Old Testament
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यहोशू 2:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उन पुरुषों ने उससे कहा, “यदि तू हमारी यह बात किसी पर प्रगट न करे, तो तुम्हारे प्राण के बदले हमारा प्राण* जाए; और जब यहोवा हमको यह देश देगा, तब हम तेरे साथ कृपा और सच्चाई से बर्ताव करेंगे।”
यहोशू 2:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 2:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 24:49 (HINIRV) »
इसलिए अब, यदि तुम मेरे स्वामी के साथ कृपा और सच्चाई का व्यवहार करना चाहते हो, तो मुझसे कहो; और यदि नहीं चाहते हो; तो भी मुझसे कह दो; ताकि मैं दाहिनी ओर, या बाईं ओर फिर जाऊँ।”

नीतिवचन 18:24 (HINIRV) »
मित्रों के बढ़ाने से तो नाश होता है, परन्तु ऐसा मित्र होता है, जो भाई से भी अधिक मिला रहता है।

यहोशू 2:14 का केंद्रग्रहण: वचन और संरक्षण के बंधन
यहोशू 2:14 में गेबेऊन की रेहाब के साथ किए गए द्वारिक समझौते का एक महत्वपूर्ण क्षण है जहाँ वचन और क्रिया-गति एक साथ उभरती है। पुरुषों की मांग साफ़ बताती है कि वह विश्वासयोग्यता और सुरक्षा एक-दूसरे के साथ कैसे जुड़ती है: यदि आप हमारी बात प्रकट नहीं करेंगे, तो आपके प्राण के बदले हमारा प्राण जाएगा; और जब यहोवा हमें यह देश देगा, तब हम तेरे साथ कृपा और सच्चाई से बर्ताव करेंगे। यह न केवल एक राजनीतिक-युद्ध की परिघटना है, बल्कि ईमानदारी, प्रतिज्ञा और अल्पकालिक सुरक्षा बनाम दीर्घकालिक विभाग के बीच विश्वास की परीक्षा है।
काव्यमय और कथा-परिप्रेक्ष्य
कथा-परिपाटी में रेहाब की भूमिका एक परस्पर-निर्भरता का संकेत है। स्पर्श: एक शहर से दूसरे शहर तक गुप्त सूचना का आदान-प्रदान, और प्रतिज्ञा के मान की पुष्टि—ये सब मिलकर यह दिखाते हैं कि यह बहाने के पीछे भी एक नैतिक-धार्मिक ढांचा है। यहोशू के नेतृत्व में इस प्रकार की मांगें यह दर्शाती हैं कि याकूब के पुत्रों की तरह यह लोग भी एक विश्वासी समाज की संरचना चाहते हैं जहाँ हिंसा से बचना और गैर-धर्म के साथ परस्पर सुरक्षा संभव हो।
मुख्य theological संकेत
इस वाक्य का theological अर्थ है: सुरक्षा का आधार विश्वास-योग्यता और गुप्त बंधन है, जो नियति के बजाय कृपा से चलना सिखाता है। यह निभाने की कसौटी बताती है कि परमेश्वर के लोग एक-दूसरे के बारे में सचेत और भरोसेमंद बने रहते हैं, ताकि जब देव-देश दिया जाए, तो वह कृपा और सत्य से व्यवहार करें। यह_hook यह है कि सुरक्षा और समझौता केवल शक्तिशाली हथियारों से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के भरोसे और ईमानदारी से टिके होते हैं।
पवित्रशास्त्र में अन्य संदर्भों के साथ संबंध
- मरकुस-याकूब के बंधन: प्रतिज्ञा और सत्य के साथ रहने की responsiveness. उद्धृत नहीं किया गया verse
- הहत्या की रोकथाम और प्रवेश-देश: विश्वासयोग्यता के साथ रहने से सुरक्षा मिलती है (अन्य संदर्भ से प्रेरणा मिलती है कि अलगाव में नहीं, बल्कि साझा वादे में जाना चाहिए).
- दाऊद-आयात: कृपा और सच्चाई के साथ चलना यहोशू-काल में एक साझा नैतिक धारा का हिस्सा है।
आत्म-चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 2:14 इस बात की स्पष्ट शिक्षा देता है कि प्रतिज्ञा-स्पर्श तथा आपसी विश्वास एक क्षेत्र को सुरक्षित बनाते हैं, विशेषकर तब जब नियति के मार्ग पर निर्णय लेने होते हैं। जैसे-जैसे ईश्वर लोग एक देश को जीतते हैं, वैसे-वैसे उनका आचरण—कृपा और सच्चाई के साथ—यही परमेश्वर की इच्छा की वास्तविक दृढ़ता है।
पुराने पर्व-व्याख्या के उद्धरण (उद्धृत उल्लेख)
Matthew Henry और Albert Barnes/Adam Clarke के समान बातों का सार: वे कहते हैं कि प्रतिज्ञा निभाने से समाज में विश्वास बढ़ता है और सुरक्षा की वास्तविक नींव विश्वास-योग्यता पर है। नीचे के शब्द-चिंतन से यह समझ आता है कि आपसी बन्धन और सत्य के साथ रहने से ही यह देश सुरक्षित होगा। (संदर्भ सारांश; कोई पूर्ण Verse टेक्स्ट नहीं दिया गया)
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संकेत एवं संक्षेप)
- संदर्भ 1: लोगों की सुरक्षा के लिए विश्वास-योग्यता आवश्यक है; यह यहोशू के समय की सामाजिक-आस्थाओं को प्रतिबिंबित करता है।
- संदर्भ 2: सुरक्षा के लिए सत्य-प्रतिज्ञा एक साथ चलती है; यह दूसरे समूह के साथ भी सम्बद्ध है।
- संदर्भ 3: दायित्व और कृपा के साथ रहने से देव-देश की प्राप्ति मजबूत होती है।