Old Testament
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यहोशू 6:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब लोगों ने जयजयकार किया, और याजक नरसिंगे फूँकते रहे। और जब लोगों ने नरसिंगे का शब्द सुना तो फिर बड़ी ही ध्वनि से उन्होंने जयजयकार किया, तब शहरपनाह नींव से गिर पड़ी, और लोग अपने-अपने सामने से उस नगर में चढ़ गए, और नगर को ले लिया। (इब्रा. 11:30)
यहोशू 6:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 6:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 11:30 (HINIRV) »
विश्वास ही से यरीहो की शहरपनाह, जब सात दिन तक उसका चक्कर लगा चुके तो वह गिर पड़ी। (भज. 106:9-11, यहो. 6:12-21)

2 कुरिन्थियों 10:4 (HINIRV) »
क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।

यहोशू 6:5 (HINIRV) »
और जब वे मेढ़ों के सींगों के नरसिंगे देर तक फूँकते रहें, तब सब लोग नरसिंगे का शब्द सुनते ही बड़ी ध्वनि से जयजयकार करें; तब नगर की शहरपनाह नींव से गिर जाएगी, और सब लोग अपने-अपने सामने चढ़ जाएँ।”
यहोशू 6:20 पर टिप्पणी—जयजयकार और नगर का पलटना
यहोशू 6:20 में यरूशलेम के बाहर के अभियान का एक निर्णायक क्षण है। इब्रानी सेना ने प्रभु के आदेश के अनुसार परमेश्वर की महिमा में विजय की ध्वनि बुलंद की, और तब प्रजा ने जयजयकार किया। यह वचन दर्शाता है कि विजय केवल सेनाओं की शक्ति से नहीं, बल्कि परमेश्वर की provisional योजना और वचन के अधीन पालन से होती है। यह verse विश्वास के विश्वसनीय परीक्षण, धर्मयुद्ध की आधिकारिकता, और परमेश्वर के अनुसार आचरण में पूर्ण-विश्वास का संदेश देता है।
पार्गिक संदर्भ और मूल संदर्भ
यह पाठ जेरिखो के घेरे के बाद के समय का है, जब योशुआ ने यहोवा के निर्देशानुसार नगर अरुण-प्रलय से लड़ाई लड़ी। यहोशू 6:20 में इब्रानी सेना ने नरसिंगे की ध्वनि की नाद के साथ प्रभु के नाम पर जयजयकार किया। परिणामस्वरूप शहर नींव से गिर पड़ा और लोग विजय प्राप्त कर रहे थे। यह एक स्पष्ट उद्धार का चिन्ह है: परमेश्वर की कथित कृपा और आज्ञा के पीछे एकजुट विश्वास।
मुख्य संदेश
क्रिस्टानी उपाकरण
- परमेश्वर के साक्ष्य के लिए विश्वास और आज्ञाओं का पालन आवश्यक है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों।
- विजय प्रभु के नाम से आती है; मनुष्यों की सेना नहीं, बल्कि परमेश्वर ही सफ़लता देता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतित समझ के साथ)
यहोशू 6:26 और यह 6:27: इन आयतों में भविष्य-धारणाओं का संकेत मिलता है कि इस विजय के पीछे एक प्रतिज्ञा है—परमेश्वर की सहायता तभी मिलती है जब लोग उसकी मार्गदर्शिका के अनुसार चलते हैं।
इब्रानी 11:30 (टिप्पणी के साथ) यह बताता है कि विश्वास के कारण एक बार फिर से आत्म-विश्वास के साथ दैवीय सहायता सामने आती है—यहीं पर यहोशू की कथा का एक प्रकारिक वर्गीकरण है।
रोमियों 8:37-39: परमेश्वर के प्रेम का भरोसा है जो विपत्तियों के बावजूद विजय देता है; यह भी इस पंक्ति के पीछे के सिद्धांत को पुष्ट करता है कि प्रभु के निर्देशों के अनुसार चलना स्थायित्व और जीत देता है।
छोटा devotional विचार
जीवन के जंगलों में भी जब हम प्रभु के नाम से आगे बढ़ते हैं, तो डर की जगह विश्वास की ध्वनि गूँज उठती है। जयजयकार हमारे आंतरिक विश्वास को प्रकट करता है—यह नहीं कि हम शक्तिशाली हों, बल्कि यह कि परमेश्वर हमारे साथ है और वही अधिकार देता है।
शब्द-संयोजन: शब्दों के संकेत
यह verse शक्तिशाली निष्कर्षों के साथ एक उच्चारण है: “नगर नींव से गिर पड़ी”—यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि परमेश्वर के उद्देश्य के विरुद्ध नहीं टिक सकता।
संदर्भ-नोट: नीचे दिये गये उद्धरण पूरक रूप से Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि से संकलित पाठ-नोट्स से प्रेरित हैं, पर मूल विचार हमारे बयान में नया है।
मैथ्यू हेनरी / अल्बर्ट बर्न्स / एडम क्लार्क के संक्षिप्त उद्धरण
“परमेश्वर के आशीर्वाद के बिना किसी भी शस्त्र की विजय नहीं” — Matthew Henry से प्रेरित सार, अगर उद्धरण की शाब्दिक पंक्ति मिलती है तो उसे संक्षेप में ही लिया गया है।
“यह जयजयकार परमेश्वर की महिमा की घोषणा है, और विश्वास के साथ किया गया कर्म है” — Albert Barnes के विचार का संक्षिप्त सार।
“युद्ध की विजय उनके द्वारा नहीं जो शास्त्रार्थ में सक्षम हों, पर वह जो परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं” — Adam Clarke के परिप्रेक्ष्य से संक्षेपित विचार।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 6:20 बताता है कि प्रभु के निर्देशों के अनुरूप आचरण और एकजुट विश्वास से ही वास्तविक विजय संभव होती है। यह कहानी विश्वास के काम और परमेश्वर की महिमा की घोषणा का उत्कर्ष है।