Old Testament
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यहोशू 6:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और क्या पुरुष, क्या स्त्री, क्या जवान, क्या बूढ़े, वरन् बैल, भेड़-बकरी, गदहे, और जितने नगर में थे, उन सभी को उन्होंने अर्पण की वस्तु जानकर तलवार से मार डाला।
यहोशू 6:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 6:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 18:21 (HINIRV) »
फिर एक बलवन्त स्वर्गदूत ने बड़ी चक्की के पाट के समान एक पत्थर उठाया, और यह कहकर समुद्र में फेंक दिया, “बड़ा नगर बाबेल ऐसे ही बड़े बल से गिराया जाएगा, और फिर कभी उसका पता न मिलेगा। (यिर्म. 51:63-64, यहे. 26:21)

यिर्मयाह 48:18 (HINIRV) »
“हे दीबोन की रहनेवाली तू अपना वैभव छोड़कर प्यासी बैठी रह! क्योंकि मोआब के नाश करनेवाले ने तुझ पर चढ़ाई करके तेरे दृढ़ गढ़ों को नाश किया है।

भजन संहिता 137:8 (HINIRV) »
हे बाबेल, तू जो जल्द उजड़नेवाली है, क्या ही धन्य वह होगा, जो तुझ से ऐसा बर्ताव करेगा* जैसा तूने हम से किया है! (प्रका. 18:6)
यहोशू 6:21 का संदर्भ और अर्थ
यह Verse यरूबेल के निर्गमन के बाद इंटर्नरी के समय के जंग-युद्ध की दृष्टि में आता है। यहालोक में पवित्र शहर इरण के भीतर स्थित येरिको की घेराबंदी के परिणामस्वरूप किया गया क़त्ल कथन है, जहाँ ईश्वर के आदेशानुसार सुरक्षा-यात्रा के लिए परिक्षण और शुद्धिकरण का नियम दिखाया गया। जिस प्रकार Joshua 6 के अध्याय में पवित्र नगर के विनाश का निर्णायक आदेश मिलता है, यह पंक्ति उस ऐतिहासिक घटनाक्रम की कठोरता को उद्घाटित करती है जब सभी वस्तुएँ और सभी जीवित प्राणी एक-एक कर नष्ट किए गए।
मुख्य अभिकल्प और केंद्रीय विचार
यह वचन धार्मिक नियम और निष्ठा की परीक्षा को दर्शाता है। ईश्वर के निर्देश के कारण यहां सभी जीव-जन्तु और नगर-जन से व्यक्तिगत भेदभाव नहीं किया गया; हर किसी को अर्पण की वस्तु मानकर तलवार से मार दिया गया। यह अध्याय यह बताता है कि परमेश्वर की पवित्रता और नैतिक आदेश, कभी-कभी मानव मानवीय संवेदनाओं से ऊपर होते हैं।
दो-तीन प्रमुख विषय
अनुकलित क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त विवेचना
यहाँ से सम्बन्धित विचारों के साथ तीन संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस दी जाती हैं:
इन संदर्भों से दिखता है कि परमेश्वर की योजना में भय, आस्था और समर्पण प्रमुख भूमिका निभाते हैं—परिणाम चाहे जो भी हों, परमेश्वर की पवित्रता सर्वोपरि है।
व्यावहारिक विचार
हम यह समझ लें कि पवित्रता के पालन में कठोर निर्णय कभी-कभी आवश्यक होते हैं, परन्तु ईश्वर के साथ यथार्थ संबंध रखने में हमारी संवेदनाएं, विधान और दया भी संतुलित रहती हैं। आज के पाठक के लिए इसका संदेश यही है: परमेश्वर के निर्देशों पर अडिग रहें, भले परिणाम कैसे भी हों, परन्तु उनका लक्ष्य अनुरूपता, पवित्रता और ईश्वर का सम्मान बनाये रखना है।
सार-संक्षेप
यहोशू 6:21 में यह दर्शाया गया है कि पवित्र नगर के विनाश के क्रम में सभी को अर्पण की वस्तु मानकर तलवार से मारना एक कठोर, पर ईश्वर की पवित्रता और आह्वाहन के अनुरूप एक निर्णायक कदम था। यह घटना हमें स्मरण कराती है कि परमेश्वर की योजना के सामने हमारी समझ सीमित है, पर विश्वास और आज्ञापालन के द्वारा हम उसकी महिमा को देखते हैं।
उद्धृत भागों के सन्दर्भ उल्लेख
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों से मिले विचारों के अनुसार यह घटना निष्ठा, पवित्रता और कर्तव्य की एक कठोर but आवश्यक सच के रूप में देखने योग्य है।