रोमियों 4:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि यदि व्यवस्थावाले वारिस हैं, तो विश्वास व्यर्थ और प्रतिज्ञा निष्फल ठहरी।

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रोमियों 4:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 4:14 पर केंद्रित उद्घोषणा

मुख्य निष्कर्ष– यदि गैर-व्यवस्थावाले भी वारिस होंगे, तो धर्मपूर्वक विश्वास व्यर्थ और प्रतिज्ञा निष्फल हो जाएगी; क्योंकि परमेश्वर की प्रतिज्ञा और व्यवस्था के स्पष्ट प्रभाव, दोनों केवल विश्वास के द्वारा सच होते हैं। इस पद में पवित्र वचन यह दिखाते हैं कि निर्बलों के लिए भी, परमेश्वर की योजना के कारण, विश्वासी होने की रीढ़ विश्वास है, न कि कर्मों का प्रतिशोधी मूल्यांकन।

साहित्यिक संदर्भ और संदर्भ-आलेख

पश्चिमी NT की कथा-वस्तु में रोमियों का पत्र विशेषकर यह बताता है कि ईश्वर की धरोहर, अभिषेक और भू-सम्पदा का अधिकार सतह पर कर्म नहीं, बल्कि विश्वास से मिलते हैं। 4:14 कहता है कि यदि व्यवस्था-धारियों (विधियों के अनुयायियों) का वारिस होना संभव होता, तो विश्वास निरस्त होता और प्रतिज्ञा निष्फल। लेखक एक बार फिर यह स्थापित कर रहा है कि परमेश्वर के वचन और प्रतिज्ञाएं उनके आशीष के आधार पर पूरी होती हैं, जो विश्वास में समझी और स्वीकार की जाती हैं।

पाठ-आख्यान और थ्योलॉजिकल संकेत

प्रस्तावना यह है कि परमेश्वर की वादा-योजना अब्ब्राहम के धैर्य और विश्वास के साथ जुड़ी है। धर्मपूर्वक कर्म-आधारित अधिकार से उक्त धरोहर मिलना संभव नहीं; बल्कि विश्वासी बनना और ईमानदारी से परमेश्वर पर भरोसा करना ही मार्ग है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि चिह्नित कानून की कड़ी-नियमावली भीतर भी विश्वास से ही न्याय तृप्त होता है, न कि कर्म-योग से।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संयुक्त पाठ-संवाद)

  • गलाती 3:29 – जो मसीह में हो, वे आबराम के वंशज हैं और परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के अनुग्रह में भागीदार होंगे; यह दिखाता है कि विश्वास से ही वारिसत्व संभव है।
  • हेब्रू 6:12 – न कि उकसाने वाले कर्मों से भरे न हों, परन्तु धैर्य और विश्वास के साथ प्रतिज्ञाओं का भागीदार बनें; इस से यह स्पष्ट होता है कि प्रतिज्ञाओं का लाभ विश्वास पर निर्भर है।
  • याकूब 2:22 – विश्वास के साथ कर्मों का संगम, जो दिखाता है कि विश्वास अकेला फलित होता है, बिना कर्मों के नहीं; यह रोमियों 4 के विचारों के साथ अंतःस्थापन बनता है।

इन संदर्भों में एक ही धुरी बार बार उभरती है: विश्वास वेत्ता से परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप वारिसत्व देता है, कर्म-आधारित व्यवस्था नहीं।

आत्मिक प्रश्न (Reflection)

  1. क्या आप अपने जीवन में किसी ऐसे क्षेत्र को पहचानते हैं जहाँ आप कर्मों के भरोसे आगे बढ़ना चाह रहे थे? विश्वास कैसे उसे बदल सकता है?
  2. क्या आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को केवल तर्क से नहीं, बल्कि भरोसे से स्वीकार करते हैं?
  3. कैसे आप अपनी दैनिक परिस्थिति में विश्वास के उद्गार को देखते हैं—यानी परमेश्वर के वचन के अनुसार कदम उठाना?

संक्षिप्त निष्कर्ष

रोमियों 4:14 बताता है कि प्रतिज्ञाओं की वास्तविक सुरक्षा विश्वास में है, न कि किसी के कर्म-आधारित अधिकार में। यह Paul के उद्देश्य को पुष्ट करता है कि समय से पहले दी गई वादों का पूर्ण-त्व विश्वासी के भरोसे से ही होता है। एक पूर्ण जीवित विश्वास परमेश्वर की योजना को आगे बढ़ाता है, और वही धरोहर है जिसे हमें संरक्षित रखना है।

ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के सारणियों से कुछ क्षणिक उद्धरण: Matthew Henry ने लिखा है कि “विश्वास से ही अभिषेक होता है; कर्म से नहीं।” Albert Barnes ने कहा है कि प्रतिज्ञाओं का लाभ तभी मिलेगा जब हम उनके अनुसार जीएँ। Adam Clarke ने स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार वारिस बनने का विचार केवल विश्वास के बिन कठिन है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 4:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु यदि उसका पति उसकी मन्नत आदि सुनकर उसी दिन पूरी रीति से तोड़ दे, तो उसकी मन्नतें आदि, जो कुछ उसके मुँह से अपने बन्धन के विषय निकला हो, उसमें से एक बात भी स्थिर न रहे; उसके पति ने सब तोड़ दिया है; इसलिए यहोवा उस स्त्री का वह पाप क्षमा करेगा।

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वह समय आया है, कि यहोवा काम करे, क्योंकि लोगों ने तेरी व्यवस्था को तोड़ दिया है।

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