Old Testament
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यहोशू 2:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यह सुनते ही हमारा मन पिघल गया, और तुम्हारे कारण किसी के जी में जी न रहा; क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा ऊपर के आकाश का और नीचे की पृथ्वी का परमेश्वर है।
यहोशू 2:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 2:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 4:39 (HINIRV) »
इसलिए आज जान ले, और अपने मन में सोच भी रख, कि ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्वी पर यहोवा ही परमेश्वर है; और कोई दूसरा नहीं। (1 कुरिन्थियों. 8:4)

यहोशू 5:1 (HINIRV) »
जब यरदन के पश्चिम की ओर रहनेवाले एमोरियों के सब राजाओं ने, और समुद्र के पास रहनेवाले कनानियों के सब राजाओं ने यह सुना, कि यहोवा ने इस्राएलियों के पार होने तक उनके सामने से यरदन का जल हटाकर सूखा रखा है, तब इस्राएलियों के डर के मारे उनका मन घबरा गया, और उनके जी में जी न रहा।

यहोशू 7:5 (HINIRV) »
तब आई के रहनेवालों ने उनमें से कोई छत्तीस पुरुष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा करके उतराई में उनको मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया।
यहोशू 2:11 पर नयी समझ: परमेश्वर पर विश्वास के कारण भय एवं वचन-पालन
मुख्य interpretive बिंदु: घबराए हुए लोग नहीं, बल्कि ईश्वर के भय से प्रेरित होकर विश्वास दिखाते हैं कि यहोवा ऊपर आकाश का परमेश्वर है और नीचे पृथ्वी का भी परमेश्वर है; यही भावना रिहायशी ग्राहक-उद्धार के लिए आवश्यक है। जब राहु और रहाब ने यह कहा, तो उनका चयन यह बताता है कि परमेश्वर के स्वयं-अनुदित शासन और उसके लोग एक दूसरे से कैसे जुड़ते हैं: भरोसा, सेवा, और उभरते भय के बीच संतुलन।
पाठ का साहित्यिक परिप्रेक्ष्य
यहोशू 2 अध्याय में रीचेलों के हीर-विद्रोह के क्रम में रहाब की कथा है। यहाँ रयाब और यहूदा के पथ के भीतर कृपा दिखाई देती है—यही वह क्षण है जब ऐतिहासिक कथा में विश्वास के प्रतिफल उभरते हैं। वचन-गाथा में “हमारा मन पिघल गया” एक समाजिक और व्यक्तिगत परिवर्तन का संकेत है: एक प्राणी-केन्द्रित भय नहीं, बल्कि यहोवा के सम्मान से प्रेरित परामर्श और निर्णय।
धार्मिक significanse: theological depth
यह verse यह दिखाता है कि ईश्वर के नाम से स्थापित पहचान कितनी भारी है। जब लोग मानते हैं कि यहोवा आकाश का परमेश्वर है और पृथ्वी का भी, तो उनका जीवन, उनके निर्णय, और उनके व्यवहार उसमें प्रतिफलित होते हैं। यहोशू के समय में यह एक विशेष क्षण है जो ইয়ह्शव-भय और विश्वासी मानवीय जवाबदेही को एक साथ रखता है: डर नहीं, बल्कि सम्मानित आस्था और अनुकूल आचरण।
Cross-reference connections
स्वरूप और प्रश्न for reflection
संक्षेप निष्कर्ष
यहोशू 2:11 में रहाब के कथन से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के भय और उनकी महिमा के प्रमाण से ही समुदाय सुरक्षित रहता है। गहरे भय के बावजूद विश्वास और श्रद्धा का चयन करना ही इस कहानी की केंद्रीय शिक्षा है: परमेश्वर ऊपर है और नीचे भी, और वही हमारे जीवन का सच्चा केंद्र है।
उद्धृत विचार (प्रमुख टिप्पणीकारों से, संक्षेप):
Matthew Henry से एक संक्षिप्त विचार: "मानवीय भय तुरन्त भय ही नहीं रह सकता; परमेश्वर के डर से स्थापित विश्वास से परिवर्तन आता है।" (डायरेक्ट उद्धरण ओपचारिक रूप से यहाँ नहीं जोड़ा गया है; क्रिया-निरूपण के रूप में सार संक्षेप)
Albert Barnes के अनुसार: परमेश्वर के एकीकृत स्वामित्व का अनुभव ही नये आचार-व्यवहार की कुंजी है।
Adam Clarke के अनुसार: भय के साथ विश्वास एक साथी बनकर चलता है और परमेश्वर की महिमा का उद्घाटन करता है।