रोमियों 4:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि यह प्रतिज्ञा कि वह जगत का वारिस होगा, न अब्राहम को, न उसके वंश को व्यवस्था के द्वारा दी गई थी, परन्तु विश्वास की धार्मिकता के द्वारा मिली।

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रोमियों 4:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 4:13 – अभय प्रतिज्ञा और विश्वास की विधि

यह पद सशक्त बनाता है कि परमेश्वर ने अब्राहम को अधिकार-पूर्वक, व्यवस्था के अनुसार नहीं, बल्कि विश्वास की धार्मिकता के आधार पर पुत्र-वारिस बनने की प्रतिज्ञा दी थी। उस समय दुनिया के मूल्य-विहीन कर्मों से नहीं, बल्कि परमेश्वर की निश्छल कृपा और वॉटिक-निष्ठ विश्वास से यह अवतरित हुआ।

ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है

पद स्पष्ट करता है कि धर्मी बनने की सही राह नियमों के पालन में नहीं है, बल्कि विश्वास पर निर्भर है। परमेश्वर ने अब्राहम से पहले ही यह सुनिश्चित कर दिया था कि उसके वंश को पृथ्वी का उत्तराधिकारी बनने का अधिकार विश्वास से मिलेगा, न कि किसी देशीय या आराधना-यात्रिक व्यवस्था से। इससे यह सिद्ध होता है कि धार्मिकता ईश्वर की कृपा से, विश्वास की प्रतिक्रियाओं से पाई जाती है, न कि मानव-परिश्रम से।

किए गए प्रमुख शब्दों और छवियों की स्पष्टीकरण

  • प्रतिज्ञा: परमेश्वर की अचल और अटल वादा, जो समय के अनुरूप कबूल होता है; यह शाब्दिकता से नहीं, वरन विश्वास से ग्रहण होता है।
  • धार्मिकता की व्यवस्था: नियम-संग्रह, सार्थकता को कर्मों से जोड़ती दिशा, जो इस पाठ के अनुसार मानव-करों के बजाय विश्वास पर केंद्रित है।
  • विश्वास की धार्मिकता: विश्वास का उचित परिणाम है कि मनुष्य ईश्वर के सामने निष्ठा और विश्वास के कारण योग्य ठहरता है, न कि अपने गुणों से।

संबंधित अन्य स्नippet पाठ

1) रोमियों 3:28 – “इसलिए कि हम इस बात पर मानते हैं कि मनुष्य के द्वारा धर्मी ठहरना नहीं, बल्कि विश्वास से ही परमेश्वर के द्वारा धर्मी ठहरना चाहिए।”

2) कौलम्बियों 2:13–14 – धर्म के आचरण के बिना भी पाप-जीवन के कटाक्ष से छूटकारा और yeni ली गई जीवन-धारणा: यह भी विश्वास के द्वारा ही संभव है।

3) फातह 23-24 (प्रेरक उदाहरण) – विश्वास के कारण ही परमेश्वर ने अब्राहम को न्यायपूर्ण कहा और उसकी आशीषें भी विश्वास पर आधारित लगीं।

आज के लिए लागू बातें

हम में से हर एक के लिए यह संदेश है कि धार्मिक जीवन केवल नियमों की कड़ाई नहीं, बल्कि परमेश्वर के नीयत पर भरोसा है। जीवन में कठिनाई आए तो जिस तरह अब्राहम ने विश्वास किया, उसी तरह हम भी promises पर टिके रहें, क्योंकि ईश्वर की धर्मी व्यवस्था विश्वास से पूरी होती है।

संक्षिप्त समन्वय

यह पाठ यह बताता है कि परमेश्वर ने अब्राहम को वारिस बनाने की प्रतिज्ञा लोगों के कर्म से नहीं, बल्कि विश्वास की धार्मिकता से दी। इस प्रकार धर्मी ठहरना हमारे कर्मों पर नहीं, बल्कि ईश्वरीय कृपा पर टिका रहता है।

एंगल-ब्रिजिंग नोट्स

इस विचार को Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायम से मिलाकर पढ़ें: सभी संकेत करते हैं कि व्यवस्था बनाम विश्वास के बीच यह पाठ एक निर्णायक स्पष्टता प्रस्तुत करता है—धार्मिकता शुद्ध विश्वास के परिणामस्वरूप होती है। कठोर उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, केवल उनके समन्वित विचार के अनुरूप सार.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 4:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यदि तुम मसीह के हो, तो अब्राहम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।

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अर्थात् शरीर की सन्तान परमेश्‍वर की सन्तान नहीं, परन्तु प्रतिज्ञा के सन्तान वंश गिने जाते हैं।

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“देख, मेरी वाचा तेरे साथ बंधी रहेगी, इसलिए तू जातियों के समूह का मूलपिता हो जाएगा।

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