Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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रोमियों 4:6 — परमेश्वर के धर्मी ठहराने पर दाऊद की स्तुति
यह पद रोमियोन केletters में आत्म-धारणा के हिस्से के रूप में आता है, जहाँ पवित्र लेखक यह दिखाते हैं कि परमेश्वर धर्मी किसे ठहराता है—वह जिसे विश्वास के कारण न्याय मानता है, कर्म के आधार पर नहीं। दाऊद का संदर्भ उद्धार के इस कानूनन नियम को स्पष्ट करता है: प्रभु विश्वास पर आधारित धारण को स्वीकार करता है और उसे धन्य कहता है।
यथार्थ छवि और इसके पीछे का संदेश
“येसे परमेश्वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है”—यह वाक्य परमेश्वर की कृपा और विश्वासी के विश्वास के बीच के अद्भुत संबंध को उद्घाटित करता है। इसका मतलब यह है कि ईश्वर हमारे प्रयासों, रीति-रिवाजों या क्षमाओं पर नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित हमारे स्थिति को स्वीकारते हैं। इस प्रकार धर्म की परंपरागत मांगों से मुक्त होकर भी हम समान्य जीवन में ईश्वर के साथ न्यायपूर्ण संबंध बना लेते हैं।
जीवनशैली में विश्वास की भूमिका
रोमियों 4 में पवित्र लेखक यह दिखाते हैं कि भले ही अमुक के कर्मों में कमी हो, परन्तु विश्वास से परमेश्वर की कृपा प्राप्त होती है। दाऊद इसका प्रमुख प्रमाण है—उसने विश्वास के कारण धर्मी ठहराए जाने की पुष्टि की, न कि तुरन्त कोई दृश्य कर्म के कारण। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है: सत्य आस्था से जुड़कर ही व्यक्ति ईश्वर के दिव्य योजनाओं में भागीदार बन सकता है।
कुंजी शब्दों की स्पष्ट व्याख्या
संदर्भित और समकलीन शास्त्र
1) पूर्व की चर्चा में अब्राहम के विश्वास को God reckons righteousness apart from works (रोमियों 4 के समान विचार) दिखता है—यह बताता है कि विश्वास कैसे कर्मों से स्वतंत्र होकर उद्धार का मार्ग बनाता है।
2) याकूब की शिक्षाओं से मेल खाने वाला संकेत है कि विश्वास बिना कर्मों के मरा रहता है; यह पाठ एक समन्वय को सामने रखते हुए उसे संतुलित τρόπο से समझाने की कोशिश करता है कि विश्वास और कर्म एक साथ चलते हैं।
3) दाऊद के संदर्भ के साथ पवित्रशास्त्र का यह भाग दिखाता है कि परमेश्वर के आशीर्वाद उन लोगों पर होता है जो उसे विश्वास से पहचानते हैं और उसकी प्रतिज्ञाओं पर भरोसा करते हैं।
आज के लिए अनुप्रयोग
- अपने जीवन में ईश्वर की कृपा को भरोसे के साथ मानें, न कि अपने सामाजिक या धार्मिक प्रदर्शन के आधार पर आत्मसंतोष प्राप्त करें।
- प्रार्थना और विश्वास को दैनिक जीवन के निर्णयों में केंद्र बनाएं; जैसे दाऊद ने विश्वास के साथ ईश्वर को प्रस्तुत किया, हम भी उसी विश्वास से मार्गदर्शन पाएंगे।
- दूसरों के साथ आस्था की राहों में नम्रता और करुणा दिखाएं—क्योंकि परमेश्वर के साथ संबंध विश्वास पर टिके है, न कि श्रेष्ठ कर्मों के तुलना पर।
सूझ-बूझ और उद्धरण (संदर्भित comentarियों के लिए)
यद्यपि इस मंच पर पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं, परन्तु समानानुरूप उच्च विचारों को Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डायप्लाइन टिप्पणीकारियों से लिया गया परंपरागत सार यहाँ जोड़ा गया है।
संकेत: यदि आप इन पुराने टिप्पणीकारों के संपूर्ण विचारों में रुचि रखते हैं, तो वे इस प्रकार के विषयों में आस्था की प्रकृति, परमेश्वर की कृपा, और उद्धार के तरीके पर समान धागों को रेखांकित करते हैं कि विश्वास कैसे कर्मों से पहले आता है और दाऊद के संदर्भ में धन्यत्व की घोषणा होती है।
Cross-references (सार-संबंध):