Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 4:1 रोमियों 4:2 रोमियों 4:3 रोमियों 4:4 रोमियों 4:5 रोमियों 4:6 रोमियों 4:7 रोमियों 4:8 रोमियों 4:9 रोमियों 4:10 रोमियों 4:11 रोमियों 4:12 रोमियों 4:13 रोमियों 4:14 रोमियों 4:15 रोमियों 4:16 रोमियों 4:17 रोमियों 4:18 रोमियों 4:19 रोमियों 4:20 रोमियों 4:21 रोमियों 4:22 रोमियों 4:23 रोमियों 4:24 रोमियों 4:25



रोमियों 4:14 पर केंद्रित उद्घोषणा
मुख्य निष्कर्ष– यदि गैर-व्यवस्थावाले भी वारिस होंगे, तो धर्मपूर्वक विश्वास व्यर्थ और प्रतिज्ञा निष्फल हो जाएगी; क्योंकि परमेश्वर की प्रतिज्ञा और व्यवस्था के स्पष्ट प्रभाव, दोनों केवल विश्वास के द्वारा सच होते हैं। इस पद में पवित्र वचन यह दिखाते हैं कि निर्बलों के लिए भी, परमेश्वर की योजना के कारण, विश्वासी होने की रीढ़ विश्वास है, न कि कर्मों का प्रतिशोधी मूल्यांकन।
साहित्यिक संदर्भ और संदर्भ-आलेख
पश्चिमी NT की कथा-वस्तु में रोमियों का पत्र विशेषकर यह बताता है कि ईश्वर की धरोहर, अभिषेक और भू-सम्पदा का अधिकार सतह पर कर्म नहीं, बल्कि विश्वास से मिलते हैं। 4:14 कहता है कि यदि व्यवस्था-धारियों (विधियों के अनुयायियों) का वारिस होना संभव होता, तो विश्वास निरस्त होता और प्रतिज्ञा निष्फल। लेखक एक बार फिर यह स्थापित कर रहा है कि परमेश्वर के वचन और प्रतिज्ञाएं उनके आशीष के आधार पर पूरी होती हैं, जो विश्वास में समझी और स्वीकार की जाती हैं।
पाठ-आख्यान और थ्योलॉजिकल संकेत
प्रस्तावना यह है कि परमेश्वर की वादा-योजना अब्ब्राहम के धैर्य और विश्वास के साथ जुड़ी है। धर्मपूर्वक कर्म-आधारित अधिकार से उक्त धरोहर मिलना संभव नहीं; बल्कि विश्वासी बनना और ईमानदारी से परमेश्वर पर भरोसा करना ही मार्ग है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि चिह्नित कानून की कड़ी-नियमावली भीतर भी विश्वास से ही न्याय तृप्त होता है, न कि कर्म-योग से।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संयुक्त पाठ-संवाद)
इन संदर्भों में एक ही धुरी बार बार उभरती है: विश्वास वेत्ता से परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप वारिसत्व देता है, कर्म-आधारित व्यवस्था नहीं।
आत्मिक प्रश्न (Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 4:14 बताता है कि प्रतिज्ञाओं की वास्तविक सुरक्षा विश्वास में है, न कि किसी के कर्म-आधारित अधिकार में। यह Paul के उद्देश्य को पुष्ट करता है कि समय से पहले दी गई वादों का पूर्ण-त्व विश्वासी के भरोसे से ही होता है। एक पूर्ण जीवित विश्वास परमेश्वर की योजना को आगे बढ़ाता है, और वही धरोहर है जिसे हमें संरक्षित रखना है।
ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के सारणियों से कुछ क्षणिक उद्धरण: Matthew Henry ने लिखा है कि “विश्वास से ही अभिषेक होता है; कर्म से नहीं।” Albert Barnes ने कहा है कि प्रतिज्ञाओं का लाभ तभी मिलेगा जब हम उनके अनुसार जीएँ। Adam Clarke ने स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार वारिस बनने का विचार केवल विश्वास के बिन कठिन है।