए खुलते जाते हैं। यहाँ सन्देश यह है कि प्रभु की सेवा शुरू में एक चयनित समूह के लिए है, ताकि उनके अनुभव और उपलब्धियाँ यहाँ से प्रेरित होकर विश्व-प्रसार को सक्षम करें।
अन्यावली संबंध (Scriptural cross-references)
इन संदर्भों से साफ होता है कि परमेश्वर की राह समय के साथ व्यापक होती है, परन्तु शुरुआत एक विशेष समुदाय से होती है ताकि सत्यगौरव और विश्वास की धरोहर मजबूत रहे।
चिंतन के प्रश्न (Questions for reflection)
विवेचनात्मक सार (Concise conclusion)
इस्राएल के खोए हुओं के प्रति आरम्भिक बुलावा एक क्रमबद्ध योजना का भाग था: पहले अपने घराने तक पहुँचना, ताकि विश्वास की रोशनी धीरे-धीरे अन्य जातियों तक फैले। यह कथा यह भी सिखाती है कि परमेश्वर के उद्धार के मार्ग समय-क्रम और समुदायिक पहचान से परे व्यापक है—परन्तु इतिहास वही शुरू होता है जब साक्षी अपने संस्थागत पन्नों को छोड़कर प्रभु के लक्ष्य के अनुसार समर्पित हो जाते हैं।
पूर्व-लेखक उद्धरण (public-domain तुलना-चिन्ह) और उद्धरण संकेत
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट वाक्यों के छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो वे इस दैनंदिन शिक्षण-पथ में परमेश्वर की समयबद्ध योजना, चयन और विश्व-उद्धार की दिशा पर टिप्पणी देते हैं। उद्धरण के लिए ऊपर दी गई पाठ में संहिताबद्ध संहिता के अनुसार विशेष टुकड़ों को चयन किया जा सकता है लेकिन यहाँ संक्षेप में उल्लेख किया गया है कि यहूदियों के प्रति आरम्भिक फोकस विषयगत रूप से समर्थित है।