Old Testament
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यहोशू 2:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इन पुरुषों से कहने लगी, “मुझे तो निश्चय है कि यहोवा ने तुम लोगों को यह देश दिया है, और तुम्हारा भय हम लोगों के मन में समाया है, और इस देश के सब निवासी तुम्हारे कारण घबरा रहे हैं।
यहोशू 2:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 2:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 23:27 (HINIRV) »
जितने लोगों के बीच तू जाएगा उन सभी के मन में मैं अपना भय पहले से ऐसा समवा दूँगा कि उनको व्याकुल कर दूँगा, और मैं तुझे सब शत्रुओं की पीठ दिखाऊँगा।

व्यवस्थाविवरण 2:25 (HINIRV) »
और जितने लोग धरती पर रहते हैं उन सभी के मन में मैं आज ही के दिन से तेरे कारण डर और थरथराहट समवाने लगूँगा; वे तेरा समाचार पाकर तेरे डर के मारे काँपेंगे और पीड़ित होंगे।'

उत्पत्ति 35:5 (HINIRV) »
तब उन्होंने कूच किया; और उनके चारों ओर के नगर निवासियों के मन में परमेश्वर की ओर से ऐसा भय समा गया, कि उन्होंने याकूब के पुत्रों का पीछा न किया।
यहोशू 2:9 का संदेह-रहित अर्थ: यहोवा के देश पर घटित विश्वास और मोहभंग के क्षण
मुख्य interpretive बिंदु: जब रूहानी विश्वास और राजनीतिक विवेक आपस में टकराते हैं, तब यहोवा के उद्धारकर्ता-योजना के अधीन झूठी भयावहता के बजाय अंतरतम आत्म-विश्वास से काम लेना चाहिए। यहोशू 2:9 में महिलाएं जहमरोहू को कहती हैं कि यहोवा ने इस देश को दिया है, और उसका भय इस देश के निवासियों के मन में समाया है—यह संदेश यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की योजना मानवों के प्रयासों पर आधारित नहीं, बल्कि उसकी कृपा और विश्वास पर टिकी है।
साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
यहोशू का कहानी-खंड, जो यरदन के पार प्रवेश से जुड़ा है, इजाजत देता है कि ईश्वर की दया और गवाही कैसे एक राष्ट्र के भीतर विश्वास की पहचान बनाती है। राहू और रिहाबा जैसी कथाओं के समान, यह भी एक पवित्र योजना का भाग दिखाती है जहां भरोसे के कारण लोग न केवल शर्तें समझते हैं, बल्कि नयी आस्थाओं के साथ आगे बढ़ते हैं। यहां नुक़सान और भय के बीच, राज्य के भीतर साहस और विश्वास की जरूरत पर बल है।
थीological significance (धर्मशास्त्रीय महत्व)
यह मोड़ दर्शाता है कि परमेश्वर की दिशा-निर्देशिता मानवीय डर पर भारी पड़ती है। इज़राइल के युद्ध-योजना में, बाहरी शक्तियाँ नहीं बल्कि आंतरिक विश्वास और शपथ-प्रतिज्ञा की भूमिका अधिक मायने रखती है। यहोवा के देश की स्वीकृति और निवासियों का भय एक साथ जुड़कर यह स्पष्ट करता है कि विश्वास से प्रेरित निर्णय ही जीवन-उद्धार के स्रोत बनते हैं।
Cross-references (संक्रमण-तत्व) एवं संक्षिप्त व्याख्या
चर्चा के लिए प्रश्न (Reflection)
सार-निष्कर्ष
यहोशू 2:9 में नारी-गवाह का संकेत यह स्थापित करता है कि परमेश्वर की कृपा से ढाला गया देश-कार्य भय-प्रधान नहीं, बल्कि विश्वास-प्रेरित है। जैसे अरम्मा और रहाबा की तरह, आज भी विश्वास की आह्वाहन हमारे भीतर अंबर-नीचे ठहरता है: भय को छोड़कर परमेश्वर की दिशा की ओर बढ़ना ही उद्धार का मार्ग है।
संक्षेपित उद्धरण (यह पंक्ति महत्त्वपूर्ण स्रोत से सचित्र अनुवादित है; प्रकाशित सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों से मिलने वाले विचारों के संग):
“यह बात स्पष्ट है: परमेश्वर का यह देश देना—उसकी दया और शक्ति का प्रमाण है; भय विरोधी नहीं, विश्वास-आधार है।” (संकेतित विचारक-सम्पादन)
Note: नीचे दिए गये तीन प्रामाणिक विचार-स्तम्भ (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) से संक्षेपित त्वरित निष्कर्ष एकीकृत रूप में समाहित हैं; पूर्ण वाक्यों के उद्धरण के लिए इन स्रोतों के सार्वजनिक-डोमेन संस्करण देखें।
Cross-references का सार यह है कि विश्वास और ईश्वर की योजना पर अडिग रहने से ही विजय संभव है, चाहे परिस्थितियाँ भय बनकर आएँ।