Old Testament
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यहोशू 6:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उन्होंने नगर को, और जो कुछ उसमें था, सब को आग लगाकर फूँक दिया; केवल चाँदी, सोना, और जो पात्र पीतल और लोहे के थे, उनको उन्होंने यहोवा के भवन के भण्डार में रख दिया।
यहोशू 6:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 6:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 8:28 (HINIRV) »
तब यहोशू ने आई को फुंकवा दिया, और उसे सदा के लिये खण्डहर कर दिया : वह आज तक उजाड़ पड़ा है।

2 राजाओं 25:9 (HINIRV) »
उसने यहोवा के भवन और राजभवन और यरूशलेम के सब घरों को अर्थात् हर एक बड़े घर को आग लगाकर फूँक दिया।

प्रकाशितवाक्य 17:16 (HINIRV) »
और जो दस सींग तूने देखे, वे और पशु उस वेश्या से बैर रखेंगे, और उसे लाचार और नंगी कर देंगे; और उसका माँस खा जाएँगे, और उसे आग में जला देंगे।
यहोशू 6:24 का संदर्भ और अर्थ
यहोशू 6 में यरूशलेम की विजय का अभिशंय है। घेराबंदी के बाद यहोशू ने यूद्ध के परिणाम को समाप्त कर दिया: नगर और उसमें जो कुछ था, सब को आग के हवाले कर दिया गया; केवल आभूषण और वस्तुएँ जिन्हें यहोवा के भवन के भण्डार में रखा जाना था, सुरक्षित रहे। यह कार्य कनान देशों के प्रति इस्राइल की पूर्ण निर्णायक विजय का प्रतीक है और यह माना जाता है कि यहोवा की आह्वान-युद्ध के नियमों का पालन किया गया।
मुख्य अर्थ
कहानी का केंद्र यह है कि इस युद्ध में सम्पूर्ण शहर का विनाश हुआ—एक स्पष्ट और कठोर निर्णय जो यहोवा के लिये समर्पण और पवित्रता की आवश्यकता को दर्शाता है। नगर का ध्वंस यह दिखाता है कि ईश्वर के पवित्र उद्देश्य के लिए संसार के सामर्थ्य, धन, और वस्त्र सब कुछ न्योछावर हो सकता है। साथ ही, सोना-चाँदी और धातु के पात्र भक्तों के भण्डार में सुरक्षित रखने की माँग यह संकेत करती है कि दायित्वपूर्ण संपत्ति, जब यहोवा के कार्य के लिए उपयोगी हो, उसे पवित्र स्थलों में जमा किया जाना चाहिए था।
दो-तीन केंद्रीय थीम
संबद्ध passages (संभावित cross-references)
- यूहन्ना 3:16 के शाब्दिक संदर्भों से प्रेरणा, जहाँ प्रेम और पवित्रता का संकल्प दिखता है। यहे संकेत करता है कि परमेश्वर की योजनाओं में बलिदान और निष्ठा किस प्रकार प्रतिफलित होती है।
- 2 पतरस 1:4 के संदर्भ में पवित्रता और भागीदारी का विचार, जहाँ विश्वास के साथ आस्था और पवित्रता को जोड़ना आवश्यक माना गया है।
- इतिहास में अन्य नैतिक निर्देशों के साथ, दावीद की व्यवस्थाएं जैसे भण्डार का पवित्रता के साथ रखना, यह सिद्ध करता है कि संपत्ति का सही उपयोग समुदाय के कल्याण के लिए होता है।
व्यावहारिक विचार
आवेशपूर्ण कार्रवाई और सटीक निर्देश के बीच संतुलन सीखना ज़रूरी है। जीवन के महत्वपूर्ण कदमों में, यह समझना चाहिए कि परमेश्वर के लिए कुछ भी अयोग्य नहीं होना चाहिए—चाहे वह धन हो, समय हो, या शक्ति। हमारी दृष्टि केवल प्रत्यक्ष जीत पर नहीं है, बल्कि यह कि हमारी संपत्ति और संसाधन परमेश्वर के उद्देश्य में कैसे फिट होते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 6:24 दिखाता है कि परमेश्वर के बुलावे पर पूर्ण समर्पण और पवित्रता की गहरी इच्छा से युद्ध-जीवन में भी व्यवस्था और दायित्व बनते हैं। नगर के विनाश के साथ साथ समर्पण के नियम यह कहते हैं कि हर चीज़ का सही स्थान और उद्देश्य होना चाहिए—परमेश्वर के भवन के भण्डार जैसी व्यवस्थित व्यवस्था के माध्यम से समुदाय के लिए संरक्षण और उपयोग संभव होता है।
नोट्स
नोट: नीचे दिये गए दो-तीन पंक्तियाँ स्पष्ट रूप से Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के भरोसेमंद टिप्पण्यांकों के सीमित उद्धरणों के अनुरोध के अनुसार आवश्यक जगहों पर संकेतित हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण के लिए मूल स्रोत देखें।