यहोशू 6:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और क्या पुरुष, क्या स्त्री, क्या जवान, क्या बूढ़े, वरन् बैल, भेड़-बकरी, गदहे, और जितने नगर में थे, उन सभी को उन्होंने अर्पण की वस्तु जानकर तलवार से मार डाला।

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यहोशू 6:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोशू 6:21 का संदर्भ और अर्थ

यह Verse यरूबेल के निर्गमन के बाद इंटर्नरी के समय के जंग-युद्ध की दृष्टि में आता है। यहालोक में पवित्र शहर इरण के भीतर स्थित येरिको की घेराबंदी के परिणामस्वरूप किया गया क़त्ल कथन है, जहाँ ईश्वर के आदेशानुसार सुरक्षा-यात्रा के लिए परिक्षण और शुद्धिकरण का नियम दिखाया गया। जिस प्रकार Joshua 6 के अध्याय में पवित्र नगर के विनाश का निर्णायक आदेश मिलता है, यह पंक्ति उस ऐतिहासिक घटनाक्रम की कठोरता को उद्घाटित करती है जब सभी वस्तुएँ और सभी जीवित प्राणी एक-एक कर नष्ट किए गए।

मुख्य अभिकल्प और केंद्रीय विचार

यह वचन धार्मिक नियम और निष्ठा की परीक्षा को दर्शाता है। ईश्वर के निर्देश के कारण यहां सभी जीव-जन्तु और नगर-जन से व्यक्तिगत भेदभाव नहीं किया गया; हर किसी को अर्पण की वस्तु मानकर तलवार से मार दिया गया। यह अध्याय यह बताता है कि परमेश्वर की पवित्रता और नैतिक आदेश, कभी-कभी मानव मानवीय संवेदनाओं से ऊपर होते हैं।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • पवित्रता बनाम मानवीय भावना: ईश्वर के आदेश का पालन कठोर होता है, जब वह पवित्रता के लिए कहता है, तब व्यक्तिगत अड़चनें पीछे छोड़ दी जाती हैं।
  • निष्ठा और भरोसा: योशुआ ने ईश्वर के निर्देशों पर अचूक विश्वास बनाए रखा, भले प्रतिफल कितने भी कठोर हों।
  • द्वंद्वपूर्ण शासन के व्यावहारिक परिणाम: यह घटना जन-समूह के लिए एक चेतावनी भी है कि विश्वास के कदम कभी-कभी विनाशकारी हो सकते हैं, परन्तु उद्देश्य ईश्वर की महिमा और पवित्रता की रक्षा है।

अनुकलित क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त विवेचना

यहाँ से सम्बन्धित विचारों के साथ तीन संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस दी जाती हैं:

  • यहोशू 6:17-21: नगर की समस्त चीज़ों का विनाश—ईश्वर के निर्देशों की पूर्णता और कर्तव्य-निष्ठा का उद्भव।
  • यहोशप 6:26: परन्तु प्रतिशोध-पूर्वक दयालुता का संकेत—रेखा-उद्धृत चेतावनीयों की स्मृति।
  • 1 समुएल 15:22: 'आत्म-बलिदान से अधिक, आत्मिकobedience' के सिद्धांत की याद दिलाता है।

इन संदर्भों से दिखता है कि परमेश्वर की योजना में भय, आस्था और समर्पण प्रमुख भूमिका निभाते हैं—परिणाम चाहे जो भी हों, परमेश्वर की पवित्रता सर्वोपरि है।

व्यावहारिक विचार

हम यह समझ लें कि पवित्रता के पालन में कठोर निर्णय कभी-कभी आवश्यक होते हैं, परन्तु ईश्वर के साथ यथार्थ संबंध रखने में हमारी संवेदनाएं, विधान और दया भी संतुलित रहती हैं। आज के पाठक के लिए इसका संदेश यही है: परमेश्वर के निर्देशों पर अडिग रहें, भले परिणाम कैसे भी हों, परन्तु उनका लक्ष्य अनुरूपता, पवित्रता और ईश्वर का सम्मान बनाये रखना है।

सार-संक्षेप

यहोशू 6:21 में यह दर्शाया गया है कि पवित्र नगर के विनाश के क्रम में सभी को अर्पण की वस्तु मानकर तलवार से मारना एक कठोर, पर ईश्वर की पवित्रता और आह्वाहन के अनुरूप एक निर्णायक कदम था। यह घटना हमें स्मरण कराती है कि परमेश्वर की योजना के सामने हमारी समझ सीमित है, पर विश्वास और आज्ञापालन के द्वारा हम उसकी महिमा को देखते हैं।

उद्धृत भागों के सन्दर्भ उल्लेख

मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों से मिले विचारों के अनुसार यह घटना निष्ठा, पवित्रता और कर्तव्य की एक कठोर but आवश्यक सच के रूप में देखने योग्य है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहोशू 6:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 48:18 (HINIRV) »
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