यशायाह 64:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे यहोवा, क्या इन बातों के होते हुए भी तू अपने को रोके रहेगा? क्या तू हम लोगों को इस अत्यन्त दुर्दशा में रहने देगा?

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यशायाह 64:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

या वाक्य का सीधा अर्थ

यशायाह 64:12 में प्रार्थना है: हे यहोवा, इन बातों के होते हुए भी तू अपने आप को रोक नहीं सकता? क्या तू हम लोगों को इस अत्यन्त दुर्दशा में रहने देगा?

पृष्टभूमि और संदर्भ

यशायाह का यह भाग उन लोगों की स्मृति है जिन्हें परमेश्वर ने अपने पवित्र नगर, उद्देश्यपू्र्ण काल और चॉर्य के साथ जोड़ कर देखा था। इस पंक्ति में भविष्यवक्ता ने मौजूदा स्थिति और परमेश्वर के निर्णय के बीच एक संगति प्रस्तुत की है: देश बसीरूप से संकट में है और लोग दुर्दशा से दुखी हैं। यह पुकार आत्म-आलोचना और प्रार्थना का मिश्रण है: क्या परमेश्वर अब भी हमारे साथ है, जब हमें यह कठिनाई दिखती है?

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • आत्म-आलोचना: पवित्रता के अभाव और दुष्कर्म के कारण उद्धारकत्व की कमी दिखाई देती है।
  • योजना-परिक्षण: दुर्दशा के बीच भी भक्तों का यह प्रश्न कि परमेश्वर की शक्ति और कृपा अब कहाँ हैं।
  • आस्था की चपलता: यहोवा से गहरे लगाव और उनकी निष्क्रियता के बजाय उनकी कृपा के लिए विनम्र प्रश्न।

आत्म-निर्णय और थीमैटिक बिंदु

  • सिर्फ दंड से नहीं, परमेश्वर का उद्धाराभाव भी जीवित रहता है—आक्रोश के बीच आशा की किरण।
  • भक्तों के लिए दया के मार्ग खुलते हैं जब वे अपने पापों के लिए पश्चाताप करते हैं।

प्रमुख क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप

यशायाह 63:15— परमेश्वर के पास से निकटता और उद्धार की इच्छा भी प्रकट होती है; संकट के समय भी उसकी दया जीवित रहती है।

यिर्मयाह 33:3— परमेश्वर बुलाहट कर के उत्तर देता है, जब लोग उसकी ओर vigilant रूप से प्रत्यक्ष हों।

रोमियों 8:24-25— हमारे उद्धार की आशा में धैर्य और प्रतीक्षा की प्रेरणा मिलती है; यहूदियों के भीतर भी यह विश्वास बना रहता है कि परमेश्वर का उद्धार迟 से नहीं होता।

कथनात्मक संकलन (कुटुम्बित सार)

यहोवा के प्रति विश्वास और प्रार्थना की घड़ी में, भक्तों को अपने पापों के कारण हुई परिस्थितियों को समझना और परमेश्वर की करुणा पर निर्भर रहना चाहिए। संकट के समय भी विश्वास की धारा रुकती नहीं, बल्कि परमेश्वर के उद्धार की आशा से बल मिलती है।

संशोधित निष्कर्ष / व्यावहारिक Takeaway

जब जीवन दुर्दशा में दिखाई दे, तब विनम्र प्रार्थना और आत्म-निश्नेह से परमेश्वर के पास लौटना चाहिए। उसकी कृपा और उद्धार की उम्मीद बनी रहे, क्योंकि उसकी शक्तिपूर्ण कृपा अज्ञानता नहीं बल्कि सहायता देगी।

उद्धरण-संदर्भ (मूल टिप्पणीकारों के शुद्ध शब्द): यदि उपलब्ध हों, तो आवश्यक पंक्तियाँ उद्धरण के रूप में दी जाएँगी।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 64:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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