भजन संहिता 78:59 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर सुनकर रोष से भर गया, और उसने इस्राएल को बिल्कुल तज दिया।

भजन संहिता 78:59 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 78:59 — संदर्भ और अर्थ

इस पंक्ति में कवि परमेश्वर की आपत्ति को दर्शाते हैं क्योंकि इस्राएल ने देव की मूर्तियों के प्रति मूढ़ता दिखाई और उनकी अनदेखी करते समय परमेश्वर ने उनसे दूर हो जाना चुना। इस्राएलिक इतिहास में बार-बार याद दिलाया गया है कि परमेश्वर का कर्तव्य-प्रणाली और उनकी वफ़ादारी उल्टा पड़ने पर वह क्रोध करते हैं, ताकि लोगों के समक्ष उनकी महिमा और पथ स्पष्ट रहें। यहां “रोष से भर गया” का अर्थ है परमेश्वर की पवित्र निंदा के साथ जुड़ा एक संचेतित निर्णय—ताकि उनके選ित लोग सचेत हों और लौटें।

केंद्रीय अर्थ

यह आयत परमेश्वर की पवित्र क्रोध की समयबद्ध अभिव्यक्ति को दिखाती है, जब इस्राएल ने ईश्वर की शिक्षाओं और चमत्कारों को नज़रअंदाज़ किया। क्रोध का उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि उद्धार की राह फिर से खोलना है—यानी चेतावनी और विवेक लौटाना। यह याद दिलाती है कि परमेश्वर अपने विधान और वादा के प्रति निष्ठा रखते हैं, और मानव पाप के कारण यह दूरी आती है ताकि वे सचेत हों और परमेश्वर की ओर लौटें।

मुख्य विषय

  • पाप की परिणति: इस्राएल की अवहेलना से परमेश्वर में रोष उत्पन्न होना और दूरी बनना।
  • चेतना और वापसी: क्रोध का उद्देश्य लोगों को सत्य की दिशा में लाना है—पश्चात्ताप और विश्वास फिर से स्थापित करना।
  • विधिपरायणता बनाम दया: परमेश्वर अपने नियमों के अनुसार आचरण करते हुए भी उद्धार की राह खोलते हैं जब लोग तहदिल से पलटते हैं।

मुख्य उपदेश और टुकड़े-टुकड़े विचार

इस भजन में प्रभु के क्रोध की तीव्रता दिखती है, पर यह भी संकेत है कि ईश्वर का हृदय नम्रता और दया से भरा है जब लोग पलटते हैं। भजनकार अपने इतिहास के उदाहरणों के बीच यह संदेश देता है कि परमेश्वर चमत्कारों के बावजूद कर्मों के फल से मुक्त नहीं करते, बल्कि सच्चे परिवर्तन की मांग करते हैं।

संबद्ध बाइबिल पाठ

पिछली घटनाओं के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि इस्राएल के आचरण पर यद्यपि परमेश्वर ने क्रोध किया, परन्तु भविष्य में वही परमेश्वर अपने उद्धार के मार्ग खोलते हैं। अन्य संदर्भों में क्रोध के साथ दया का संयोजन और पलटाव की प्रेरणा भी मिलती है।

व्यावहारिक चिंतन

व्यावहारिक रूप से यह शिक्षा देता है कि हमारे कार्य-व्यवहार परमेश्वर के प्रति विश्वास और पवित्रता की कसौटी हैं। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, हमारी मुखरित प्रवृत्ति और निष्ठा, परमेश्वर के प्रति बने रहने की कसौटी हैं। अगर हम गलत राह जाते हैं, तो नम्रता से पछतावे का मार्ग चुनना चाहिए, ताकि परमेश्वर की दया फिर हमारे बीच लौट सके।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त व्याख्या)

1) भजन 95:8-11 — चेतावनी कि किस प्रकार विप्रलापी प्रेरणा से लोग लौटते हैं या दूर होते हैं; दिल की स्थिरता परमेश्वर के साथ बनी रहे।

2) यिर्मयाह 3:12-14 — पाप के बाद भी परमेश्वर की दया की तरफ पलटने की invitation; वापसी की आशा।

3) रोम 11:22 — प्रभु की करुणा और चिंता के बारे में उचित चेतावनी कि गिरहबन्दी और दया के बीच संतुलन बना रहे।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह verse हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर की चिंता और पवित्रता कभी-कभी कठोर प्रतीत होती है, पर इसका लक्ष्य है उद्धार और सच्चे पथ की पुनर्स्थापना। हमारा उत्तर है पलटाव, विश्वास और ईश्वर के विधान के साथ दृढ़ रहने की इच्छा।

उद्धृत उद्धरण (यदि उपयोग): “परमेश्वर सुनकर रोष से भर गया” — यह स्थिति स्पष्ट करती है कि क्रोध भी एक पवित्र प्रतिक्रिया है जिसे मानवीय दोष के प्रति न्याय के रूप में समझना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 78:59 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का, और उसको अपने निज भाग से घृणा आई;

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फिर यहोवा ने कहा, “सदोम और गमोरा के विरुद्ध चिल्लाहट* बढ़ गई है, और उनका पाप बहुत भारी हो गया है;

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लैव्यव्यवस्था 26:44 (HINIRV) »
इतने पर भी जब वे अपने शत्रुओं के देश में होंगे, तब मैं उनको इस प्रकार नहीं छोड़ूँगा, और न उनसे ऐसी घृणा करूँगा कि उनका सर्वनाश कर डालूँ और अपनी उस वाचा को तोड़ दूँ जो मैंने उनसे बाँधी है; क्योंकि मैं उनका परमेश्‍वर यहोवा हूँ;

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