यशायाह 7:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और जितने पहाड़ कुदाल से खोदे जाते हैं, उन सभी पर कटीले पेड़ों के डर के मारे कोई न जाएगा, वे गाय-बैलों के चरने के, और भेड़-बकरियों के रौंदने के लिये होंगे।

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यशायाह 7:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 7:25 का संदर्भ-परिदृश्य और आध्यात्मिक अर्थ

परिस्थितियों का परिचय: यशायाह 7 में आशीर के राजा अहाज के समय यूनानी-नीति और आसन्न खतरे के बीच ईश्वर के बारे में परमप्रभु के संकेत दिये जाते हैं। यह आयत पहाड़ों को खोद कर कटीले पेड़ों के डर से किसी भी स्थान पर चरने-चरण करने के न होने की बात कहती है। यहाँ यह देखने को आता है कि लोग तब भागते या छिपते हैं जब असुरक्षा का भार बढ़ता है, पर यह पंक्ति परमेश्वर की योजना के साथ जुड़ी है कि भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी अनिश्चित हों, शासन और नियंत्रण उसका है।

देवता के बारे में पाठ से मिलने वाला संदेश

यह आयत विश्वास की दृष्टि का स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करती है कि ईश्वर अपने लोगों के संरक्षण के लिए एक व्यवस्था बनाते हैं। जब देश危र (युद्ध के खतरे) सामने होते हैं, तो वे भी उनके लिए सुरक्षित मार्ग बनाने का काम करते हैं—यह दिखाता है कि परमेश्वर निर्बलता में भी शक्ति देता है, भय के स्थान पर कदम-कदम पर मार्ग दिखाता है। साथ ही इसका संकेत है कि परमेश्वर के कार्य में मानव प्रयासों का होना जरूरी है पर अंततः उसकी योजना सर्वोपरि रहती है।

महत्वपूर्ण शब्द और imagery की स्पष्टता

“जितने पहाड़ कुदाल से खोदे जाते हैं” यह संभवतः एक विस्मय-भरा शब्द-चित्र है। पहाड़ों को खोदना और “कटीले पेड़ों” का डर यह दर्शाते हैं कि प्राकृतिक वस्तुएँ भी युद्ध-यातना से अस्थिर हो सकती हैं; फिर भी यह सारे दृश्य एक divine योजना की सीमाओं में समायोजित होते हैं ताकि चरना-रहन का साधन, भूमि की देह-उद्धार, बना रहे। बारीकी से देखें तो यह बताता है कि भय केवल मन के नहीं, बल्कि बाह्य परिस्थितियों के साथ भी जुड़ा है; पर परमेश्वर के साथ स्थिति पलट सकती है।

अन्य उद्धरणात्मक चर्चित विचार

यहां शिक्षा के लिए तीन प्रमुख पारिभाषिक विचारधाराएँ उद्धृत हैं जो पुराने टिप्पणियों में प्रतिफलित रहे हैं:

  • मैथ्यू हेनरी: परमेश्वर का संरक्षण असुरक्षा की स्थिति में भी प्रकट होता है, ताकि विश्वासी अपने भाग्य और सुरक्षा पर निर्भर रहें।
  • आल्बर्ट बार्न्स: भय के समय परमेश्वर का संकल्प और सुरक्षा-योजना एक विवेचित आशीर्वाद के रूप में प्रकट होता है।
  • एडम क्लार्क: स्थिति चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो, परमेश्वर के निर्देश और संकल्प से मार्ग मिलता है—भय कम होता है और विश्वास उन्नत होता है।

इन उद्धृत विचारों के संकलन से स्पष्ट होता है कि परिस्थिति चाहे कितनी भी कठिन हो, परमेश्वर के साथ आस्था का मार्ग सुरक्षित रहता है।

क्रॉस-रिफरेंस और उनका संक्षेप उपयोग

1) यशायाह 8:12-13: भय को न मानकर परमेश्वर के आगे खड़े रहने की सीख देता है।

2) रोम 8:31: यदि परमेश्वर हमारे लिए है, तो कौन विरोध कर सकता है—विश्वास में आश्वासन मिलता है।

3) मत्ती 6:34: भविष्य की चिंता से अधिक परमेश्वर के भरोसे पर टिके रहने हेतु प्रेरणा मिलती है।

इन संदर्भों के मिलान से यह स्पष्ट होता है कि भय के समय में परमेश्वर की सुरक्षा और योजना को प्राथमिकता देना कितना आवश्यक है।

आज के संदर्भ में व्यावहारिक अनुप्रयोग

- कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखें; भागना-छुपना नहीं, बल्कि उसकी दिशा में कदम बढ़ाएँ।

- जोखिम के बीच आकार लेने वाली सुरक्षा उसकी योजना का हिस्सा है—धैर्य और प्रार्थना से मार्ग मिल सकता है।

- मौजूदा कठिनाईयों में भी समुदाय के बीच एक-दूसरे को संभालना, सहायता देना और विश्वास को मजबूत बनाना सीखें।

नोट: इस commentary में निम्न विचारधाराओं के संक्षिप्त उद्धरण (जहाँ उपलब्ध) केवल संदर्भ हेतु हैं: “ईश्वर अपने लोगों के लिए संरक्षण बनाते हैं”; “भय के समय भी मार्ग मिल सकता है”; “परमेश्वर की योजना सर्वोपरि रहती है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 7:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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