Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 48:1 यिर्मयाह 48:2 यिर्मयाह 48:3 यिर्मयाह 48:4 यिर्मयाह 48:5 यिर्मयाह 48:6 यिर्मयाह 48:7 यिर्मयाह 48:8 यिर्मयाह 48:9 यिर्मयाह 48:10 यिर्मयाह 48:11 यिर्मयाह 48:12 यिर्मयाह 48:13 यिर्मयाह 48:14 यिर्मयाह 48:15 यिर्मयाह 48:16 यिर्मयाह 48:17 यिर्मयाह 48:18 यिर्मयाह 48:19 यिर्मयाह 48:20 यिर्मयाह 48:21 यिर्मयाह 48:22 यिर्मयाह 48:23 यिर्मयाह 48:24 यिर्मयाह 48:25 यिर्मयाह 48:26 यिर्मयाह 48:27 यिर्मयाह 48:28 यिर्मयाह 48:29 यिर्मयाह 48:30 यिर्मयाह 48:31 यिर्मयाह 48:32 यिर्मयाह 48:33 यिर्मयाह 48:34 यिर्मयाह 48:35 यिर्मयाह 48:36 यिर्मयाह 48:37 यिर्मयाह 48:38 यिर्मयाह 48:39 यिर्मयाह 48:40 यिर्मयाह 48:41 यिर्मयाह 48:42 यिर्मयाह 48:43 यिर्मयाह 48:44 यिर्मयाह 48:45 यिर्मयाह 48:46 यिर्मयाह 48:47



यिर्मयाह 48:39 पर एक नजर
यह पद मोआब के विरुद्ध यरूशलेम के भविष्यवाणी पथ पर एक कठोर नज़ारा देता है। दिव्य आह्वान मोआब के भीतर भय और विनाश के संकेतों को उद्घाटित करता है, क्योंकि वह आंतरिक पलायन और पराधीनता से पीड़ित है। आख्यान गहराई से यह दिखाता है कि परमेश्वर के निर्णय से कोई राजा, कोई महिमा या कोई सैन्य शक्ति बच नहीं पाती।
पड़ाव अनुसार पाठ का स्थान और अर्थ
यिर्मयाह 48:39 में मोआब कैसे गिरा—यह एक दयनीय दृश्य है जहाँ सब पलायन, शोक और लज्जा एक साथ दिखाई देते हैं। यह संदेश यह दर्शाता है कि मोआब की आंतरिक धारणाओं और बाह्य समृद्धि का पतन एक संकेत है कि परमेश्वर की योजना से किसी को बख्शा नहीं गया।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है: गौरव के पीछे एक ढहती स्थिरता है यदि वह परमेश्वर की इच्छानुसार न हो। मोआब के लिए यह विनाश का समय है क्योंकि वेतियों और अंर्तरागों में उनके विश्वास ने स्थायित्व नहीं पाया। इस verses में परमेश्वर के न्याय का स्वभाव सामने आता है—ताकि सभी यात्राएं उनकी सत्ता के अनुसार नियंत्रित हों और जिस देश ने दूसरों को ठहाका लगाया, उसे वही ध्वस्त करें।
अनुरूपता और तुलनात्मक संदर्भ
- आयत:yिर्मयाह के अन्य भागों में भी मोआब का उद्धारक नहीं दिखता; कहीं-कहीं यह कहा गया है कि मोआब अपने अंधे विश्वास और दम्भ के कारण गिरने वाला है।
- अन्य बाइबल संदर्भों मेंismos: ईश्वरीय न्याय अलग-अलग देशों के लिए भिन्न प्रकार से आता है, परन्तु हर जगह यह सत्य रहता है कि प्रभु की योजना सबसे ऊपर है।
उद्धृत समान विचारधारा: पुराने टिप्पणीकारों के समान मान्य संकेत, जैसे यह कि राज-प्रशासन और आंतरिक अभिमान परमेश्वर के हुक्म के सामने अटक जाते हैं, इस पाठ के साथ संगत रहते हैं।
क्रिस्टियन आवेदन
1) विनय और भय-भाव: अपने स्थान, संपत्ति या शक्ति पर निर्भर होने के बजाय, हमारा भरोसा परमेश्वर की निश्चितता पर होना चाहिए।
2) सजगता: दूसरों के लिए न्याय का विचार रखते समय हमें आत्म-निर्भरता के बजाय प्रभु की इच्छा को प्रमुख मानना चाहिए।
3) समय-निर्णय: कठिन समय में भी यह स्मरण रखना कि परमेश्वर की योजना विश्वसनीय और उद्धारकारी है, भले ही स्थिति दुखद क्यों न हो।
पारस्परिक संदर्भ और संक्षेप सार
- संदर्भ 1: यिर्मयाह 49 में अन्य देशों के लिए भी न्याय और मोचन की चेतावनी।
- संदर्भ 2: यिर्मयाह 45–46 में परमेश्वर के निर्णय के क्रम और न्याय की बारंबारता।
- संदर्भ 3: सेप्पोरियों 1–2 में परमेश्वर के souverain अधिकार का विचार, कि प्रभु के योजनाओं के अनुरूप ही इतिहास चलता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष: इस आयत का मूल संदेश है—धन, शक्ति और मान-प्रतिष्ठा जब तक परमेश्वर की मार्गदर्शिका नहीं मिलती, तब तक वे तिलहन के ढेले हैं; जब परमेश्वर निर्णय लेते हैं, तब वहां विनाश की आहट सुनाई देती है। मोआब की स्थिति इस बात को स्पष्ट करती है कि किस प्रकार आंतरिक अभिमान और बाहरी आडंबर अंततः पराजय की वजह बनते हैं, और इसमें से नम्रता और विश्वास की एक नई राह निकलती है।
याद रखें: नीचे दी गई क्रॉस-रेफरेंसेस से आप पढ़ाई को दहराते हुए देखते हैं कि परमेश्वर के न्याय के समय और स्थान कितने सुसंगत हैं, और कैसे एक देश की स्थिति का फर्क हमारी आत्मा के लिए एक चेतावनी बन सकता है।