Old Testament
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यहोशू 2:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे पुरुष तो यरदन का मार्ग ले उनकी खोज में घाट तक चले गए; और ज्यों ही उनको खोजनेवाले फाटक से निकले त्यों ही फाटक बन्द किया गया।
यहोशू 2:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 2:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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न्यायियों 3:28 (HINIRV) »
और उसने उनसे कहा, “मेरे पीछे-पीछे चले आओ; क्योंकि यहोवा ने तुम्हारे मोआबी शत्रुओं को तुम्हारे हाथ में कर दिया है।” तब उन्होंने उसके पीछे-पीछे जा के यरदन के घाटों को जो मोआब देश की ओर हैं ले लिया, और किसी को उतरने न दिया।

यहोशू 2:5 (HINIRV) »
और जब अंधेरा हुआ, और फाटक बन्द होने लगा, तब वे निकल गए; मुझे मालूम नहीं कि वे कहाँ गए; तुम फुर्ती करके उनका पीछा करो तो उन्हें जा पकड़ोगे।”

न्यायियों 12:5 (HINIRV) »
और गिलादियों ने यरदन का घाट उनसे पहले अपने वश में कर लिया। और जब कोई एप्रैमी भगोड़ा कहता, “मुझे पार जाने दो,” तब गिलाद के पुरुष उससे पूछते थे, “क्या तू एप्रैमी है?” और यदि वह कहता, “नहीं,”
यहोशू 2:7 का संदर्भ और अर्थ
पर्वतन के दूसरे अध्याय में राजा यरूबीन के समय, रात्रि के आवेग में दो गुप्तचरों के शहर में प्रवेश करते ही, वे लोग यहोशू के देश-आवागमन के बारे में एक स्पष्टीकरण पाते हैं। यहोशू 2:7 में गुप्तचरों की खोज और फाटक बंद होने की घटना एक त्वरित, परिशुद्ध संकेत देती है कि ईश्वर की योजना के अनुसार निर्णय और संकेत कैसे मिलते हैं। कथा में यह स्पष्ट होता है कि लोग तो गलियों से गुजरते हैं, परंतु वे फाटक के बंद होने से ताला जड़ देते हैं, जो सुरक्षा और मार्गदर्शक नियति के बीच एक संतुलन दर्शाता है।
मुख्य अर्थ
यह श्लोक उन परिस्थिति को सूचित करता है जहाँ खोजकर्ता शहर के भीतर प्रवेश करने का प्रयास करते हैं, परंतु फ़ाटक तुरंत बंद कर दिए जाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि लोग अपने प्रयोजन के बावजूद भी अल्पावधि के लिए असफल रहते हैं और उच्च परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार शहर की सुरक्षा योजना बनती है। यह एक नयी दिशा का संकेत भी है: प्रोत्साहन तब मिलता है जब ईश्वर का संरक्षण और मार्गदर्शक आदेश स्पष्ट हो।
तीन प्रमुख विषय
संदर्भित आयतें और उनके लिंक
यहाँ कुछ प्रत्यक्ष संदर्भ दिए जा रहे हैं जो इसी प्रकार के उद्घाटन, सुरक्षा और ईश्वरीय योजना के विचारों को विस्तृत करते हैं:
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि सीमाएं, सुरक्षा और divine timing का संयोजन परमेश्वर के लोग के लिए आवश्यक रहा है।
व्यावहारिक चिंतन
आप इस श्लोक से यह सीखते हैं कि हर प्रयास में ईश्वर के नियंत्रण को मानना चाहिए। चाहे योजनाएं तेज हों या धीमी, फाटक के खुलने या बंद होने से पहले भी परमेश्वर की मंजूरी पर विश्वास रखना चाहिए। मानव चेष्टा तब ही सार्थक होती है जब वह ईश्वर की योजना के अनुरूप हो।
छोटा सार
यहोशू 2:7 सिकोड़ कर कहता है कि मानव प्रयास सीमित होते हैं; ईश्वर की व्यवस्था और समय-सारणी के अनुसार ही सत्यता पूरी होती है। सुरक्षा और मार्गदर्शन के बीच यह कथा हमें भरोसा देती है कि परमेश्वर ही घटनाओं के वेतन घेरे को संचालित करते हैं।
एकीकृत निष्कर्ष
यह श्लोक एक समरस संदेश देता है: विपरीत परिस्थितियों में भी परमेश्वर की योजना सक्रिय रहती है। गुप्तचर का भाग्य, शहर की सुरक्षा और divine स्वीकृति एक साथ चलते हैं, और यही क्रम इतिहास की यात्रा को आगे बढ़ाता है।
सूक्ष्म उद्धरण नोट
यदि उपलब्ध हों, Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त पंक्तियों के साफ उद्धरण नीचे दिए जा सकते हैं, परंतु संपूर्ण पाठ की प्रतिलिपि नहीं दी जाएगी।