भजन संहिता 78:68 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु यहूदा ही के गोत्र को, और अपने प्रिय सिय्योन पर्वत को चुन लिया।

भजन संहिता 78:68 पद-दर-पद बाइबल टीका

reader-friendly overview

भजन संहिता 78 में परमेश्वर की विशाल कृपा और इस्राएल के प्रति उसकी षण्णतापूर्ण एवं निर्देशात्मक इतिहासबोध को दोहराते हुए यह भजन इस बात पर जोर देता है कि परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए स्थिर मार्ग बनाए, उनकी विगत असफलताओं के बावजूद भी विभव को बनाए रखा और आखिरकार यहूदा के गोत्र व सिय्योन पर्वत को विशेष रूप से चुना। यहाँ उल्लेखित पंक्ति—“परन्तु यहूदा ही के गोत्र को, और अपनेप्रिय सिय्योन पर्वत को चुन लिया”—यह बताती है कि परमेश्वर की चॉइस न्याय और उपस्थिति के लिए विशेष थी, न कि विविध भाइयों की कुल संख्या के आधार पर। यह पाठ हमें यह समझाता है कि परमेश्वर की योजनाओं में स्थान और मीमांसा उसकी इच्छा और दया के अनुसार है, न कि मानवीय मानक के अनुरूप।

verses in context

यह वाक्य भजन 78 के बहु-आयामी क्रम में आता है, जहाँ क्रमशः ईश्वर के पिछले कार्य और चमत्कारों का स्मरण कराई जाती है—जैसे प्राचीन दिनों में उनका संरक्षण, आस्था की कमी और फिर भी उनकी कृपा। यह विशेष पंक्ति यह संकेत देती है कि परमेश्वर ने यथार्थ रूप में किन लोगों को अपने कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका के लिए चुना और कैसे योर लोग अपनी विरासत के भीतर आध्यात्मिक राजधानी—यानी सिय्योन—के प्रति उसकी पवित्र इच्छा के प्रति उत्तरदायी हैं।

main spiritual lesson

इसVerse का मुख्य संदेश है—परमेश्वर की चयन प्रक्रिया न तो मानवीय जनसँख्या के प्रभाव से चुकती है और न ही किसी सामाजिक-जातीय भावना से प्रभावित होती है। वह ऐसे गोत्रों को चुनता है जिन्हें वह अपने दिव्य उद्देश्य—विधिवत निदर्शन, संरक्षण और संस्थापना—की पूर्ति के लिए सक्षम पाता है। सिय्योन, जिसका चित्रण उसकी उपस्थिति और पवित्र शासन के केंद्र के रूप में है, वहाँ परमेश्वर ने अपनी निष्ठा और आशीषों कोरेक किया है। यह सीख देता है कि ईश्वर की योजना में भरोसा और प्रेरणा तब तक है जब तक हम उसकी पवित्र योजनाओं के अनुरूप अपने जीवन को समर्पित करते हैं।

cross-references with brief explanations

  • उत्पत्ति 12:3 के संदर्भ में ‘तुम से सब जातियाँ आशीष पाएंगी’—परमेश्वर की चयनित योजना का व्यापक रूप; यह दिखाता है कि चयन अक्सर चमत्कारिक, आशीषमय और समुदाय की व्यापक भूमिका से जुड़ा है।
  • यशाय 41:8-9—याकूब की संतति के प्रति विशेष बुलाहट और उन्हें चुनना; यह पंक्ति यह संकेत करती है कि परमेश्वर अपनी चुनी हुई जनता पर निष्ठा रखता है और उनका मार्गदर्शन करता है।
  • यहोशु 24:15—अपना निर्णय अपने घर में यह कहना कि किस पर आप सेवा करेंगे; यह हमारी वैचारिक और व्यवहारिक चूने को दर्शाता है कि किस प्रकार लोक परमेश्वर के चयन के प्रति दृढ़ रहते हैं।

नोट: ऊपर के cross-references से सामान्य विचारधारा जुड़ी है; मूल पाठ के शब्द नहीं उद्धृत किये गए हैं, बल्कि विषय-संबंध स्पष्ट किए गए हैं।

careful application

हम अपने विश्वास-परिवार में यह सीखें कि ईश्वर का चयन उसकी सागर-करुणा से निकलता है—कभी-कभी वे नहीं जो सोशल-स्थिति में सबसे ऊपर हों, बल्कि वे जो उसकी आज्ञाओं के अनुरूप हृदय से बनना चाहते हैं। यहूदियों के गोत्र के चयन का अर्थ यह भी है कि ईश्वर की उपस्थिति और पवित्रता किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहती; उसका उद्देश्य स्पष्ट और विशिष्ट था, परन्तु उस उद्देश्य के केंद्र में प्रेम और आशीषों का वितरण था। हमारे व्यक्तिगत जीवन में इसका अनुप्रयोग यह है कि मैं अपनी पवित्रता, विश्वास, और वफादारी के साथ ईश्वर के चयन के हिसाब से कदम बढ़ाऊं—चाहे परिस्थिति कैसी भी हो—ताकि मेरा जीवन उसके उद्देश्य में योगदान दे सके।

संक्षेप

यह पंक्ति यह दर्शाती है कि परमेश्वर अपने चयन के माध्यम से इतिहास की दिशा तय करता है—यहूदा के गोत्र और सिय्योन पर्वत के लिए उसकी पसंद एक विशिष्ट उद्देश्य की ओर इशारा है। हमारी जिंदगी में भी ईश्वर उसी प्रेम और विश्वास के साथ चुनौतियों को संभालते हुए मार्ग प्रकट करता है।

raíces के सार

यह पाठ एक स्थायी स्मरण कराता है कि परमेश्वर के निर्णय से प्रेरित होकर ही समुदाय और आने वाले दिनों के लिए आशीष संभव है। हमारी अलग-अलग स्थितियों में भी वही नियम लागू होता है: चयन और संरक्षण उसकी कृपा के कारण।

उद्धृत टिप्पणीकारों के ठोस विचार: यदि आवश्यक लगे, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरे में उपलब्ध संकीर्ण बिंदुओं से संक्षेप उद्धरण मिलते हैं जिन्हें नीचे समाहित किया जा सकता है—परन्तु इस प्रस्तुति में मुख्यतः स्वच्छ और मौलिक हिन्दी विश्लेषण प्रस्तुत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 78:68 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 87:2 (HINIRV) »
और यहोवा सिय्योन के फाटकों से याकूब के सारे निवासों से बढ़कर प्रीति रखता है।

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उत्पत्ति 49:8 (HINIRV) »
हे यहूदा, तेरे भाई तेरा धन्यवाद करेंगे, तेरा हाथ तेरे शत्रुओं की गर्दन पर पड़ेगा; तेरे पिता के पुत्र तुझे दण्डवत् करेंगे।

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रूत 4:17 (HINIRV) »
और उसकी पड़ोसिनों ने यह कहकर, कि “नाओमी के एक बेटा उत्‍पन्‍न हुआ है”, लड़के का नाम ओबेद* रखा। यिशै का पिता और दाऊद का दादा वही हुआ। (मत्ती 1:6)

भजन संहिता 78 (HINIRV) Verse Selection

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