Old Testament
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यहोशू 6:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और सात याजक सन्दूक के आगे-आगे मेढ़ों के सींगों के सात नरसिंगे लिए हुए चलें; फिर सातवें दिन तुम नगर के चारों ओर सात बार घूमना, और याजक भी नरसिंगे फूँकते चलें।
यहोशू 6:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 6:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 इतिहास 20:21 (HINIRV) »
तब उसने प्रजा के साथ सम्मति करके कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान होकर हथियारबन्दों के आगे-आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएँ, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है।”

2 इतिहास 20:17 (HINIRV) »
इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रहकर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना; मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका सामना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा।”

लैव्यव्यवस्था 25:8 (HINIRV) »
“सात विश्रामवर्ष, अर्थात् सातगुना सात वर्ष गिन लेना, सातों विश्रामवर्षों का यह समय उनचास वर्ष होगा।
यहोशू 6:4 पर टिप्पणी—सींगों के साथ सात बार घुमाने का सार
सीधे शब्दों में अर्थ: सात याजक सन्दूक के आगे-आगे नरसिंगों के साथ चलेँ; फिर नगर के चारों ओर सात बार घूमना, और सातवें दिन भी उसी क्रम में जाकर नरसिंगे फूँकते रहें। यह एक विशिष्ट, प्रतीकात्मक परिश्रम है जो आस्था, धर्मसंगति और वचन की सफल रणनीति को दर्शाता है: विधान के साथ विश्वास के कदम और परमेश्वर की सहायता से विजय संभव है।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
योधशू के प्रवेशन के बाद यह घटना कनान के युद्ध से जुड़ी है। याजक और सन्दूक प्रभु की उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं, तथा नरसिंगे–जोती-ध्वनि–हमारे विश्वास की प्रार्थना और आराधना की गूंज को संकेत करती है। सात बार घूमना विशेष रूप से पूर्णता तथा चरणबद्ध(methodical) आस्थावान क्रिया है। यह समय-सीमा और क्रम के महत्व को दिखाता है: पूरी तैयारी और परमेश्वर की योजना के अनुसार ही विजय संभव है।
interpretive observations
थीमैटिक बिंदु (संक्षिप्त सूची)
अन्य पवित्र ग्रंथ से सम्बन्ध
1) हिज्याक 6:15 (उल्लेख): दीर्घ समय तक थकान के बावजूद परमेश्वर के निर्देशों का पालन महत्त्वपूर्ण परिणाम देता है। यह घटना एक संकल्प-शक्ति का संकेत है कि परमेश्वर की योजनाओं के साथ सहकार्य किया जाए।
2) भजं 27:14-15 (उल्लेख): दृढ़ विश्वास और आस्था के साथ लगातार कदम उठाने की प्रेरणा मिलती है, भले कठिन समय हो।
3) सृजन 22:8 (उल्लेख): परमेश्वर की इच्छा को मानना और उसकी चरणबद्ध योजना पर अटल विश्वास रखना एकCommunity का प्रमुख गुण है।
परोक्ष उद्धरण (कठोर पाठ से नहीं, पर संदर्भित विचार)
याजक के नेतृत्व में पंक्तिबद्ध क्रम और नरसिंगे फूँकना—यह भली प्रकार से पुराने-commentary स्रोतों में वर्णित है कि. Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समानार्थी विचार इस दृश्य में “आस्था के एक संगठित कर्म” के रूप में मिलते हैं, जहाँ कर्म और विश्वास 함께 विजय लेते हैं।
सार और व्यवहारिक निश्कर्ष
यहोशू 6:4 एक निर्णायक बिंदु है: परमेश्वर की दिशा में क्रमबद्ध आस्था से एक समुदाय एक साथ आगे बढ़कर चमत्कार देख सकता है। हमारी भूमिका है—विश्वास के साथ क्रमबद्ध कदम रखना, प्रार्थना और आराधना के साथ परमेश्वर की उपस्थिति को मानना, और जीवन के कठिन क्षणों में भी सिद्धान्त—धर्म के साथ निर्भयता बनाए रखना।
स्पष्ट उद्धृतियां (जहाँ उपलब्ध)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से जो छोटे कथन सीधे लिए गए हैं, वे नीचे संलग्न हैं कि ये पाठ के साथ संगत हैं; विस्तारपूर्वक मूल ग्रंथ-व्याख्या इन commentators के संकलनों में मिलती है।