निर्गमन 21:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“जब कोई अपने दास या दासी की आँख पर ऐसा मारे कि फूट जाए, तो वह उसकी आँख के बदले उसे स्वतंत्र करके जाने दे।

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निर्गमन 21:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 21:26 का अर्थ

यह आयत कहती है कि अगर किसी दास या दासी की आंख पर चोट लगाकर उसे अंधा बना दिया जाए, तो उस दास को उसकी आँख के बदले स्वतंत्र कर दिया जाए। सरल शब्दों में—दास-स्वामित्व की स्थिति में भी अधिकार यह है कि हिंसा से कमजोर पर अत्याचार न हो और चोट लगने पर दास को स्वतंत्रता मिल जाए।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह पाठ व्यवस्थागत कानून का भाग है जो प्राचीन इस्राएल के दास-प्रथा के बारे में निर्देश देता है। जो दास वर्ष-समाप्ति के समय भी स्वतंत्र नहीं हो पाए, वह स्वाधीनता के साथ अपने मालिक के साथ रहने के विकल्प चुन सकता था; पर घोर चोट के परिणामस्वरूप प्रशासनिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए यदि दास की आंख फूट जाए, तो उसे स्वतंत्र कर देना आवश्यक था। यह कानून हिंसा के दमन से अधिक मानवीय सुरक्षा और दास-विधि में न्यायपूर्ण व्यवहार का संकेत देता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • मानवीय मूल्य: दास के शरीर पर चोट का प्रतिदान स्वतंत्रता के रूप में है, जो यह बताता है कि किसी भी प्रकार की हिंसा से व्यक्ति की गरिमा पूर्वक संरक्षित है।
  • न्याय और दायित्व: मालिक के कारण नुकसान की भरपाई एक बाह्य दुष्प्रवृत्ति नहीं मानी जाती, बल्कि राज्य के कानून के भीतर दास की सुरक्षा सुनिश्चित करने का हिस्सा है।
  • समझौते की परंपरा: यदि दास अंशतः स्वतंत्र न हो सकता, तब भी कुछ स्थितियों में राहत मिलती है—यह संकेत देता है कि दास के अधिकार कानूनन मान्य थे, भले ही स्थिति सामाजिक-आर्थिक आडंबर से जुड़ी हो।

मुख्य थीम

  1. दायित्व बनाम चोट
  2. स्वतंत्रता के अधिकार की सीमाएं
  3. कानूनी सुरक्षा के लिए दया और व्यवस्था

अन्य संबंधित पद

यहेश्यूआ 34:7 — न्याय के सिद्धांत में चोट-भरपाई आदि का संतुलन, जो दोषी के दायित्व और पीड़ित की सुरक्षा को एक साथ मानता है। यह अनुच्छेद दिखाता है कि हिंसा के परिणामों में सामाजिक नियम कैसे चलने चाहिए।

उत्पत्ति 21:23‑25 — “जो कुछ मरण-सन्निकट हो, वही प्रतिफल” की धारणा से यह विचार मिलता है कि चोट की प्रकृति के अनुसार दंड-व्यवस्था निर्धारित होती है; आँख के बदले आँख की दृष्टि एक समतापीक न्याय का संकेत है।

संकेत-उद्धरण (और उनके उपयोग)

सूत्रों में से: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे पवित्र-कथा टिप्पणीकारों के चर्चित विचारों से मिलती-जुलती नजरिया मिलती है—परन्तु यहाँ इनका पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है; केवल उनके सामान्य अंतर्दृष्टि के अनुरूप विचार प्रस्तुत हैं।

व्यावहारिक निष्कर्ष

यह Verse हमें यह सिखाता है कि प्राचीन समाज ने दास-स्वामित्व के बावजूद चोट के लिए न्यायपूर्ण उपाय निर्धारित किए; कमजोरी के विरुद्ध क्रूरता के बजाय सुरक्षा और स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाने का संदेश है। यदि आज हम किसी कमजोर स्थिति के विरुद्ध हिंसा देखते हैं, तो इसकी समीक्षा और निष्पक्ष प्रतिक्रिया आवश्यक है—स्वतंत्रता, गरिमा और कानूनी सुरक्षा के मूल्यों के अनुरूप।

संक्षिप्त अनुप्रयोग सूची

  • कठोर व्यवहार से बचें: कमजोर वर्ग पर अत्याचार से समाज अधर्म की ओर बढ़ता है।
  • न्याय और दया का संतुलन: चोट के परिणामों में मानवीय सम्मान बनाए रखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 21:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तुम न्याय न बिगाड़ना; तू न तो पक्षपात करना; और न तो घूस लेना, क्योंकि घूस बुद्धिमान की आँखें अंधी कर देती है, और धर्मियों की बातें पलट देती है।

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परन्तु हमारा और हमारे भाइयों का शरीर और हमारे और उनके बच्चे एक ही समान हैं, तो भी हम अपने बेटे-बेटियों को दास बनाते हैं*; वरन् हमारी कोई-कोई बेटी दासी भी हो चुकी हैं; और हमारा कुछ बस नहीं चलता, क्योंकि हमारे खेत और दाख की बारियाँ औरों के हाथ पड़ी हैं।”

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