Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 4:1 रोमियों 4:2 रोमियों 4:3 रोमियों 4:4 रोमियों 4:5 रोमियों 4:6 रोमियों 4:7 रोमियों 4:8 रोमियों 4:9 रोमियों 4:10 रोमियों 4:11 रोमियों 4:12 रोमियों 4:13 रोमियों 4:14 रोमियों 4:15 रोमियों 4:16 रोमियों 4:17 रोमियों 4:18 रोमियों 4:19 रोमियों 4:20 रोमियों 4:21 रोमियों 4:22 रोमियों 4:23 रोमियों 4:24 रोमियों 4:25



रोमियों 4:7 का संक्षिप्त अर्थ
इस पद का सरल अर्थ है: धर्मीय मनुष्यों के लिए परमेश्वर ने क्षमा का आशीर्वाद कर दिया है; उनके अधर्म दूर हो चुके हैं, और उनके पाप ढांपे गए हैं। यह उद्धार का आधार है कि विश्वास के कारण परमेश्वर हमें न्याय से नहीं, बल्कि दया से देखकर स्वीकार करता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
रोमियों के चौथे चैप्टर में पौलुस यह स्थापित कर रहे हैं कि धर्मधर्मी होने से नहीं, बल्कि ईमान bestellen के कारण विश्वसनीयता मिलती है—जैसे कि अब्राहम पर आस्था की आधारित प्राथना। उस समय यहूदियों के नैतिक कर्मों से उद्धार मान्यता पाने की धारणा के विरुद्ध एक नई दृष्टि है: पाप का क्षमा और ढांपना परमेश्वर की कृपा से है, न कि अच्छी पकड़ या परंपराओं से।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से संक्षिप्त निष्कर्ष
मिश्रित प्रेरणा से एक समन्वयित पाठ यह है कि पापों की क्षमा हमारे उद्धार की शर्त नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा का परिणाम है।
मत्ती हेनरी के संकेत
“धन्य वे हैं” इस दया-स्वर की गहराई को उजागर करता है—जिन्होंने अपनी आपत्तियों को परमेश्वर के साथ बाँधा है, उनके लिए क्षमा उपलब्ध है।
ऐल्बर्ट बार्न्स के संकेत
यह शुद्ध धर्म-संरचना नहीं, बल्कि विश्वास के द्वारा उद्धार का प्रमाण है; अभिशाप से मुक्ति और पाप की ढांपने की गहराई यही दर्शाती है।
एडम क्लार्क के संकेत
पाप के भार को ढंकने का विचारदम यह बताता है कि परमेश्वर न्यायपूर्ण होते हुए भी दयालु है, क्योंकि वह हमारे अधर्म को अपने पुत्र के माध्यम से ढांप देता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संकेत
1) कलीसिया में विश्वास से उद्धार (रोमियों 3:24–25) — विश्वास ही वह मार्ग है जिससे क्षमा और ढांपना प्रकटन पाता।
2) पाप की गहराई और क्षमा का विविध स्वर (याकूब 2:13) — दया के लिए कारण बनती है कि हम नयापन पाते हैं।
3) कर्मों के द्वारा नहीं, वरन् कृपा द्वारा उद्धार (एपेस्सियों 2:8–9) — यह उद्धार के आधार को स्पष्ट करता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
1) स्वयं को परमेश्वर के दया-बंधनों के बाहर नहीं मानना चाहिए—हमारा उद्धार उसकी कृपा पर निर्भर है।
2) भरोसा और पालन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है: विश्वास से क्षमा पाकर, हम अपने पापों से मुक्त जीवन की दिशा में अग्रसर हों।