Old Testament
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यहोशू 17:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोशू ने उनसे कहा, “यदि तुम गिनती में बहुत हो, और एप्रैम का पहाड़ी देश तुम्हारे लिये छोटा हो, तो परिज्जियों और रापाइयों का देश जो जंगल है उसमें जाकर पेड़ों को काट डालो।”
यहोशू 17:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 17:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 13:7 (HINIRV) »
सो अब्राम, और लूत की भेड़-बकरी, और गाय-बैल के चरवाहों में झगड़ा हुआ। उस समय कनानी, और परिज्जी लोग, उस देश में रहते थे।

उत्पत्ति 14:5 (HINIRV) »
चौदहवें वर्ष में कदोर्लाओमेर, और उसके संगी राजा आए, और अश्तारोत्कनम में रापाइयों को, और हाम में जूजियों को, और शावे-किर्यातैम में एमियों को,

यहोशू 17:15 का मौजूदा संदर्भ और उसका मतलब
यहोशू 17:15 में येरुशलेम से अलग पड़ने वाले एप्रैम के पर्वतीय देश और जंगलों के निवासियों के बीच की रणनीतिक बातचीत है। जोहिश्वा (यहोशू) ने बानियाँ और रापाइयों के देश के बारे में एक स्पष्ट मार्गदर्शन दिया: व्यस्त गिनती के बजाय यदि क्षेत्र छोटा माना जाए, तो वहाँ जंगल के भीतर पेड़ काटकर नई राह बनानी चाहिए। यह पाठ उसके समय की सैनिक-योजना और भू-स्थिति से जुड़ा है, न कि केवल युद्ध की घोषणा से।
परिवारिक संदर्भ में यह पाठ क्या बताता है
यहोशू एक नेतृत्वकर्ता की तरह दृढ़ निर्णय लेकर आगे बढ़ते हैं। वह सैनिकों की संख्या पर निर्भर रहते हुए भी भू-स्थिति के अनुसार क्रियात्मक उपाय सुझाते हैं—यह दर्शाता है कि परमेश्वर के लोग संसाधनों के साथ साहस और रचनात्मकता दिखाएँ। बाइबल के कई भागों में युद्ध से पहले ऐसे युक्तिनामों का समर्थन मिलता है, ताकि विश्वास और विवेक साथ मिलकर योजना बनाएं।
पवित्रता और विश्वास की दृष्टि से पाठ
इस वाक्य में God की महत्ता ऊपर उठती है: भले ही संख्या कम हो, परिदृश्य और साधन-उपाय के साथ वह सहायता कर सकता है। यह संकेत देता है कि विश्वास के साथ योजना बनाते समय समाज के कमज़ोर पक्षों को ही नहीं, बल्कि जंगल जैसी बाधाओं को भी अवसरों में बदला जा सकता है।
शब्दार्थ और दृश्य-छवि
“पेड़ों को काट डालो” एक व्यावहारिक, ठोस क्रिया है—बोलता है कि बाधाओं को चुनौती बनाकर मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। जंगल एक अन्नत आशाओं का प्रतीक नहीं, बल्कि मेहनत और संसाधन-शोषण से मुक्त करने वाला क्षेत्र भी हो सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
आज के संदर्भ में उपयोगी अभ्यास
मूल पाठ से प्रेरित एक समेकित निष्कर्ष यह है कि परमेश्वर के लोग संसाधनों के अभाव के बावजूद विवेक और साहस से आगे बढ़ते हैं। सीधे शब्दों में, कठिन अवसर भी विश्वसनीय योजना और कार्य-नीति से कम नहीं होते।