Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 21:13 का पार्श्व-दृश्य
यह वाचा उन कानूनों के अंतर्गत आती है जो हिंसा और न्याय के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। यदि किसी घटना के पीछे परमेश्वर की योजना और इच्छा स्पष्ट रहती हो—यानी अपराध के पीछे योजना या स्वेच्छा से नहीं बल्कि नियति-प्रवाह और सुरक्षा की दृष्टि से संभव हो—तो प्रभु एक सुरक्षित मार्ग बनाते हैं ताकि घायल पक्ष और आरोपी दोनों के लिए न्याय हो सके।
कथन की मुख्य बात
यह वचन कहता है कि यदि कोई व्यक्ति घात में न बैठा हो और घटनाक्रम परमेश्वर की इच्छा से घटित हुआ हो, तो मैं एक स्थान ठहराऊँगा जहाँ वह भाग जाए। यह एक संरक्षण-योग्य व्यवस्था है ताकि खून-खराबा के पाप के बावजूद आरोपी को भागने का अवसर मिले, और समुदाय के लिए न्याय सुनिश्चित हो सके।
ईश्वर के बारे में स्पष्ट विचार
इस वचन से यह साक्ष्य निकलता है कि परमेश्वर कानून के भीतर भी मानव जीवन की सुरक्षा और न्याय के मार्ग बनाते हैं। वह परिस्थिति-विशिष्ट मार्ग दिखाते हैं ताकि अकस्मात् घात में पड़ने वाले के लिए भी एक संरक्षित स्थान हो और समाज में सामान्य धारणाओं के अनुसार दंड का मार्ग सुनिश्चित हो सके।
महत्वपूर्ण शब्द/छवि
संबंधित पवित्रग्रंथ
उक्त विचारों के साथ जुड़े कुछ निकट-मिलते संदर्भ निम्न हैं जिन्हें समझना उपयोगी है:
आज के लिए जीवन-प्रयोजन
आज के संदर्भ में यह नीति हमें यह सिखाती है कि संघर्ष और हिंसा की स्थिति में भी योजना और एक मार्गदर्शक दृष्टिकोण आवश्यक है। हमारी अदालतों और समुदायों के लिए जरूरी है कि न्याय प्रक्रिया में सुरक्षा, सच्चाई, और दूसरों के कल्याण का सम्मान बना रहे। यदि किसी ने गलती की हो परंतु घटनाक्रम शैतान के नहीं, बल्कि परमेश्वर के नियोजन के अनुसार घटी हो, तो भी हमारा उद्देश्य हिंसा नहीं, बल्कि न्याय-व्यवस्था और संरक्षण होना चाहिए।
टिप्पणीकारों से संक्षेप एकत्रण
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरी-समझ से मिलने वाले संकेतों के अनुसार, इस प्रकार के नियम मानव जीवन के संरक्षक और दायित्व-निर्माता हैं: समाज के भीतर सुरक्षा, निर्दोष के बचाव, और अपराधी को भी न्याय-मार्ग दिखाने की वकालत। (यदि कड़ी उद्धरण उपलब्ध हों, उन्हें संदर्भित किया गया है।)
छोटे-गहरे निष्कर्ष: यह एक संतुलित व्यवस्था है जो न केवल अपराध-निवारण पर बल देती है, बल्कि भागने के अवसर देकर न्याय के पूर्ण प्रवाह को बनाए रखती है।
Cross-References (संक्षेप विवरण)