Old Testament
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यहोशू 2:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब राहाब जिसका घर शहरपनाह पर* बना था, और वह वहीं रहती थी, उसने उनको खिड़की से रस्सी के बल उतार के नगर के बाहर कर दिया। (याकूब. 2:25)
यहोशू 2:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 2:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 9:25 (HINIRV) »
परन्तु रात को उसके चेलों ने उसे लेकर टोकरे में बैठाया, और शहरपनाह पर से लटकाकर उतार दिया।

2 कुरिन्थियों 11:33 (HINIRV) »
और मैं टोकरे में खिड़की से होकर दीवार पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला।

यहोशू 6:20 (HINIRV) »
तब लोगों ने जयजयकार किया, और याजक नरसिंगे फूँकते रहे। और जब लोगों ने नरसिंगे का शब्द सुना तो फिर बड़ी ही ध्वनि से उन्होंने जयजयकार किया, तब शहरपनाह नींव से गिर पड़ी, और लोग अपने-अपने सामने से उस नगर में चढ़ गए, और नगर को ले लिया। (इब्रा. 11:30)
यहोशू 2:15 पर एक दृष्टि और शिक्षा
यहोशू के समय की कहानी में राहाब का एक छोटा-सा, पर अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। यद्यपि राहाब अपनी पहचान अन्यायपूर्ण होने के जोखिम के साथ शहरपनाह के परे दृष्टांत बनकर खड़ी थी, उसने भरोसे के द्वारा परमेश्वर के लोगों के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाईं। यह संदेशन हमारे लिए आस्था और मिसाल दोनों देता है: विश्वास के साथ छोटी-सीertid भूमिका भी महान परिणाम ला सकती है.
पद का पाठ और संदर्भ
यहोशू 2:15 में लिखा है कि राहाब ने अपने घर की खिड़की से रस्सी के बल नगर के बाहर दो लोग उतार दिए ताकि वे सुरक्षित भाग निकल सकें। यह हादसा शहरपनाह के पहले भाग में एक खास प्रयोजन के तौर पर आता है—याहूब के लोग एक सच्ची आस्था के साथ बाहर निकलते हैं, और राहाब ने अपने घर को एक “पालतू” मेल-जोल नहीं बल्कि परमेश्वर के उद्धार के साथ जोड़ा। यह घटना यह दिखाती है कि कैसे एक शिकायत के बीच भी परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार एक व्यक्ति की आस्था काम कर सकती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुसंग और तुलनात्मक पठन
इस घटना की प्रेरणा हिब्रू बाइबिल के कई हिस्सों में मिलती है जहाँ विश्वास, आचरण और साहस एक साथ चलते हैं। एडम क्लार्क, ऐल्बर्ट बार्न्स और मैथ्यू हेनरी जैसे विद्वान सामान्यतः इस प्रकार के अंशों को यह मानते हैं कि परमेश्वर की सुरक्षा और आस्था का मेल व्यक्ति की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। खासकर हेनरी के अनुसार, राहाब की दृष्टि और निर्णय, विश्वास के साथ क्रिया करने की मिसाल बनते हैं; बार्न्स मानते हैं कि राहाब ने ईमानदारी के साथ अपने समुदाय के लिए निर्णय लिया, और क्लार्क यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर द्वारा उद्धार का अवसर किस प्रकार समाज के बाहर खड़े व्यक्ति के लिए खुलता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस जिन्हें संलग्न किया जा सकता है: - याकूब 2:25, जहां राहाब के विश्वास और कर्मों को संबद्ध रूप में उद्धृत किया गया है (ध्यान दें: यहाँ संक्षेप में संदर्भित है); - यहूदा 1:5, जहाँ उद्धार के लिये ईश्वर के कार्यों का स्मरण होता है; - मत्ती 25:35-36, जहाँ परिचय न कर पाने पर भी सहायता देने का महत्व दिखता है।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि विश्वास के साथ क्रिया का संतुलन आवश्यक है और परमेश्वर उन लोगों को बचाने में काम करते हैं जो अपनी स्थिति से ऊपर उठकर साहस दिखाते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
सार
यहोशू 2:15 राहाब की छोटी–सी कार्रवाई में बड़े भावनात्मक और आस्थागत परिणाम दिखाती है: विश्वास से परे कर्म भी आवश्यक हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर अपनी योजना में विमुख नहीं होता और ऐसे लोग भी उद्धार के दायरे में आ सकते हैं जो साहस और दृढ़ विश्वास के साथ कदम उठाते हैं।
संक्षेपित उद्धरणs (public-domain sources)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क से समकालीन सार्वजनिक-डायरेस्ट उद्धरणों में थेरेपी के अनुसार, राहाब के मामले में आस्था और कर्म एक साथ चलते हैं। यदि आप चाहें, मैं इन पाठकों के मूल विचारों के संक्षेपित सार प्रस्तुत कर सकता हूँ।