यशायाह 7:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए प्रभु यहोवा ने यह कहा है कि यह युक्ति न तो सफल होगी और न पूरी।

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यशायाह 7:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ की पुष्टि

यशायाह 7:7 में कहा गया है कि प्रभु यहोवा यह कहते हैं कि यह योजना न सफल होगी और न पूरी होगी। यह संदेश आसन्न खतरे के बीच उनके जोखिमपूर्ण युक्तियों के विरुद्ध ईश्वर की नियत को दर्शाता है।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह वाक्य यशायाह के समय के ऐतिहासिक परिदृश्य से जुड़ा है जब साम्राज्य इस्राइल/युद्घ का सपना देख रहा था। असूर का उदय और आस्तिक शासन की अस्थिरता राष्ट्रों के बीच अस्थिरताओं को और बढ़ा रही थी। अरब और इस्राइल के संघ के साथ यहूदा के राजा आवास के भीतर कुछ राजनीतिक योजनाओं पर बहस चल रही थी। परमेश्वर के दूत से यशायाह को एक संकेत मिला था कि इन योजनाओं का परिणाम शांतिकाल नहीं बल्कि विपत्ति होगी; अतः यह घोषणा श्रोताओं को यह समझाने के लिए है कि परमेश्वर की योजना मनुष्य की सूझ-बूझ से ऊपर है।

मुख्य interpretive observations (सार)

  • ईश्वर की योजना सर्वोपरि: मानवयोजना कितनी भी सुदृढ़ क्यों न दिखे, परमेश्वर के नियत से विपरीत नहीं चल सकती।
  • आत्मविश्वास बनाम आस्था: नीतिगत योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय परमेश्वर की दिशा-निर्देश को मानना चाहिए।
  • तार्किक बाधाएं नहीं रोकतीं: जो कुछ भी पृथ्वी में चलता है, उसका आधार परमेश्वर के विधान पर है; उसका उद्देश्य अंततः ईश्वरीय श्रेष्ठता को प्रदर्शित करना है।

थीम से जुड़ी संक्षिप्त सूची

  • विश्वास बनाम डर: ईश्वर पर भरोसा रखें, क्योंकि उसकी योजना मानव योजनाओं से बड़ी है।
  • कठिन समय में भी सुरक्षा का स्रोत: परमेश्वर की प्रेरणा से ही सच्चा शांति मिलती है।
  • नयी दिशा की आवश्यकता: मानव दृष्टिकोण से भटकने पर भी ईश्वर अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाकर उद्धार की जड़ देता है।

अन्य विवरण और क्रॉस-रेफरेंसेस

क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर द्वारा कहे गए "न यह युक्ति सफल होगी" जैसे शब्द अतीत में भी बार बार दर्शन कराते हैं कि लोगों के राजनीतिक उपाय कितनी भी ऊँची सूझ क्या, परमेश्वर के निर्देश नहीं बदला करते।

यशायाह 7:9 के अंतिम भाग में वर्णित आशुवाद भी यह बताता है कि यदि विश्वास न हो तो विपरीत परिणाम मिलते हैं; परन्तु जो परमेश्वर के साथ हैं, वे उसकी शक्ति से समर्थ रहते हैं।

यशायाह के अन्य उद्धारणों में दया, न्याय और प्रत्यक्ष हामीदारी के साथ ईश्वर की सुरक्षा का पाठ मिलता है।

व्यावहारिक प्रेरणा

इस वाक्य के निष्कर्ष से हम सीखते हैं कि समय के राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भी हमें परमेश्वर पर निर्भर रहना चाहिए। अपनी योजनाओं को परमेश्वर के प्रकाश में जाँचें और यह पूछें: क्या यह मेरी आत्मा को विश्वास के मार्ग पर ले जाता है या भय और अहंकार को बढ़ावा देता है?

उद्धरण नोट

इस पंक्ति के लिए यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट वाक्यों को देखना चाहें, तो उनके प्रमुख विचार यह रहे कि ईश्वर की योजना मानव युक्तियों से ऊपर है और उसका उद्देश्य उद्धार और सुरक्षा है। नीचे उनके शब्दों के संक्षेपित निष्कर्ष मिलते हैं:

नोट: यहाँ केवल उनके संक्षिप्त इनसाइट्स प्रयोग में लाए गए हैं; पूरा उद्धरण नहीं दिया गया है।

कुल मिलाकर निष्कर्ष

यशायाह 7:7 यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने समय में सत्ता-प्रधान रहता है और मानव जो भी योजना बनाएं, उसे उसकी योजना की सीमाओं के भीतर रखना पड़ता है। इसकेThat context में, विश्वास के साथ कदम उठाने और ईश्वर की दिशा को मानने की आवश्यकता है, ताकि उनकी सुरक्षा और उद्धार काम आए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 7:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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