Old Testament
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यहोशू 6:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर सातवें दिन* वे बड़े तड़के उठकर उसी रीति से नगर के चारों ओर सात बार घूम आए; केवल उसी दिन वे सात बार घूमे।
यहोशू 6:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 6:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 28:1 (HINIRV) »
सब्त के दिन के बाद सप्ताह के पहले दिन पौ फटते ही मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम कब्र को देखने आई।

2 पतरस 1:19 (HINIRV) »
और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्छा करते हो, कि जो यह समझकर उस पर ध्यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अंधियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे।

यहोशू 6:15 पर चि़त्रण Commentary (HINIRV)
यह verse यहोशू के नगर इर्न-यिर्मो का चक्र पूरा करने के क्रम का निर्णायक क्षण है। घेरा डालकर सात दिन लगातार सात बार घूमने के बाद सातवें दिन नगर के प्रस्थान पर विजय मिली। यह चरण यहूदी आस्था में विश्वास, आह्वान और परमेश्वर के निर्देशों के पालन की महत्ता को दर्शाता है।
केंद्रीय अर्थ
यह verse वर्णन करता है कि सातवें दिन, जब यहोशू और योजनाबद्ध बँध-समूह ने नगर पर सात बार घूमकर हर बार शांति-प्रार्थना की, तो नगर के विनाश की योजना के अनुसार विजय प्राप्त हुई। रीति-संरचना—हर दिन सात बार घूमना, फिर वे शोर मचाते और इंसाव-निर्वाण की घोषणा करते—भगवान के निर्देशों के प्रति पूरी अटलता का प्रतीक है। परिणामस्वरूप इक्कीस वर्ष पुराने दायरे और सेनाओं के विरुद्ध उनकी निर्भरता परमेश्वर की शक्ति पर स्पष्ट हो उठी।
मुख्य विषय
संबद्ध पठन-पथ (Cross-References)
1) नियम 6:5 — प्रवेश के समय के स्वर और ध्वनि संकेत: परमेश्वर के निर्देशों के साथ एकता में एक नया चमत्कार संभव होता है।
2) राजाओं 18:41-43 — ईश्वर की आपूर्ति के लिए विश्वास में क्रियात्मक कदम: प्रभु के आदेशों के अनुसार कदम उठाने से परिणाम सामने आते हैं।
3) यूहना 11:43-44 — विश्वास के साथ आवाज और प्रार्थना का प्रभाव: भगवान के शब्दों की आज्ञा से निर्जीव स्थितियाँ भी बदली जा सकती हैं।
व्यावहारिक विचार
1) जीवन की कठिनाइयों में नियमबद्धता बनाए रखें—योजना के हर चरण पर भरोसा दिखाएं, भले परिणाम दृष्टिगोचर न हों।
2) संगठित प्रार्थना के साथ सामाजिक-निरपेक्ष कार्यों में भी प्रतिबद्धता बनाएं—यह आत्म-विश्वास को मजबूत बनाती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 6:15 नगर के विरुद्ध परमेश्वर की योजना के अनुसार क्रमबद्ध समर्पण और धैर्य का प्रतीक है। सात दिन, सात बार घूमना—एक दृढ़ विश्वास का स्मारक है कि सफलता ईश्वर की शक्ति पर निर्भर करती है और मनुष्य के कृत्य-योग में पूर्ण समर्पण से ही प्रभु की कृपा उद्धृत होती है।
नोट: इस पाठाधार में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उपलब्ध संक्षिप्त उद्धरणों का संदर्भ आवश्यक हो तो उनका उल्लेख करते हुए, आवश्यक स्थानों पर उनके विचार मिलते-जुलते तौर पर समाहित किए गए हैं।