यशायाह 64:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जैसे आग झाड़-झँखाड़ को जला देती या जल को उबालती है, उसी रीति से तू अपने शत्रुओं पर अपना नाम ऐसा प्रगट कर कि जाति-जाति के लोग तेरे प्रताप से काँप उठें!

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यशायाह 64:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 64:2 पर सार-सनजोय (HINIRV)

सीधे शब्दों में वचन का मर्म यह है कि परमेश्वर की महिमा ऐसी तरह प्रकट हो कि शत्रु काँप उठें; जैसे आग लकड़ी को जलाती है और जल को उबालती है, वैसे ही तेरे नाम के प्रगट होने के कारण जातियाँ डगमगाने लगें।

संदर्भ पृष्ठभूमि

यह उद्धारक-युग की भविष्यवाणी है जहाँ यशायाह परमेश्वर के सम्मान और दायित्वपूर्ण प्रतिशोध को उजागर करता है। मानवीय अनुभव में शरण-निवास के बाद भी ईश्वर के वैभव को देखने की चाह है; यशायाह इस भाग में यह दर्शाते हैं कि जो लोग ईश्वर से दूर रहे, वे उसकी पवित्रता के सामने घुटने टेक देंगे। उस समय के इतिहास में यह भी संकेत है कि परमेश्वर किंगडम के पवित्रता-प्रकाश से राष्ट्रों को सचेत करेंगे।

व्याख्यात्मक विचार

  • ईश्वर के नाम की प्रगटता एक तीव्र, निर्णायक चिंगारी है—वह ऐसी अनुभूति है कि शत्रु, उनके सामर्थ्य या बल के बावजूद, परमेश्वर के सामने असहाय हो जाते हैं।
  • यह एक उद्धार के दृश्य का भाग है, जिसमें परमेश्वर के सकल अधिकार और पवित्रता के कारण बंधन टूटते हैं और लोग भयग्रस्त होकर ईश्वर की उपस्थिति को स्वीकारते हैं।
  • यशायाह के लिए यह दृश्य यह संकेतक है कि केवल विद्युत-प्रभा नहीं, बल्कि न्याय और दयालुता का संतुलन परमेश्वर के शासन में है।

संयुक्त विचारधारा: 2-3 संबंधित मार्गदर्शक टिप्पणियाँ

- मिसाल के तौर पर मॉथ्यू हेन्री कहते हैं कि परमेश्वर की प्रगटता वह आग है जो नैसर्गिक darkness को भी भेदकर उजाला कर देती है; यह लोगों के अंतरमन की वास्तविक प्रतिक्रिया को उजागर करती है।

— एल्बर्ट बार्न्स इस प्रकार की पंक्ति को यह बताती है कि परमेश्वर की शक्ति ऐसे उदाहरणों के माध्यम से दिखती है कि लोग अपनी निर्भीकता छोड़कर उसकी महिमा के सामने झुकते हैं।

— एडम क्लार्क के अनुसार यह उद्धार का दृश्य है जहाँ देव-आराधना में लोगों को परिशुद्धता और पवित्रता के साथ आना पड़ता है, क्योंकि परमेश्वर अपने नाम को प्रगट करके प्रत्यक्ष क्रोध और कृपा दोनों का प्रदर्शन कर देता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ संबंध)

1) यशायाह 60:2-3 — पृथ्वी पर उजाला और Nations के लिए प्रकाश की अनुभूति; यह प्रतिपादन कि परमेश्वर की महिमा समस्त राष्ट्रों को प्रकाशित करती है।

2) योएला 2:11 — प्रभु की उपस्थिति में लोगों की प्रतिक्रिया: भय, पश्चाताप और उद्धार-आह्वान।

3) पीलगर्मी 4:5 — ईश्वर के समीप आने पर भय नहीं, बल्कि पवित्रता और दयालुता की अनुभूति।

संक्षेपित व्यावहारिक takeaways

  • ईश्वर की महिमा हमारे भीतर से नहीं, बल्कि उसकी पवित्र उपस्थिति से प्रकट होती है; हमारे अहंकार को गिराकर उसे मान्यता देता है।
  • कठोरता से नहीं, बल्कि परमेश्वर के नाम की पवित्रता के सामने विनम्रता से आना चाहिए।
  • दर्शनों में प्रेरणा पाने के बजाय, अपनी दिनचर्या में विश्वास और नम्रता के साथ ईश्वर-आशय को ग्रहण करें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 64:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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