Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 59:21 का मुख्य अर्थ
यह वचन कहता है कि परमेश्वर अपनी वाचा को न भुलाएगा, बल्कि उसका आत्मा और परमेश्वर का वचन सदैव तेरे मुँह और तेरे बच्चों के मुँह से निकलते रहेंगे। यह एक आश्वस्ति है कि ईश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं को बनाए रखेगा और उनके प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी स्थिर रहेंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह धर्मशास्त्र में ईश्वर के चुनाव और उद्धार की गूँज है। 59 अध्याय में बाइबल बताती है कि इस्राएल के पापों से उद्धार कैसे आता है—न्याय और कृपा के मध्य विश्वासयोग्य परमेश्वर द्वारा। इस वचन के भीतर, वाचा, आत्मा और वचन-स्थायित्व तीनों एक साथ जुड़े हैं: ईश्वर चाहते हैं कि उनके दासों के साथ एक स्थायी संबंध बना रहे और यह संबंध उनके मुँह और उनके बच्चों के मुँह से प्रचारित होता रहे।
व्याख्यात्मक बिंदु
संदर्भ से परिचय—कथनात्मक लिंक
यह वाक्य ईब्र methods में इब्रा. 10:16 तथा रोम 11:27 के साथ जुड़ा है, जो इस बात को पुष्ट करते हैं कि परमेश्वर का नया वाचा-प्रकाशन और प्रतिज्ञा अब और भविष्य में भी बना रहेगा।
छोटे शीर्षक, 2-3 प्रमुख Cross-References
इब्रा. 10:16 — “यह वही वाचा है कि मैं आबादों के साथ” संकेत करता है कि परमेश्वर अपने निवास-स्थल में दीर्घकालीन सहभागी बनते हैं।
रोम 11:27 — यह बताता है कि यह नया वचन इस्राएल के लिए पूर्ण रूप से और स्थिर रूप से कार्य करेगा, जब तक कि हर पीढ़ी इसे अनुभव करे।
यशायाह 54:10 — विश्वासयोग्य प्रेम और वाचा की स्थिरता के नाते यह दर्शाता है कि परमेश्वर का वचन कभी हट नहीं सकता।
आलौकिक संदेश—संक्षिप्त व्याख्या
यह वचन एक दार्शनिक ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि एक सजीव आश्वासन के रूप में उद्धृत होता है: ईश्वर अपने आत्मा को आपके ऊपर डालकर आपको प्रेरित करता है और उनके वचनों को आपके मुँह से, और आपकी पीढ़ियों के मुँह से प्रवाहित करते रहने की गारंटी देता है। यह कहता है कि भले ही समय बदल जाए, परमेश्वर की स्मृति और उसकी सिक्त शास्त्र-उद्धार सत्ता अटल रहेगी।
व्यवहारिक अनुप्रयोग
इस पवित्र वचन का निष्कर्ष यह है कि ईश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं को कभी न छोड़ेंगे; उनका आत्मा और उनका वचन निरंतर सक्रिय रहते हैं, हमारे और हमारे बच्चों के जीवन को ढालते और मार्गदर्शित करते हैं।