रोमियों 4:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक़ समझा जाता है।

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रोमियों 4:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 4:4 — पथ्रियां की मजदूरी उद्धत नहीं, दान माना जाएगा

इस पद का संदर्भ Romans 4 में विश्वास की राह बनाम कर्म-प्रधान धर्म पर विचरण करता है।पौलुस दिखाते हैं कि ईश्वर के सामने कर्म का योग भले ही स्पष्ट हो, परन्तु "काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं" — यह हमारे परमेश्वर के न्याय के स्वरूप का गहरा तथ्य है। यहाँ दान अर्थात् कृपा-आधारित च repayment नहीं, बल्कि क्रिया-स्वरूप नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित आराधना का परिणाम है।

पाठ का तात्पर्य: परमेश्वर के धर्म में विश्वास की जगह

कहने का अभिप्राय यह कि ईश्वर के साथ संबंध जन्म से पहले की तिथि-ता नहीं मांगे जाते; न ही मुझे अपने कर्मों से योग्यता प्राप्त करनी होती है। तू भगवान पर विश्वास करे, जो मृत को जी उठाने में समर्थ है, और यही विश्वास तुला-तुल्य समझा जाएगा। “मजदूरी” यहाँ एक विशिष्ट मानक के रूप में है—उस प्रकार का वेतन जो कर्म के अनुसार दिया जाता है, न कि कृपापूर्णता के कारण। रोम 4 संदर्भ में, परमेश्वर ने अभिमानी कर्मों के बंधन के बिना—विश्वास को सार समझाया है।

की शब्दावलियाँ और चित्रण

  • मजदूरी बनाम दान: मेहनत के बदले मिलने वाला भुगतान मानव-व्यवहार की संरचना है; जबकि परमेश्वर की कृपा वह दृष्टि है जो विश्वास के द्वारा स्वीकार की जाती है।
  • हक़ समझा जाता है: यहाँ ‘हक’ उस व्यक्तिगत स्थिति को दर्शाता है जिसमें ईश्वर के प्रति विश्वास की निर्भरता रेखांकित होती है—निर्धारित वेतन नहीं, बल्कि आशीष भरा आभार।

अन्य प्रत्यक्ष संदर्भ (cross-references)

1) फटकते हुए विश्वास और कर्म के संबंध को स्पष्ट करने वाले अन्य स्थल: याकूब 2:14-26 में Faith without works का संबंध। यह दिखाता है कि विश्वास वास्तविक प्रस्तुति तभी फल देता है जब आचरण में भी परिलक्षित हो।

2) एफिसियों 2:8-9 में दिखता है कि उद्धार कृपा से है, न कि हमारे कर्मों से—ताकि कोई boasting न करें; यह भी रोमियों 4 के विपरीत नहीं, बल्कि एक ही सत्य के पहलू की पुष्टि है।

3) गलातियों 3:11 में स्पष्ट है कि धर्म केवल विश्वास से जाता है, कर्म से नहीं—ताकि लोग कर्म-गणना द्वारा नहीं, बल्कि विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरें।

इतिहास-आधार: प्रसिद्ध टिप्पणियाँ

यह पंक्ति पाठकों को जिन पुराने विचारधाराओं से जोड़ती है, वे हैं—

  • Matthew Henry: कर्म के भुगतान का सिद्धांत यहाँ एक प्रेरक चेतावनी है कि कृपा की स्थिति मानव-उद्धार के लिए स्वयं के तर्क से ऊपर है; विश्वास ही अनुचित boasting से बचाता है।
  • Albert Barnes: यह स्पष्ट करता है कि दान और वेतन के बीच का अंतर ईश्वर की दया और मुक्त उपहार में है; विश्वास वह माध्यम है जिससे व्यक्ति ईश्वर के न्याय को स्वीकार करता है।
  • Adam Clarke: यह प्रकरण दिखाता है कि उद्धार का स्रोत कर्म-योग नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और विश्वास की प्रतिक्रिया है; यह उन लोगों के लिए भी राहत है जो खुद को योग्य नहीं पाते।

इन टिप्पणियों के साथ संहिता में यह नियम निहित है कि उद्धार और आशीष क्रिया-स्वरूप नहीं, बल्कि विश्वास के द्वारा है।

आज के जीवन में लागू करें

- विश्वास को पहले रखें: अपने कर्मों से पूर्व, भगवान की कृपा को मानें और उस पर भरोसा करें कि उद्धार एक अनुग्रह है।

- दायित्व बनाम आभार: यदि आप किसी परमेश्वर के साथ संबंध बनाते हैं, तो यह जान लें कि आपका आशीर्वाद कर्मों के भुगतान से नहीं, बल्कि विश्वास के परिणामस्वरूप है।

- निष्कपटता और नम्रता: अपने आप को श्रेष्ठ मानना हाराम है; दया और कृपा के लिए खुले रहें, ताकि परमेश्वर की कृपा आपके जीवन में फल दे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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“स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सवेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए।

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