Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 21:1 निर्गमन 21:2 निर्गमन 21:3 निर्गमन 21:4 निर्गमन 21:5 निर्गमन 21:6 निर्गमन 21:7 निर्गमन 21:8 निर्गमन 21:9 निर्गमन 21:10 निर्गमन 21:11 निर्गमन 21:12 निर्गमन 21:13 निर्गमन 21:14 निर्गमन 21:15 निर्गमन 21:16 निर्गमन 21:17 निर्गमन 21:18 निर्गमन 21:19 निर्गमन 21:20 निर्गमन 21:21 निर्गमन 21:22 निर्गमन 21:23 निर्गमन 21:24 निर्गमन 21:25 निर्गमन 21:26 निर्गमन 21:27 निर्गमन 21:28 निर्गमन 21:29 निर्गमन 21:30 निर्गमन 21:31 निर्गमन 21:32 निर्गमन 21:33 निर्गमन 21:34 निर्गमन 21:35 निर्गमन 21:36



reader-friendly overview
निर्गमन 21:20 में दास-स्वामियों से जुड़ी एक कड़ी स्थिति दिखाई देती है: यदि कोई अपने दास या दासी को ऐसा दग्ध कर दे कि वे मर जाएँ, तो उसे दण्ड मिलना चाहिए। यह वाक्य कानून के यूरोपीय-आधुनिक विचारों से भिन्न दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है—जहाँ दास-स्वामित्व के भीतर भी कानून के भीतर कुछ दायित्व और रक्षात्मक नियम स्थापित थे। यहाँ परमेश्वर के कानून से यह स्पष्ट होता है कि दास के जीवन की सुरक्षा राजा और निजी लोगों के लिए भी बराबर महत्त्व रखती है; मारे जाने पर दण्डिक अनुशासन जरूरी है ताकि अत्याचार रोका जा सके और समाज में मानवीय गरिमा बनी रहे।
verses in their chapter
इस अध्याय में दास-स्वामित्व, उनके दायित्व और मालिक की जवाबदेही का विषय बार-बार उठता है—अगर दास के साथ हिंसा होती है तो सीधा दण्ड-व्यवस्था है। यह विशेष verse एक कठोर घटना पर केंद्रित है, जिसमें दास की मृत्यु दण्ड के योग्य मानी जाती है। साथ ही पूरे कानून-संहिता में दास के प्रति दयालुता, सुरक्षा और मानव-जीवन की कीमत का संदेश भी विद्यमान है।
main spiritual lesson
यह वचन यह सीख देता है कि जीवन की सुरक्षा सबके लिए जरूरी है, भले ही व्यक्ति एक दास क्यों न हो। प्रभु ने सामाजिक व्यवस्था में न्याय और मर्यम(thoughtful restraint) के मानक निर्धारित किए—दुर्व्यवहार के लिये स्पष्ट दण्ड की व्यवस्था से समाज में भय और अन्याय के अवसर घटते हैं। दूसरों के जीवन के प्रति सम्मान और आत्म-स्वामित्व के दायित्व की प्रेरणा यहाँ है: शक्ति का असुरक्षित उपयोग नहीं, बल्कि जिम्मेदार और निष्पक्ष शासन।
cross-references and connections
- निर्गमन 21:12–14: हत्या के विरुद्ध दंड की स्पष्ट व्यवस्था—जीवन की पवित्रता का परिदृश्य। यह दृष्टि बताती है कि किसी के जीवन को कम नहीं आंका जा सकता।
- लेविटिक 24:17–22: कानून की समता और जीवन-सम्वेदना—मालिक और दास के बीच समान कानून के मानक।
- निर्गमन 22:21–24: दासों के प्रति अन्याय पर रोक और सुरक्षा-बंधनों का गठन।
इन प्रवचनों से दिखता है कि ईश्वर के कानून में दास के जीवन का संरक्षण राजनीति से परे एक नैतिक दायित्व है, जिससे समाज न्यायपरक बनता है।
careful application
- आज के संदर्भ में इस verse से हमें समाज में कमजोर और निर्बल समूहों के संरक्षण की प्रेरणा मिलती है। हिंसा के लिए कानून की निर्ख-शर्तें होना चाहिए ताकि घरेलू या संस्थागत दमन रोका जा सके।
- व्यक्तिगत व्यवहार में, शक्ति का दुरुपयोग रोकने के लिए स्पष्ट नियम और नैतिक दायित्व बनते हैं—किसी भी व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है।
- दास-सम्बन्ध के संदिग्ध विचारों को त्यागकर, हम हर व्यक्ति के लिए गरिमा और सम्मान का व्यवहार अपनाने की दिशा में बढ़ें।
concise summary
निर्गमन 21:20-21 की संरचना बताती है कि दास-स्वामियों के भीतर भी जीवन की सुरक्षा और न्याय के मानक लागू होते हैं। यह परमेश्वर की इच्छा है कि सभी के जीवन की कीमत समान हो और हिंसा के प्रति स्पष्ट दण्ड-नीति हो ताकि समाज में भय और अन्याय कम हो।
यह टिप्पणी 10–12 पंक्तियों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की प्रकाशनों से मिलने वाले मूल विचारों को आत्मीय ढंग से समेटती है, ताकि पाठक को एक समेकित, व्यावहारिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण मिले। नीचे उद्धरणात्मक पंक्तियाँ केवल उसी समय उपयोग में लाई गईं जब वे स्पष्ट और प्रासंगिक हों।
उद्धरण नोट: अगर उपलब्ध हों, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की संক্ষिप्त मौखिक पंक्तियाँ सीधे पाठ में उद्धृत की जाएँगी।