Old Testament
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यहोशू 6:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस प्रकार वे दूसरे दिन भी एक बार नगर के चारों ओर घूमकर छावनी में लौट आए। और इसी प्रकार उन्होंने छः दिन तक किया।
यहोशू 6:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 6:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 6:11 (HINIRV) »
उसने यहोवा के सन्दूक को एक बार नगर के चारों ओर घुमवाया; तब वे छावनी में आए, और रात वहीं काटी।।

यहोशू 6:3 (HINIRV) »
सो तुम में जितने योद्धा हैं नगर को घेर लें, और उस नगर के चारों ओर एक बार घूम आएँ। और छ: दिन तक ऐसा ही किया करना।

यहोशू 6:15 (HINIRV) »
फिर सातवें दिन* वे बड़े तड़के उठकर उसी रीति से नगर के चारों ओर सात बार घूम आए; केवल उसी दिन वे सात बार घूमे।
मुख्य व्याख्या बिंदु
यहोशू 6:14 बताता है कि योजनाबद्ध गिरोह-घूमना और नगर के चारों ओर परिक्रमा की दूसरी बार भी वैसी ही क्रम में पूरी की गई—छः दिन तक चारों ओर घूमना, फिर सातवाँ दिन विजय का क्षण। यहाँ की मुख्य बात यह है कि प्रभु के निर्देश के अनुसार क्रमिक, आज्ञापालन और धैर्य से किया गया आस्था-जनित कर्म सफल हुआ। यहोशू के नेतृत्व में याकूब नहीं, बल्कि ईश्वर के संकेत के अनुरूप मानो-परिक्रमा करने में विश्वास का प्रतिफल दिखता है।
संरचना-संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यह अंश पवित्र योजना के एक चरण का भाग है जहां हर दिन एक वर्ष जैसी प्रतीक्षा के बाद भी लोग obediently चले। परिक्रमा का यह अभ्यास नगर के पत्थरों और दीवारों के ऊपर नहीं, बल्कि आस्ति-तत्व के साथ किया गया—यह प्रतीक है कि विजय सिर्फ सेनाओं की शक्ति नहीं, बल्कि ईश्वर की आज्ञापालन से होती है।
धार्मिक महत्व
किसी भी युद्ध में यह शिक्षा मिलती है कि क्रोध, वीरता या रणनीति के बजाय परमेश्वर के निर्देश ही असली शक्तिमान होते हैं। यहोशू 6 में परिक्रमा की 6 दिन की परंपरा और 7वें दिन की विजय का संयोजन स्मरण दिलाता है कि ईश्वर अपने लोगों पर कैसे कृपा-व्यवस्था बनाते हैं जब वे पूरी तरह से उसके निर्देशों पर चलते हैं।
ग्रंथ-विमर्श से अन्य ग्रंथों से जोड़ाव
• बाइबल के अन्य भागों में भी आराधना और आज्ञापालन से विजय का अनुभव मिलता है; उदाहरणतः एकाधिक बार लोग परमेश्वर के निर्देश मानकर कदम बढ़ाते हैं और परिणाम पाते हैं।
• यीशु के वक्त भी विश्वास और आज्ञा-पालन का मूल्य दिखता है, जहाँ परमेश्वर के वचन के अनुसार कदम उठाने से उपलब्धि मिलती है।
• यहोशू की निर्भयता और लोगों के संयम से यह पाठ उस आश्वासन को पुष्ट करता है कि परमेश्वर के साथ चलना कठिन समय में भी सफलता का मार्ग है।
विचारयोग्य प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 6:14 में एक सरल-परन्तु गहरी सीख है: परमेश्वर के निर्देशों के प्रति पूर्ण विश्वास और धैर्य से किया गया आचरण, साधारण घटना को भी अद्भुत विजय में बदल सकता है। योजना, आदेश और विश्वास के संगम से ही सत्य विजय संभव है।
उद्धृत टिप्पणियाँ (पूर्व-प्रकाशित पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से)
मार्थोफक्ति टिप्पणी में यह स्पष्ट किया गया है कि क्रमिक आज्ञापालन और धैर्य-पूर्वक किया गया आचरण ही परमेश्वर की विजय को आम जनता के लिए संभव बनाते हैं। (इन पंक्तियों में कोई विशिष्ट वचन नहीं दिया गया है; संकल्पी पाठ का सार यह है कि आज्ञापालन और विश्वास से विजय मिलती है।)
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेपण)
• बाद के इतिहास-गाथाओं में भी परमेश्वर के निर्देश मानकर चलने से विजय के अवसर आते हैं।
• निकट के उद्धार-मार्ग में भी विश्वास और आज्ञापालन का संयोजन प्रमुख है, जो परमेश्वर के अभिप्राय पर टिके रहने को प्रेरित करता है।