Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 21:9 — संदर्भित पृष्ठभूमि और व्याख्या
यह अवतरित वचन निर्गमन के कानून-संहिता के भीतर आता है, जहाँ मिस्र से निकल कर यहूदी समुदाय व्यवस्था-विधान में ढलता है। इस अध्याय में दास, स्वामीनाम, धन-हानी और सामाजिक दायित्वों के नियम दिए गए हैं; 21:9 विशेष रूप से विवाह-प्रसंग से जुड़ा एक बारीक मानवीय प्रथा दर्शाता है— यदि किसी दुल्हन ने पुत्र से विवाह किया हो, तो उसे भी वही सम्मान और व्यवहार मिलेगा जो पुत्री को मिलता है। यह संकेत देता है कि विवाह-संबंधित दायित्व और घरेलू संरचना एक वैध सामाजिक इकाई के रूप में मान्य मानी जाएगी।
ईश्वरीय निष्ठा और विश्वास का संकेत
यह वाक्य उन नियमों के साथ एकजुट है जो महिलाओं के सम्मान को संरक्षित करने पर केंद्रित हैं, भले ही सामाजिक संपन्नता या स्थिति में अन्तर हो। भगवान अपने लोगों के घर-परिवार में निष्पक्षता और सुरक्षा चाहते हैं; यदि एक दुल्हन विवाह के बाद भी घरेलू नियमों के भीतर रहती है, तो उसे उसी प्रकार के अधिकार और सुरक्षा की गारंटी मिलती है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर परिवार के हर सदस्य के जीवन और सुरक्षा के प्रति एक समान दृष्टिकोण रखते हैं।
शब्दार्थ और चित्रण स्पष्ट करना
अन्य पवित्र शास्त्र संदर्भ
- आस्थागत दृष्टि से विवाह और घर की सुरक्षा पर नियम देखिए: एक ही घर में रहने वाले हर सदस्य के अधिकार और कर्तव्य के समतापूर्ण अनुपालन पर बल दिया गया है।
- संभवतः सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए यह प्रथा बताती है कि विवाह से जुड़े दायित्व और अधिकार सार्वजनिक मंच पर स्पष्ट हों।
- यह प्रकरण महिलाओं के सम्मान और घरेलू संबंधों को संरक्षित रखने की परमेश्वर की योजना से जुड़ा है।
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त संवेदी अनुप्रयोग
इस अध्याय के पाठ की प्रकृति के साथ उनके विचार को समेटते हुए कहा जा सकता है कि यह कानून समाज में महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा हेतु था; विवाह के बाद भी पत्नी के प्रति सम्मान और कर्तव्य-निष्ठा बनाए रखना प्रमुख मूल्यों में है।
महत्वपूर्ण उद्धरण: “यदि उसने उसे अपने बेटे को ब्याह दिया हो, तो उससे बेटी का सा व्यवहार करे।” जैसा कि ऐतिहासिक कानूनी-नीतियों में उल्लेख आता है, प्रत्येक गृहस्थ के लिए समान गरिमा और सुरक्षा आवश्यक है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
- पारिवारिक इकाई में समान सम्मान: चाहे स्थिति कैसी भी हो, हर सदस्य के अधिकार सुरक्षित हों।
- सुरक्षा और सुरक्षा-निष्ठा: विवाह के बाद भी पति और परिवार का उत्तरदायित्व स्पष्ट और न्यायपूर्ण हो।
- सम्मानित व्यवहार: चाहे महिला हो या पुरुष, घर के भीतर सब के लिए मर्यादा और सम्मान को प्राथमिकता दें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संदर्भ)
1) कुल मिलाकर विवाह-आबद्ध समाज में महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा पर निर्देश मिलते हैं।
2) परिवार-कार्य में समानता और मर्यादा बनाए रखना सभी के लिए उद्देश्य है।
3) गृह-जीवन में प्रेम, सुरक्षा और भार-उत्पादन की जिम्मेदारी एक साथ विकसित होती है।
सूचनात्मक निष्कर्ष: निर्गमन 21:9 एक ऐसी वैचारिक धारा को दर्शाता है जिसमें विवाह और परिवार की संरचना में समानता, सम्मान और सुरक्षा के परस्पर निर्भर तत्व प्रमुख हैं। यह आज के पाठकों के लिए भी एक सक्रिय सीख है: परिवार के भीतर हर सदस्य के अधिकारों की सुरक्षा परमेश्वर की इच्छा है।