Old Testament
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रोमियों 4:1 रोमियों 4:2 रोमियों 4:3 रोमियों 4:4 रोमियों 4:5 रोमियों 4:6 रोमियों 4:7 रोमियों 4:8 रोमियों 4:9 रोमियों 4:10 रोमियों 4:11 रोमियों 4:12 रोमियों 4:13 रोमियों 4:14 रोमियों 4:15 रोमियों 4:16 रोमियों 4:17 रोमियों 4:18 रोमियों 4:19 रोमियों 4:20 रोमियों 4:21 रोमियों 4:22 रोमियों 4:23 रोमियों 4:24 रोमियों 4:25



रोमियों 4:3 पर निष्कर्षीय अर्थ
सीधा अर्थ: पवित्र शास्त्र कहता है कि अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यही विश्वास उसके लिए धर्म माना गया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
रोमियों का यह भाग नीतिगत सिद्धांतों को स्पष्ट करता है कि धम्मियाँ नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा से धर्मशीलता मिलती है: जिस प्रकार अब्राहम ने परमेश्वर की वाणी पर विश्वास किया, उसी प्रकार विश्वास परमेश्वर के साथ संबंध स्थापित करता है। रोमियों 4 में पवित्रता की यह राह पुरानी व्यवस्था के अनुयायों के साथ-साथ गैर-यहूदियों के लिए भी खुली बताई गई है: कर्मों के बजाय विश्वास के कारण प्रभु धर्म देता है।
Interpretive observations
- अब्राहम का विश्वास क्रिया-रहित नहीं था, वह भरोसा था कि परमेश्वर वही करेगा जो उसने कहा है। इस विश्वास में चरितार्थ एक भरोसा है कि परमेश्वर अपनी वादाओं को पूरा करेगा।
- धर्म यहाँ एक तर्क नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ संबंध की व्यवस्था है। धर्म गिना जाना तभी संभव है जब उस व्यक्ति के भीतर परमेश्वर के वचन के प्रति भरोसा स्थिर रहता है।
- प्रेरित पतरस के शब्दों के प्रावर्तन के अनुसार, धर्म केवल धार्मिक कर्मों की योग्यता नहीं, बल्कि ईमानदार विश्वास के साथ परमेश्वर के साथ जीवन-सम्बन्ध है।
कथनात्मक निष्कर्ष (themes)
Cross-references (संक्षेप स्पष्टीकरण)
• कानून और धर्म का परस्पर संबंध: आग्रहीत विचार: रोमियों 3–4 में चर्चा है कि धर्म का औचित्य विश्वास पर निर्भर है, न कि कर्मों पर। यह विचार गलातियों 3 के संदर्भ से जुड़ता है कि विश्वास में प्रवेश परमेश्वर की कृपा से संभव है।
• विश्वासी की उद्धारक स्थिति: गायभक्तों के लिए रोमियों 4:3 से प्रेरणा मिलती है कि आस्तियों के प्रभाव से नहीं, विश्वास के कारण धर्मस्वरूप उद्धार होता है।
• समानता और सहज प्रवेश: गैर-यहूदियों के लिए भी यह रास्ता खुला है—एपेसियों 2 के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि विश्वास से नई Crete मिलती है।
Historical commentaries का संकलन (संक्षेप)
मैथ्यू हैनरी के अनुसार, यह दर्शाता है कि धर्म व्यक्तियों के भीतर परमेश्वर की निष्ठा को मान्यता देता है, न कि बाहरी कर्मों को।
एलबर्ट बार्न्स के अनुसार, धर्म का यह गहरा अर्थ है कि विश्वासी के भीतर परमेश्वर का निष्ठ्रय विश्वास है, जो कानून के कसौटियों से परे है।
एडम क्लार्क के अनुसार, आश्वासन और विश्वास के मेल से ही धर्म गिना जाता है—यही परमेश्वर की प्रमाणिकता का वर्णन है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
1) अपने जीवन के निर्णयों में कर्मों के बजाय परमेश्वर के वचन पर भरोसा रखें।
2) कठिन समय में भी परमेश्वर की वादाओं पर स्थिर रहें, क्योंकि भरोसा उससे जुड़ा है जो सच्चा है और कभी नहीं टलता।
3) समुदाय के भीतर यह बुझाइए कि धर्मभाव सिर्फ धार्मिक क्रियाओं का नहीं, बल्कि विश्वासी के दिल से परमेश्वर के साथ संबंध का फल है।
नोट: नीचे उद्धरणों के लिए स्पष्ट स्रोत हैं—«अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया»—यह पाठ्य पंक्ति सीधे रोमियों 4:3 से है।