Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 17:5 का सार और अर्थ
इस पद में संकेत है कि दीन-हौसला टूटे राज्य पर तत्कालीन आक्रमणकारी दबाव के साथ एक प्रकार का विनाशकारी आघात आयेगा—जैसे लवनेवाला अनाज काटकर बालों को समेटता है या रापा नामक तराई में सिले-बीज बीनता है। यह गम्भीर आक्रामक स्थिति के प्रतीकात्मक चित्र है जिसमें निर्बल राष्ट्र पर अचानक और बिना संभलने के प्रहार होते हैं।
संदर्भ-प्रसंग
यशायाह 17 अध्याय मिस्र-सीरिया के गठजोड़ के बाद के समय की तस्वीर देता है, जब इसराइल-यहोवा के लोगों के लिए एक आक्रांतिकाल था। यहूदियों के लिए यह निराशा और असुरक्षा का समय था, परन्तु भविष्य में परमेश्वर की मदद और उद्धार की आशा भी दिखाई देती है।
व्याख्यात्मक बिंदु
थीम-चिन्ह
क्रॉस-रेफरेंस (संकेत-व्याख्या)
1) यशायाह 8:9-10—से पूछता है कि जब राष्ट्र मिलकर अत्याचार करते हैं, तब भी परमेश्वर उनके साथ है; यह पंक्ति हमें उद्धार की सम्भावना दिखाती है जब मानवीय संहार निर्णायक नहीं होता।
2) यशायाह 37:20-34—आशा की एक धार: परमेश्वर अपने लोगों को बाहरी खतरे से सुरक्षित रखने के लिये उपाय करता है; यह संकेत देता है कि संकट के समय परमेश्वर की सहायता सबसे महत्वपूर्ण है।
3) निर्गमन 14:13-14—यहोवा के साथ धीरज रखने के मूल शिक्षा: भय छोड़ो, संघर्ष के बीच भी ईश्वर के उद्धार की राह है।
प्रायोगिक निष्कर्ष
इस पद से सिखने योग्य मुख्य पाठ यह है कि विपत्तियों के समय भी ईश्वर पर दृढ़ विश्वास बनाए रखना चाहिए। मानवीय उपाय सीमित होते हैं, परंतु परमेश्वर की सहायता से ही वास्तविक सुरक्षा मिलती है। अपने जीवन के छोटे-छोटे “अनाज”—समय, शक्ति, और संसाधनों—को परमेश्वर की महिमा के लिए व्यवस्थित रखें।
नोट: इस टिप्पणी में मैथ्यू हेनरी, एलेक्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के संक्षिप्त विचारों के मिलेजुले संकेतित उद्धरण केवल आवश्यक संदर्भ के लिये हैं; पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं दिया गया है।
हिंदी साहित्य में संदर्भित उद्धरण (संक्षेप)
उन प्रवचनों में कभी-कभी यह कहा गया है कि विपत्ति के समय भी परमेश्वर की क्रिपा सबसे पहला स्रोत है, और वह अपने लोगों की रक्षा के लिये सही समय पर हस्तक्षेप करता है।