रोमियों 4:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वरन् हमारे लिये भी जिनके लिये विश्वास धार्मिकता गिना जाएगा, अर्थात् हमारे लिये जो उस पर विश्वास करते हैं, जिसने हमारे प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिलाया।

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रोमियों 4:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 4:24 का संदर्भ और अर्थ

पद_romans 4:24 का मूल विषय है—विश्वास से धर्म्यता स्वीकार की जाती है। प्रेषित पॉल यहाँ व्यावहारिक रूप से यह बतलाते हैं कि जो बहुचर्चित तरीके से विश्वास करते हैं, वही सत्य में ईश्वरीय धर्म को धारण करते हैं। विशेष रूप से वे यह उद्धरित करते हैं कि यीशु मरे हुओं में से जी उठे, ताकि हमारे विश्वास का आधार सुरक्षित हो जाए। इस संदर्भ में पूरक चिंतन यह है कि धर्म्यता केवल एक ज्ञान नहीं, बल्कि विश्वास-प्रत्यय है जो जीवन के हर क्षेत्र में प्रभु की उद्धार-कार्य की मान्यता को दिखाता है।

मुख्य अर्थ

यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि धार्मिकता—यानी परम पिता के लिए प्रिय ठहरना—उनके कारण है जिन्होंने यीशु मरे हुओं में से जिलाया गया है। हम जिस विश्वास को धारण करते हैं, वह उसी ईश्वरीय कृपा का परिणाम है जो यीशु के पुनर्जीवन पर आधारित है। यह नहीं कि हमारी मानवीय अच्छाइयों से धर्म्यता आती है, बल्कि यीशु के कार्य और परमेश्वर की ओर से उसकी पुष्टि से यह प्रदान की जाती है।

मुख्य विषय

  • विश्वास बनाम कर्म: परम धर्म्यता वह है जो विश्वास के द्वारा मिलती है, न कि हमारी सजगता या कर्मों से।
  • यीशु की पुनर्जीवन का महत्त्व: मरे हुओं में से जिलाया गया होना उद्धार की पक्की गारंटी है, जिससे हमारी धार्मिकता के प्रमाण पुख़्ता होते हैं।
  • विश्वास का लक्ष्य: हमारा विश्वास उन पर है जिन्होंने हमारे प्रभु को जी उठाया—यही हमारा स्थिर आधार बनता है।

पारस्परिक संबंध (cross-references)

इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि रोमियों 4:24 कैसे अन्यत्र भी विश्वास-धर्म्यता की कसौटी बनता है:

  • रोमियों 3:28 — “मनुष्य के लिए धर्म्यता विश्वास से ही है, न कि कर्मों से”। यह विचार यहां के तत्व के समान है कि विश्वास-सिद्धि ही धर्म का स्रोत है।
  • 1 कुरिन्थियों 15:17 — अगर मसीह मरे के बाद नहीं जी उठे, तो हमारा विश्वास व्यर्थ होता; यीशु का पुनर्जीवन धर्म्यता के आधार को पुष्ट करता है।
  • गलातियों 2:16 — మనुष्यों के कर्मों से धर्म नहीं मिलता, पर विश्वास के द्वारा ही परमेश्वर की कृपा मिलती है।

व्यावहारिक विचार

इस पद को पढ़ते समय हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि विश्वास एक सक्रिय जीवन की दिशा देता है। यह विश्वास न केवल तीर्थस्थलों या कहानियों तक सीमित है, बल्कि हमारे दैनिक निर्णय—कैसे बोलें, कैसे व्यवहार करें, कैसे दूसरों के साथ प्रेम दिखाएं—इन सभी में प्रकट होता है। यीशु के पुनर्जीवन पर आधारित यह विश्वास हमें आशा देता है कि दुःख-समय में भी ईश्वर हमारी सहायता में है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

रोमियों 4:24 इस बात को पुष्ट करता है कि हमारी धार्मिकता ईश्वर की कृपा और यीशु मसीह के मरना-जी उठना में निहित विश्वासी विश्वास से आती है। यह उद्धार का केंद्र है—विश्वास जो हमारे लिए भी धर्म्यता गिनाए जाने का रास्ता बनता है, यदि हम उसी पर विश्वास करें जिसने हमारे प्रभु यीशु को मृतों में से जिलाया।

संकेतित मार्गदर्शक उद्धरण (नोट्स)

ऐतिहासिक टीका-स्वरूपों से मिलते कुछ सार – Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—यहां संक्षेप में उनके विचारों के संकेत दिए गए हैं, ताकि पाठक परिलक्षित हो सके कि विश्वास के कारण धर्म्यता कैसे स्थापित होती है। चर्चित उद्धरणों का पूर्ण टेक्स्ट नीचे उद्धृत नहीं किया गया है, परन्तु अगर आवश्यक समझी जाए, तो वे अतीत के चिंतकों के सामान्य विवेचन के अनुरूप हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 4:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रेरितों के काम 2:24 (HINIRV) »
परन्तु उसी को परमेश्‍वर ने मृत्यु के बन्धनों से छुड़ाकर जिलाया: क्योंकि यह अनहोना था कि वह उसके वश में रहता। (2 शमू. 22:6, भज. 18:4, भज. 116:3)

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1 पतरस 1:21 (HINIRV) »
जो उसके द्वारा उस परमेश्‍वर पर विश्वास करते हो, जिसने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी कि तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्‍वर पर हो।

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मरकुस 16:16 (HINIRV) »
जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा।

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