Old Testament
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प्रत्यक्ष अर्थ
रूमियों 4:21 का सरल आशय यह है कि अभ्रष्ट विश्वास ने यह दृढ़ मान लिया कि परमेश्वर अपनी बनाई हुई वाचा को पूरा करने में सक्षम है। यह विश्वास केवल आशा नहीं, बल्कि परमेश्वर के स्वरूप और उसकी वचन-बद्धता पर निर्भरत्व का उघोष है।
प्रसंगात्मक पृष्ठभूमि
पौलुस पवित्र शास्त्र में अब्राहम के उदाहरण का उपयोग कर रहे हैं ताकि दिखा सकें कि धर्म-न्याय (righteousness by faith) के सिद्धांत का आधार क्या है। सन्दर्भ में (रोमियों 4:18–25) बताया गया है कि भौतिक असंभवताओं के बीच भी अभ्रष्ट ने वादा सुना और विश्वास रखा। वचन यहाँ यह संकेत देता है कि धार्मिक विश्वास का उद्देश्य परमेश्वर की क्षमताओं और वादों पर टिके रहना है, न कि केवल मानवीय प्रयासों पर।
व्याख्यात्मक अवलोकन
1) "निश्चय जाना" — यह दृढ़ निश्चय और अटल विश्वास को दर्शाता है, जो अनुमानिक या सशंकित नहीं है।
2) "जिस बात की उसने प्रतिज्ञा की है" — यहां संदर्भ वादे की ओर है जो परमेश्वर ने अभ्रष्ट को दिया था; वह वादा समय और परिस्थितियों से परे टिकता है।
3) "पूरा करने में भी सामर्थी है" — शब्द "सामर्थी" परमेश्वर की अखण्ड शक्ति और वचन के भरोसे को रेखांकित करता है। यह मनुष्य के विश्वास को स्व-सिद्ध नहीं मानता परन्तु उसे परमेश्वर की कार्य-शक्ति में लगाता है।
थीमैटिक सूची (संक्षेप)
संबंधित पद और संक्षिप्त व्याख्या
इब्रानियों 11:11–12 — यह परमेश्वर की वचन-पूर्ति के कारण आशा और प्रसूत कथन का उदाहरण देता है; यहाँ भी विश्वास को परिणामस्वरूप परमेश्वर की सामर्थ्य से जोड़ा गया है।
2 कुरिन्थियों 1:20 — उस संदर्भ में कहा गया है कि परमेश्वर के हर वचन में "हाँ" और "आमीन" हैं; यह रोमियों के विचार को पुष्ट करता है कि वचन की सत्यता पर भरोसा किया जा सकता है।
याकूब 2:21–23 — यहाँ अवलोकन मिलता है कि अभ्रष्ट का विश्वास कर्मों से सिद्ध हुआ; रोम में वही विषय विश्वास की प्रमाणिकता पर प्रकाश डालता है।
हाथ की टिप्पणियाँ (थोड़ा उद्धरण)
मैथ्यू हेनरी के शब्दों में, "faith trusted in God, and rested in God" — यह छोटा उद्धरण विश्वास की विश्राम-भरी प्रकृति को संक्षेप में बतलाता है।
अल्बर्ट बार्न्स ने लिखा है कि यह पद "shows the confidence of Abraham" — इसका आशय है कि याक्ति परमेश्वर पर पूरा भरोसा दर्शाती है।
कुशल सारांश और उपयोगी निष्कर्ष
रोमियों 4:21 सिखाता है कि ईश्वर के वादे पर रखा गया विश्वास केवल भावनात्मक आशा नहीं, बल्कि परमेश्वर की स्वभावगत सामर्थ्य पर आधारित दृढ़ विश्वास है। इतिहास में अभ्रष्ट का उदाहरण यह दर्शाता है कि जीवन की असंभवताओं के बीच भी परमेश्वर की वचन-पूर्ति पर आशा रखी जा सकती है।
व्यावहारिक रूप से, यह पद हमें याद दिलाता है कि कठिन समय में भी हमें परमेश्वर के वादों पर टिककर धैर्यधारण करना चाहिए और अपनी सीमाओं के बजाय उसकी काबिलियत में भरोसा करना चाहिए।