निर्गमन 21:30 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यदि उस पर छुड़ौती ठहराई जाए, तो प्राण छुड़ाने को जो कुछ उसके लिये ठहराया जाए उसे उतना ही देना पड़ेगा।

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निर्गमन 21:30 पद-दर-पद बाइबल टीका

reader-friendly overview

निर्गमन 21:30 में कानून की परिभाषाओं के भीतर मानव जीवन के मूल्य और दायित्व स्पष्ट होते हैं। इसमें ज़रूरतमंद के बदले उसकी स्वतन्त्रता या प्राण की सुरक्षा से जुड़ी देयताओं का नियम दिखाया गया है। यह वचन बताता है कि यदि किसी व्यक्ति के लिए छुड़ौती ठहराई जाए, तो उसके बदले जो कुछ दिया जाए वह उसी के बराबर अनुमानित अनुशासन और न्याय की प्रतीक बनती है। यह न सिर्फ एक कानूनी नियम है, बल्कि मानवीय मूल्य और दायित्वों के बीच संतुलन की मिसाल है।

verse in its chapter

यदि उस पर छुड़ौती ठहराई जाए, तो प्राण छुड़ाने को जो कुछ उसके लिये ठहराया जाए उसे उतना ही देना पड़ेगा।

main spiritual lesson

मुख्य शिक्षा यही है कि परमेश्वर के सामने हर जीवन का मूल्य है और जब किसी के बोझ या दायित्व की भरपाई की बात आए, तो वह सीमा-वित्त की तरह नहीं—बल्कि नीयत और उपकार के साथ होनी चाहिए। छुड़ौती का तात्पर्य है कि व्यक्ति की सुसंरचना, विवेक और दायित्वपूर्वक शुद्धता के लिए उचित प्रतिफल निर्धारित किया जाए; यह बेईमानी या अन्याय से बचने का मार्ग है। यह भी संकेत देता है कि समाजिक या पारिवारिक दायित्वों में प्रतिफल बराबर और न्यायपूर्ण होना चाहिए।

cross-references with brief explanations

  • निर्गमन 22:29-30 — ग्रामीण-दायित्व और भेंट-चुकौती के नियम, जो जीवन के मूल्य की मान्यता को दोहराते हैं। यह बताता है कि कैसे खेत-उत्पादन या पशुधन के नुकसान में उचित क्षतिपूर्ति निर्धारित की जाती है।
  • वैल्युएशन और न्याय में याकूब 5:4 — मालिक और मजदूर के बीच उचित वेतन के सिद्धांत का अनुरोध; समान व्यवहार और निष्ठा से काम लेने की सीख देता है।
  • रोमि 13:8-9 — प्रेम के अनुसार दायित्वों की पूर्ति; किसी के साथ अन्याय नहीं, बल्कि प्रेम से एक-दूसरे का पालन।

careful application

व्यवहार में इसका अर्थ है कि कठिन परिस्थितियों में भी अधिकार-प्रेषण और दायित्व संतुलित रहे। परिवार, समुदाय या समाज में यदि किसी कर्म से नुकसान होता है, तो न्यायपूर्ण क्षतिपूर्ति देना आवश्यक है। यह अहंकार नहीं, बल्कि प्रेम और निष्ठा का प्रदर्शन है। साथ ही, छुड़ौती के नियम का उद्देश्य न्याय के साथ दयालुতা को भी बनाए रखना है—ताकि वे जो कमजोर पड़ें, उन्हें भी सम्मान और सुरक्षा मिले।

summary

निर्गमन 21:30 बताता है कि छुड़ौती की व्यवस्था में मूल्यांकन स्पष्ट और समान हो, ताकि प्राणी-जीवन के प्रति सम्मान बना रहे। यह कानून-परक नियम मात्र नहीं, परन्तु समाज में बंधनों के बीच न्याय और करुणा की समता स्थापित करने का एक साधन है, जो व्यक्तिगत दायित्वों और सामाजिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाता है।

यह Commentary draws on the classic insights of public-domain commentators for broader understanding:

Matthew Henry से: “जो कुछ त्यागना पड़े, वह सत्य-न्याय की तराजू से तौलना चाहिए; क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में जीवन का मूल्य सर्वोपरि है।” Albert Barnes से: “परिशोधन और प्रतिफल का नियम यह दिखाता है कि समाज में गलतियों के लिए उचित दंड और क्षतिपूर्ति दी जाए, न कि अन्याय से बचना।” Adam Clarke से: “छूट और छुड़ौती की व्यवस्था मानवीय संवेदना को कानून के साथ जोड़ती है, ताकि दायित्वों का पालन और सहायता का मार्ग खुला रहे।” एक अन्य सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकार के विचारों के साथ, यह पाठ समग्र रूप से न्याय, दया और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक संयुक्त समझ देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 21:30 समानांतर पद और संबंधित वचन

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निर्गमन 21:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 21:22 (HINIRV) »
“यदि मनुष्य आपस में मार पीट करके किसी गर्भिणी स्त्री को ऐसी चोट पहुँचाए, कि उसका गर्भ गिर जाए, परन्तु और कुछ हानि न हो, तो मारनेवाले से उतना दण्ड लिया जाए जितना उस स्त्री का पति पंच की सम्मति से ठहराए।

निर्गमन 30:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 30:12 (HINIRV) »
“जब तू इस्राएलियों कि गिनती लेने लगे, तब वे गिनने के समय जिनकी गिनती हुई हो अपने-अपने प्राणों के लिये यहोवा को प्रायश्चित दें, जिससे जब तू उनकी गिनती कर रहा हो उस समय कोई विपत्ति उन पर न आ पड़े।

गिनती 35:31 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 35:31 (HINIRV) »
और जो खूनी प्राणदण्ड के योग्य ठहरे उससे प्राणदण्ड के बदले में जुर्माना न लेना; वह अवश्य मार डाला जाए।

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