Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 4:1 रोमियों 4:2 रोमियों 4:3 रोमियों 4:4 रोमियों 4:5 रोमियों 4:6 रोमियों 4:7 रोमियों 4:8 रोमियों 4:9 रोमियों 4:10 रोमियों 4:11 रोमियों 4:12 रोमियों 4:13 रोमियों 4:14 रोमियों 4:15 रोमियों 4:16 रोमियों 4:17 रोमियों 4:18 रोमियों 4:19 रोमियों 4:20 रोमियों 4:21 रोमियों 4:22 रोमियों 4:23 रोमियों 4:24 रोमियों 4:25



रोमियों 4:19 पर दृश्य-आत्मशिक्षा
पैगंबरों के विश्वास की गाथा में रोमियों 4:19 एक अहम क्षण है। यहाँ पौलुस ईश्वरीय कृपा को दिखाते हैं, जो अविश्वसनीय परिस्थितियों के बावजूद जीवंत रहता है। उस समय अब्राहम की आयु एक असाधारण बात थी—उसने अपने मरे हुए शरीर और सन्तान के गर्भ-शिथिलता को देखते हुए भी आस्था को न डगमगाने दिया।
पद का पाठ और उसका संदर्भ
“वह जो सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जानकर भी विश्वास में निर्बल न हुआ, (इब्रा. 11:11).” यह वाक्य रोमियों के पाठ में अविश्वासी हालात के बीच अटल विश्वास का उदाहरण देता है। ऐतिहासिक संदर्भ में अब्राहम ने बेटे की प्रतीक्षा में अस्थिरताएं देखीं, पर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर नहीं हटा।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्वय और संगत मार्ग
यह verse स्वयं ऐतिहासिक विश्वास-यात्रा का संदर्भ देता है, लेकिन NT में अब्राहम का यह चरित्र उदाहरण बनकर आता है कि किस प्रकार बाइबल-आस्था प्रकृति-परस्त नहीं होती।
अनुवादित उद्धरणों के संकेत
यहां मैथ्यू हार्नी (Matthew Henry), ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) के सार्वजनिक-डायरी घटक से उद्धरण सीधे न हो, पर उनका प्रभाव प्रेरणा देता है। उदाहरणस्वरूप, इन टिप्पणीकारों ने कहा है कि आस्था परमेश्वर के प्रति निर्भय समर्पण है, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। उनके भीतर से “विस्मरण नहीं” वाला आग्रह नज़र आता है—जो अब्राहम के समय में था, वही रोमियों में भी प्रतिध्वनित होता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) रोमियों 4:18-21: अब्राहम के आशा के अभाव में भी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने का उदाहरण—आस्था एक स्पष्ट विश्वास है, न कि धारणा। यह स्पष्ट करता है कि प्रतिज्ञा पर विश्वास में निरन्धरता है।
2) हैब 11:11: इब्रा की तरह पवित्र चरित्र—सत्य के लिए शारीरिक कमी के बावजूद आत्म-विश्वास। यह स्पष्ट कर देता है कि विश्वास समय-सीमा नहीं मानता, यह परमेश्वर की क्षमता की पुष्टि है।
3) बेड़े 4:20-21: आस्था के दृढ़ संकल्प के साथ परमेश्वर पर भरोसा—जो किया गया, वह किया जाएगा, यही प्रेरणा देती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
रोमियों 4:19 प्रेरित करता है कि बायबल-आस्था बाहरी अस्थिरताओं के बीच भी कमजोर नहीं पड़ती। अब्राहम की निश्चय-शक्ति हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर विश्वास रखना ही जीवन-सत्य है। यह आत्मिक दृढ़ता आज भी रोमियों के पाठ में प्रतिध्वनित होता है—विश्वास में निर्बल न होना, भले ही शरीर या गर्भ की स्थिति कैसी भी हो।