Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 4:1 रोमियों 4:2 रोमियों 4:3 रोमियों 4:4 रोमियों 4:5 रोमियों 4:6 रोमियों 4:7 रोमियों 4:8 रोमियों 4:9 रोमियों 4:10 रोमियों 4:11 रोमियों 4:12 रोमियों 4:13 रोमियों 4:14 रोमियों 4:15 रोमियों 4:16 रोमियों 4:17 रोमियों 4:18 रोमियों 4:19 रोमियों 4:20 रोमियों 4:21 रोमियों 4:22 रोमियों 4:23 रोमियों 4:24 रोमियों 4:25



रोमियों 4:9 का immediate setting
पद 9 में पॉल यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या यह धन्य वचन सिर्फ खतनावालों के लिए है या खतनारहितों के लिए भी। वह कहता है कि अब्राहम के लिए उसका विश्वास धार्मिकता गिना गया, न कि कर्मों के कारण बल्कि विश्वास के कारण। यह विचार रोमियों 4 अध्याय में यह स्थापित करता है कि धर्मार्थता — या धार्मिकता — विश्वास में आकर माना जाता है, न कि केवल परंपरागत नियमों के पालन या चढ़ाव-चढ़ाव से।
ईश्वर@विश्वास का यह सिद्धांत
इस वचन के अनुसार ईश्वर ने धार्मिकता को कर्मों के बजाय विश्वास की गिनती से मापा है। इसका अर्थ है कि पापी भी यदि विश्वास के साथ ईश्वर की तलास में आता है, तो वह धार्मिकता का लाभ पा सकता है। अब्राहम का उदाहरण यह दिखाता है कि वचन के अनुसार विश्वास वैध है, और उसे धार्मिकता के समान माना गया। यह निजी, निज-सम्बन्धी आस्था है जो इतिहास के प्रमुख उद्धरणों से समुदाय-आस्था को मजबूत बनाती है।
शब्दार्थ और imagery
“धन्य वचन” वह घोषणा है जो विश्वास की राह पर चलने वालों के लिए है। “खतनावाला” और “खतनारहित” शब्दार्थ इस बात को स्पष्ट करते हैं कि कौन-सी स्थिति में धार्मिकता गिनी जाती है—यह केवल जन्म या जन्मजात स्थिति नहीं बल्कि विश्वास के चुनाव से जुड़ा है। “धार्मिकता गिना गया” एक आध्यात्मिक लेखा-जोखा है, जिसमें ईश्वर ने आस्तिक के विश्वास को अपनाकर उसे औचित्य का दर्जा दिया।
सम्बन्धी आयतें
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि धार्मिकता का दर्जा कर्म से नहीं, विश्वास से जुड़ा है, और यह नियम-आधारित जीवन के बाहर भी उपलब्ध है।
प्रौद्योगिकता और today के लिए आवेदन
आज के विश्व में यह शाब्दिक निष्कर्ष प्रवाहित होता है कि धार्मिकता एक व्यक्ति-आस्था का परिणाम है न कि सामाजिक स्थिति या जन्म से। किसी भी नस्ल, जाति, या वर्ग के बावजूद यदि ईश्वर के साथ विश्वास बना रहे, तो वह धार्मिकता की स्थिति में आ सकता है। यही वजह है कि चर्च अपने प्रमुख संदेश को “विश्वास” और “ग्रहण” पर केंद्रित करता है—ईश्वर के वचन पर भरोसा ही जीवित धार्मिकता को जन्म देता है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (public-domain टिप्पणीकारों से)
एडम क्लार्क, एलबर्ट बार्न्स, मैथ्यू हेनरी के रिकॉर्डेड विचारों में यह सार मिलता है: विश्वास के द्वारा धार्मिकता गिनी जाना—स्वीकार्यता की यह व्यवस्था परमेश्वर की ओर से है, और इसे मानव कर्मों से नहीं मापा गया। (नोट: नीचे उद्धृत लघु-उद्धरण केवल संकेतात्मक हैं; पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।)
क्लार्क का संकेत: “विश्वास ही धार्मिकता के लिए प्रमाण है; कर्मों का वजन नहीं।” (सारांश)
हेनरी का संकेत: “धर्म के मार्ग में विश्वास ही प्रमुख आधार है; जन्म या कर्तव्य नहीं।” (सारांश)
बार्न्स का संकेत: “अब्राहम का विश्वास धार्मिकता माने जाने वाला प्रमाण है।” (सारांश)