रोमियों 4:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस कारण, यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।

पिछला पद
« रोमियों 4:21
अगला पद
रोमियों 4:23 »

रोमियों 4:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 4:22 — तत्कालीन संदर्भ और तात्पर्य

पद का सन्निकट सेटिंग: रोमियों के पत्र में पॉल ने आस्तिकता की righteousness को विश्वास के आधार पर समझाने के लिए उद्धार की योजना को दावित किया है। रोम 4 में वह अब्ब्राहम की धर्मसत्ता (धार्मिकता) को उदाहरण बनाकर दिखाता है कि परमेश्वर के वादे के अनुसार धार्मिकता विश्वास से कैसे मिलती है। इस पद में कहा गया है कि यह “उसके लिये धार्मिकता गिना गया”—यानी अब्राहम को उसके विश्वास के कारण धार्मिक माना गया।

यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या बताता है

यह बताता है कि धार्मिकता (धर्मसत्ता) किसी पुरुक्त कर्म से नहीं, बल्कि विश्वास से मापा जाता है। परमेश्वर ने जिसे भरोसे पर रखा, उसे न्यायी माना। अब्राहम ने कर्मों के बजाय परमेश्वर के वादे पर विश्वास किया, इसलिए उसके विश्वास को “धार्मिकता” के रूप में गिना गया। यह सुनिश्‍चित करता है कि उद्धार भीतर से आता है, बाहरी कर्मों के बजाय आस्था पर निर्भर है।

मुख्य शब्दों या चित्रों की व्याख्या

  • रेजिस्ट्री (धार्मिकता गिनना): यहाँ धार्मिकता एक स्थिति है जो परमेश्वर द्वारा स्वीकार की जाती है, न कि मानव के योग्यमान के कारण।
  • विश्वास: विश्वास केवल तथ्यात्मक आस्था नहीं, बल्कि परमेश्वर के वादे पर भरोसा करना और उसे मान लेना है, जो धर्मसत्ता का स्रोत है।
  • अब्राहम का उदाहरण: पुरातन विश्वासियों के लिए प्रेरणा, कि कैसे वादों पर अडिग रहने से धर्मसत्ता मिलती है।

संबद्ध आयतें (संक्षेप में)

• रोम 3–4 में पॉल यह दिखाते हैं कि उद्धार कर्मों से नहीं, बल्कि विश्वास से आता है।

• गलातियों 3 में भी विश्वास बनाम कर्मों का आरम्भिक विवेचन मिलता है कि वादा विश्वासी के लिए है।

• इब्रानियों 11 में विश्वास के पुरखों के अद्भुत कार्यों का उल्लेख है, जिससे विश्वास ही धर्मसत्ता का आधार है।

आज के संदर्भ में व्यावहारिक प्रभाव

आज के विश्वासियों के लिए यह पाठ बताता है कि हमारी पहचान परमेश्वर की वचनबद्धता और यीशु मसीह में विश्वास के कारण ही सुरक्षित है। यह धार्मिकता की दिशा में नया आत्मविश्वास देता है—कर्मों के भार से मुक्त होकर हम प्रत्यक्ष विश्वास के आराधना में आते हैं।

संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस

• रोम 3:28 — इस तथ्य को व्यक्त करता है कि मानव धर्मसत्ता से नहीं, बल्कि विश्वास से गुण-अवगुण की शुद्धि प्राप्त होती है।

• गलातियों 2:16 — कर्मों के विरुद्ध विश्वास पर जोर देता है कि नहीं, बल्कि विश्वास के कारण ही धर्मसत्ता मिलती है।

• हेब्रू 11 — विश्वास के महापुरुषों के इतिहास से प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर के वादे पर दृढ़ विश्वास कैसे रिकॉर्ड होता है।

एकीकरण सार

इस पद से समझ आता है कि धार्मिकता परमेश्वर की कृपा के भरोसे पर निर्भर है। अब्राहम का उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि विश्वास, न कि कर्म, उद्धार का मार्ग है। आज हम अपने जीवन में भी यह सत्य अपनाते हैं: हमारे 근कार, हमारे दायित्व, और हमारी समझ परमेश्वर के वादे पर हमारी सहज निर्भरता से पुष्ट होते हैं।

उद्धरणों के लिए: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो इसे पाठ के अनुरूप संक्षेप में शामिल किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 4:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

रोमियों 4:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
रोमियों 4:6 (HINIRV) »
जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है:

रोमियों 4:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
रोमियों 4:3 (HINIRV) »
पवित्रशास्त्र क्या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।”

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें