मत्ती 10:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु इस्राएल के घराने ही की खोई हुई भेड़ों के पास जाना।

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मत्ती 10:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

प्रमुख interpretive बिंदु

मत्ती 10:6 में यीशु के शिष्य भेजे जाने का निर्देश है: "परन्तु इस्राएल के घराने ही की खोई हुई भेड़ों के पास जाना।" यह संकेत करता है कि मसीही मिशन शुरुआती तौर पर यहूदियों तक सीमित था—जो परमेश्वर के कष्टित और अपेक्षित लोगों के बीच है। यहाँ महत्वपूर्ण विचार यह है कि गवाही का प्राथमिक दायरा वह है जिसे ईश्वर ने प्रिय माना है, ताकि लोक-लाभ और उद्धार की योजना इनमें शुरू हो सके और तब व्यापक लक्ष्यों की ओर बढ़े।

साहित्यिक सन्दर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)

पद 6 के संदर्भ में आर्थिक-धार्मिक पृष्ठभूमि यहूदियों की दुर्दशा और परमेश्वर की चिरस्थायी कसम के अनुरूप है। मसीह के प्रेरितों को पहले अपने ही लोग, इस्राएल के घराने, संदेशन-उद्धार के लिए कहा गया। यह संदेश उनकी पहले की संस्कारिक पहचान और धर्मादेश से जुड़ा है। फिर व्यापक पुकार की दिशा-स्थिति में परिवर्तन आगे के अध्यायों में आता है जब प्रचार अनुसंधान समग्र विश्व के लिए बन जाता है।

थियोलॉजिकल महत्व

यहूदी-केन्द्रित आरम्भ में परमेश्वर का अपने लोगों के साथ विशेष वादा-विश्वास (दायित्व) स्पष्ट होता है। परंतु पवित्र आत्मा के काम से चर्च की फैलाव, और जीवन के उद्धार के अवसर सभी जातियों के लिए खुलते जाते हैं। यहाँ सन्देश यह है कि प्रभु की सेवा शुरू में एक चयनित समूह के लिए है, ताकि उनके अनुभव और उपलब्धियाँ यहाँ से प्रेरित होकर विश्व-प्रसार को सक्षम करें।

अन्यावली संबंध (Scriptural cross-references)

  • यूहन्ना 4:22–23 — प्रभु का उद्धार-कार्य पहले सेकणों तक सीमित नहीं रहा; यह सब पर है; फिर भी कहानी के शुरूआती चरणों में यहूदी-केन्द्रित प्रेरणा स्पष्ट है।
  • रोमियों 1:16 —Gregor: न कि यहूदियों के लिए मुश्किल, किन्तु पवित्र बन्धन में विश्व के लिए उद्धार का संदेश शुरू होता है।
  • मत 15:24 — यीशु का अपने घराने के लिए संदेश देना; बाद में गैर-यूहिदों के लिए भी आशीर्वाद खुलता है।

इन संदर्भों से साफ होता है कि परमेश्वर की राह समय के साथ व्यापक होती है, परन्तु शुरुआत एक विशेष समुदाय से होती है ताकि सत्यगौरव और विश्वास की धरोहर मजबूत रहे।

चिंतन के प्रश्न (Questions for reflection)

  • मैं किस क्षेत्र, समुदाय या व्यक्ति के लिए पहले प्रयत्न कर रहा/रही हूँ ताकि उद्धार का संदेश प्रकट हो? क्या मैं अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव कर सकता/सकती हूँ?
  • क्या मेरी श्रद्धा में परमेश्वर का चयन और समुदाय-आधार भेदभाव नहीं बन रहा? उसे कैसे सुधारा जा सकता है?
  • कैसे मैं विश्वास के माध्यम से दूसरों तक पहुँच बना सकता/सकती हूँ, ताकि उद्धार का प्रभाव सार्वभौमिक हो?

विवेचनात्मक सार (Concise conclusion)

इस्राएल के खोए हुओं के प्रति आरम्भिक बुलावा एक क्रमबद्ध योजना का भाग था: पहले अपने घराने तक पहुँचना, ताकि विश्वास की रोशनी धीरे-धीरे अन्य जातियों तक फैले। यह कथा यह भी सिखाती है कि परमेश्वर के उद्धार के मार्ग समय-क्रम और समुदायिक पहचान से परे व्यापक है—परन्तु इतिहास वही शुरू होता है जब साक्षी अपने संस्थागत पन्नों को छोड़कर प्रभु के लक्ष्य के अनुसार समर्पित हो जाते हैं।

पूर्व-लेखक उद्धरण (public-domain तुलना-चिन्ह) और उद्धरण संकेत

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट वाक्यों के छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो वे इस दैनंदिन शिक्षण-पथ में परमेश्वर की समयबद्ध योजना, चयन और विश्व-उद्धार की दिशा पर टिप्पणी देते हैं। उद्धरण के लिए ऊपर दी गई पाठ में संहिताबद्ध संहिता के अनुसार विशेष टुकड़ों को चयन किया जा सकता है लेकिन यहाँ संक्षेप में उल्लेख किया गया है कि यहूदियों के प्रति आरम्भिक फोकस विषयगत रूप से समर्थित है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 10:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“मेरी प्रजा खोई हुई भेडें हैं; उनके चरवाहों ने उनको भटका दिया और पहाड़ों पर भटकाया है; वे पहाड़-पहाड़ और पहाड़ी-पहाड़ी घूमते-घूमते अपने बैठने के स्थान को भूल गई हैं। (मत्ती 10:6)

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क्योंकि तुम पहले भटकी हुई भेड़ों के समान थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और चरवाहे के पास फिर लौट आ गए हो। (यशा. 53:6, यहे. 34:5-6)

प्रेरितों के काम 13:46 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 13:46 (HINIRV) »
तब पौलुस और बरनबास ने निडर होकर कहा, “अवश्य था, कि परमेश्‍वर का वचन पहले तुम्हें सुनाया जाता; परन्तु जब कि तुम उसे दूर करते हो, और अपने को अनन्त जीवन के योग्य नहीं ठहराते, तो अब, हम अन्यजातियों की ओर फिरते हैं।

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